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Mahashivratri : रीवा में 40 साल पहले हुई शुरुआत अब बन गई जन-जन का उत्सव

- महाशिवरात्रि के दिन शहर में निकलेगी भव्य शिवबारात, करीब एक लाख लोगों के शामिल होने का अनुमान

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रीवा

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Mrigendra Singh

Feb 17, 2023

rewa

Mahashivratri , Shivbarat Rewa Madhya Pradesh


रीवा। महाशिवरात्रि के दिन शहर में हर साल निकलने शिवबारात इस बार और भी भव्य स्वरूप में होगी। पंचमठा आश्रम में अब से 40 वर्ष पहले शहर के कुछ लोगों ने धार्मिक आयोजन की तरह एक शुरुआत की थी। महाशिवरात्रि के दिन पूजा-पाठ के साथ पंचमठा में भंडारे की शुरुआत हुई। शुरुआत के कुछ वर्षों में कम लोग ही इसमें शामिल होते थे। धीरे-धीरे लोग जुड़ते गए और कारवां बढ़ता गया। आयोजकों में अधिकांश अब दिवंगत हो चुके हैं लेकिन उनके संकल्पों को नई पीढ़ी ने संभाल लिया है और आगे बढ़ा रही है। अब यह आयोजन भव्य स्वरूप ले चुका है। पहले जहां भंडारे में दो से तीन सौ की संख्या में लोग शामिल हुआ करते थे, अब उसमें करीब ५० हजार से अधिक लोग शामिल होने लगे हैं। कार्यक्रमों की संख्या भी बढ़ी है।
आयोजन में पहले पंचमठा मंदिर में महाशिवरात्रि के एक दिन पहले रामचरित मानस का पाठ प्रारंभ होता था और महाशिवरात्रि के दिन पूजा-पाठ के बाद भंडारा होता था। बाद में यहां पर भगवान शंकर की झांकी सजाई जाने लगी और फिर शिवबारात निकलने लगी। अब शिवबारात में कई अलग-अलग दृश्यों के साथ झांकियां भी बारात के साथ निकलने लगी हैं। पूरे शहर का भ्रमण करने के बाद बारात पंचमठा पहुंचती है, जहां पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ शिव विवाह का कार्यक्रम होता है और भंडारे में शहर के साथ ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी शामिल होते हैं।
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वर्ष 2007 से शिवबारात का आकर्षण बढ़ा
महाशिवरात्रि के दिन आयोजन तो पहले भी होते रहे हैं। शिव-विवाह के कार्यक्रम दशकों पहले से होते रहे हैं लेकिन शहर में शिवबारात की शोभा यात्रा निकालने का क्रम वर्ष 2007 से और आकर्षक हुआ। इसी वर्ष से नई पीढ़ी के लोगों ने कार्यक्रम की जिम्मेदारी अपने हाथ में ली। इसके सूत्रधार मनीष गुप्ता, अनिल केशरी सहित कुछ अन्य लोग रहे। इन्होंने पहले साल तीन बैलगाडिय़ों को सजाया और उसमें भगवान शिव की शोभा यात्रा निकाली गई। आयोजन में अधिक लोग नहीं जुड़े, करीब साढ़े तीन सौ की संख्या में लोग शामिल हुए। शहर में निकाली गई इस शिवबारात का लोगों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा। अगले वर्ष कई लोग सहयोग देने के लिए आगे आए और ऊंट एवं घोड़े सहित बारात की भव्यता बढ़ाई गई। अब हजारों लोग एक साथ बारात में निकलते हैं और जगह-जगह स्वागत किया जाता है। शहर के विभिन्न स्थानों पर स्वागत के लिए अलग-अलग संगठनों के हजारों लोग शामिल होते हैं। इस साल कार्यक्रम को और भव्य बनाने की तैयारी है।
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साम्प्रदायिक सौहार्द का केन्द्र भी रहा है पंचमठा
शहर के जिस पंचमठा आश्रम में शिव-विवाह एवं भंडारे का आयोजन होता है, वह सांप्रदायिक सौहार्द का केन्द्र भी रहा है। यह स्थल मुस्लिम बस्ती के बीच है। शिवबारात में मुस्लिम समाज के लोग भी सहयोग प्रदान करते हैं। बताया गया है कि यहां पर स्थित शिवमंदिर में जफरअली नाम के व्यक्ति ने कई वर्षों तक नियमित पूजा की है। आश्रम के महंत मोतीदास ने पहले यहां की व्यवस्थाएं बनाई और अब विजय ब्रम्हचारी महराज इसको आगे बढ़ा रहे हैं।
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इंदिरागांधी बता चुकी हैं पंचमठा का रमणीक स्थल
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी पंचमठा आश्रम में दो बार पहुंच चुकी हैं। यहां पर इंदिरा गांधी ने आम का पौधा लगाया था जो अब बड़ा पेड़ बन चुका है। उन्होंने कहा था कि पंचमठा आश्रम रमणीक स्थल है, यहां पर आकर मन को शांति मिलती है। इस आश्रम में समय-समय पर धार्मिक एवं राजनीतिक क्षेत्र के लोग आते रहे हैं।


