
mukundpur zoo, Adoptioners will have to raise the cost of animal food
रीवा। महाराजा मार्तण्ड सिंह जूदेव चिडिय़ाघर मुकुंदपुर में अब जानवरों का पालक बनने का अवसर देने की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। इसके लिए कोई भी व्यक्ति या संस्था जानवरों को निर्धारित अवधि तक के लिए गोद ले सकेगा। उस दौरान जानवर के भोजन और रखरखाव में आने वाला खर्च भी संबंधित को ही वहन करना होगा।
पूर्व में चिडिय़ाघर द्वारा भेजे गए प्रस्ताव पर अब शासन ने जानकारी मांगी है। जिसमें तय किया जाएगा कि एक जानवर को गोद लेने पर कितनी राशि जमा करनी होगी। इस नई व्यवस्था से जानवरों के प्रति लोगों का लगाव बढ़ेगा और जनहित का कार्य कर करने का अवसर भी मिलेगा। साथ ही चिडिय़ाघर द्वारा हर महीने लाखों रुपए जानवरों के भोजन और रखरखाव में जो खर्च हो रहा है उस पर भी बचत होगी। इसमें चिडिय़ाघर प्रबंधन की कुछ शर्तें होंगी जिसके लिए जानवर को गोद लेने की प्रक्रिया के दौरान अनुबंध पर हस्ताक्षर कराया जाएगा। सेंट्रल जू अथारिटी के पास भी स्थानीय स्तर पर बनाई जा रही व्यवस्था का अनुमोदन करने के लिए भेजा जाएगा।
बाड़े पर दर्ज होगा पालक का नाम और अवधि
जानवरों के पालक ब्यौरा और अवधि बाड़े के बाहर दर्ज किया जाएगा। इसमें जानवर का नाम, पालक का नाम और पता के साथ ही यह भी बोर्ड में लिखा जाएगा कि किस तिथि से कब तक के लिए गोद लिया गया है। इससे गोद लेने की व्यवस्था का प्रचार-प्रसार भी होगा। अन्य लोग भी इसके लिए आगे आएंगे।
एक माह से वर्ष भर के लिए होगा अनुबंध
चिडिय़ाघर प्रबंधन अभी गोद लेने की व्यवस्था का प्रारूप तय कर रहा है। जिसमें एक महीने से लेकर एक वर्ष तक का अनुबंध करने का प्रावधान रखा जाएगा। इसमें दो महीने, तीन महीने, छह महीने, आठ महीने, दस महीने और एक साल तक जानवरों के भोजन में आने वाले खर्च की राशि संबंधित पालक से जमा कराई जाएगी। अभी यह तय नहीं हो पाया है कि उक्त अवधि में कितनी राशि खर्च होगी। बताया जा रहा है कि सप्ताह भर के भी शासन को इसकी रिपोर्ट भी भेजनी है, इस वजह से तीन या चार दिनों के भीतर पूरा खाका तैयार कर लिया जाएगा।
किसी भी जानवर को ले सकेंगे गोद
चिडिय़ाघर में शाकाहारी और मांसाहारी किसी भी तरह के जानवर को गोद लिया जा सकता है। हर जानवर के आहार एवं अन्य रखरखाव के इंतजाम में खर्च होने वाली राशि का विवरण तैयार किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि बाघ और बब्बर शेरों का आहार हर दिन का औसत १२ किलो मांस है। वहीं शाकाहारी जानवरों के आहार से जुड़ा मैन्यू भी तैयार किया जा रहा है।
चिडिय़ाघर और सफारी के जानवरों की संख्या
सफेद बाघ- 04
बब्बर शेर- 02
बाघ - 02
भालू - 02
तेंदुआ- 03
चीतल - 20
कृष्णमृग - 08
सांभर - 05
बार्किंग डियर -04
नीलगाय - 02
चौसिंघा - 02
***** - 02
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जानवरों को गोद लेने की प्रक्रिया जल्द ही प्रारंभ की जाएगी। शासन ने भी प्रस्ताव मांगा है, जिसे तैयार कर भेजा जाएगा। अवधि को लेकर अभी तय नहीं है कि न्यूनतम और अधिकतम कितनी होगी। सप्ताह भर के भीतर प्रस्ताव भेज दिया जाएगा, वहां से अनुमति आते ही प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
संजय रायखेड़े, संचालक चिडिय़ाघर मुकुंदपुर
Published on:
17 May 2018 12:47 pm
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