- इसलिए महत्वपूर्ण है पंचमठा आश्रम
शहर का पंचमठा आश्रम अपने आम में महत्वपूर्ण है। यहां पर आदि शंकराचार्य आए थे। कई दिनों तक रुके रहे, इसी स्थल पर उन्होंने बौद्ध धर्मगुरुओं के साथ शास्त्रार्थ भी किया था और उसके बाद से विंध्य क्षेत्र में सनातन धर्म का विस्तार हुआ। कहा जाता है कि देश में चार मठों की स्थापना के बाद रीवा में ही पांचवे मठ की स्थापना आदि शंकराचार्य करना चाहते थे। बीच में ही उनका देहावसान हो गया, जिसकी वजह से यहां पर पांचवे मठ की स्थापना नहीं हो पाई लेकिन इसका नामकरण पंचमठा जरूर हो गया। यहां पर प्राचीन शिवमंदिर है, जहां सैकड़ों वर्ष से पूजा हो रही है। पांच साल पहले इसी पंचमठा आश्रम से सरकार ने एकात्म यात्रा निकाली थी। जहां पर कई शंकराचार्यों के साथ मुख्यमंत्री भी शामिल हुए थे।
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इन लोगों ने चार दशक पहले शुरू कराया था कार्यक्रम
शहर के पंचमठा में शिवविवाह एवं भंडारे का आयोजन प्रारंभ करने में करीब आधा दर्जन लोग शामिल रहे। बाद में सहयोगी जुड़ते गए। इसमें प्रमुख रूप से समाजसेवी रमेशचंद्र गुप्ता, रामचरण गुप्ता, स्वतंत्रता सेनानी पंडित चंद्रकांत शुक्ला, भीखराज, आसनदास ठारवानी, त्रिवेणी प्रसाद सिंह, धनवंतर लाल, ओपी गुप्ता सहित अन्य शामिल रहे। इसमें अधिकांश अब दिवंगत हो चुके हैं।
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अब नई पीढ़ी ने संभाला मोर्चा
शहर में शिवबारात के भव्य आयोजन की जिम्मेदारी अब रमेशचंद्र गुप्ता के पुत्र मनीष गुप्ता एवं अन्य संभाल रहे हैं। जिसमें प्रमुख रूप से मनीष गुप्ता के साथ सुमित गुप्ता, प्रतीक पाण्डेय, प्रतीक मिश्रा, लवकुश गुप्ता, अनिल केशरी, ओमप्रकाश मिश्रा, राजेन्द्र निगम, संजय श्रीवास्तव, विनोद गुप्ता, वंशी साहू, मोहित अग्रवाल, निक्की मोदनवाल, सुरेश विश्वनोई, रमाकांत पुरवार, सरिता गुप्ता, योगिता सिंह, भारती शर्मा सहित करीब आधा सैकड़ा लोगों की टीम है जो शिवबारात के आयोजन को भव्य बनाने का कार्य करती है।
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बारात का 131 जगहों पर स्वागत होगा
शिवबारात का स्वागत करने पूरा शहर उमड़ता है। जिसमें अलग-अलग संगठनों के लोग शामिल होते हैं। इस बार 131 जगहों पर बारात का स्वागत किया जाएगा। आयोजन समिति का कहना है कि इस बार एक लाख लोगों को आमंत्रण भेजा गया है। शिव चालीसा के साथ यह आमंत्रण रीवा शहर के साथ ही ग्रामीण क्षेत्र और संभाग के दूसरे जिलों में भी भेजा गया है।
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बारात में ये रहेंगें मुख्य आकर्षण
शिवबारात में क्रमबद्ध तरीके से कई अलग-अलग झांकियां निकाली जाएंगी। नंदी पर सवार भोलेनाथ की बारात में धर्म ध्वजा, शहनाई, नगडिय़ा, ऊंट, घोड़ा, बग्घी, झंकार धमाल, राधाकृष्ण की झांकी, औघड़ मसान नृत्य की झांकी, भगवान शिव की पार्वती को ब्रह्म ज्ञान प्रदान करते हुए की झांकी, महाकाल की पालकी, रामेश्वरम ज्योर्तिलिंग पूजा की झांकी, देशभक्ति की झांकी, रावण व हनुमान संवाद की झांकी, डिंडोरी के कलाकारों का गुदुंब नृत्य, काली नृत्य, अघोरी नृत्य एवं चलित आर्केष्ट्रा मुख्य आकर्षण का केन्द्र रहेंगे।
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पांच हजार किलो खिचड़ी शहर में बंटेगी, एशिया बुक आफ रिकार्ड में होगा दर्ज
रीवा। शिवबारात का आयोजन इस बार ऐतिहासिक होने जा रहा है। कार्यक्रम की भव्यता को एशिया बुक आफ रिकार्ड में दर्ज किया जाएगा। इसके लिए निगरानी करने वाली टीम एक दिन पहले ही रीवा पहुंचेगी। इस बार बड़े आकार का कड़ाहा तैयार किया गया है। जिसमें पांच हजार किलो मात्रा में अनाज एवं मसाले के साथ खिचड़ी तैयार की जाएगी। अब तक एशिया बुक आफ रिकार्ड में तीन हजार किलो अनाज एक साथ पकाने का रिकार्ड दर्ज है। आयोजन समिति ने बताया है कि बड़ी मात्रा में तैयार होने वाली खिचड़ी को वितरित कराने के लिए शहर के विभिन्न स्थानों पर स्टाल लगाए जाएंगे। प्रमुख मंदिरों में भी प्रसाद के रूप में इसका वितरण होगा। पंचमठा के भंडारे में खिचड़ी के अलावा दूसरे भोजन भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
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हमारे पिता जी एवं उनके कुछ साथियों ने ४० वर्ष पहले भंडारे और शिवविवाह का कार्यक्रम शुरू किया था। उस पीढ़ी के अधिकांश लोग अब नहीं हैं। हम सबका प्रयास होता है कि हर साल कार्यक्रम को भव्य बनाया जाए। इस बार करीब एक लाख लोगों के शामिल होने का अनुमान है। प्रशासन से अनुरोध किया है कि उस हिसाब से आवागमन एवं सुरक्षा व्यवस्था प्रदान करें।
मनीष गुप्ता, अध्यक्ष आयोजन समिति
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पहले सीमित स्वरूप में कार्यक्रम होता था। हम सबने शिवबारात की शोभा यात्रा शहर में निकाली तो लोगों ने बड़ा सहयोग दिया। सैकड़ों लोग इस आयोजन के लिए दो महीने पहले से जुट जाते हैं। अब यह कार्यक्रम किस व्यक्ति का नहीं बल्कि जन-जन का उत्सव बन गया है।
अनिल केशरी, सदस्य आयोजन समिति
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