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अवैध निर्माण तोडऩे की अनुमति के बाद भी नगर निगम खामोश

11 अवैध निर्माण पर कार्रवाई के लिए एमआईसी ने दी थी स्वीकृति, एक पर कार्रवाई हुई, राजनीतिक दबाव बढ़ा तो शांत हुए निगम के अधिकारी

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रीवा

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Mrigendra Singh

Dec 05, 2017

Rewa Nagar Nigam

Rewa Nagar Nigam

रीवा. शहर में तेजी के साथ बढ़ रहे अवैध निर्माण पर कार्रवाई नहीं करने के चलते आधे से अधिक निर्माण अवैध हो चुके हैं। इनकी शिकायतें भी निगम कार्यालय में धूल फांक रही हैं। इतना ही नहीं पूर्व में मेयर इन काउंसिल ने 11 अवैध निर्माणों को तोडऩे की अनुमति दी थी, उस पर भी अब निगम प्रशासन खामोश हो चला है। उस दौरान अधिकारियों की भूमिका पर उठते सवालों के बीच एक अवैध निर्माण गिराया गया था। वह सरकारी भूमि पर बनाया गया था। शेष बचे दस चिन्हित अवैध निर्माण पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं सकी है। राजनीतिक दबाव के चलते निगम के अधिकारियों ने भी किसी तरह की कार्रवाई को आगे नहीं बढ़ाया है बल्कि जिन बिल्डिंग्स को चुना गया था उनमें निर्माण बराबर चलता रहा और रोकने तक का प्रयास नहीं किया गया।

एमआईसी ने इन भवनों को अवैध घोषित किया था
मेयर इन काउंसिल में प्रस्ताव लाया गया था कि 11 अवैध निर्माण पर कार्रवाई की अनुमति दी जाए। जिसे स्वीकृति भी दी गई थी। इसमें आशीर्वाद कांस्ट्रक्शन एंड डेवलपर्स ढेकहा, अविनाश खंडेलवाल, शाही बिल्डर्स, प्रदीप पटेल रतहरा, चंद्रलोक रेसीडेंसी चोरहटा, डॉ. एपी सिंह खुटेही, नीलम मिश्रा खुटेही, अशोक सिंह नरेन्द्र नगर, कुसुम मिश्रा नरेन्द्र नगर, आनंदवती सिंह, वंदना सिंह नरेन्द्र सिंह, प्रतिमा सिंह खुटेही आदि की बिल्डिंग्स पर कार्रवाईके लिए कहा था।

राशि जमा करा ली फिर भी कंंपाउंडिंग नहीं की
जिन भवनों को गिराने का निर्देश एमआईसी ने दिया था, उस पर नगर निगम के अधिकारियों ने डॉ. एपी सिंह के सुभाष तिराहे में स्थित शॉपिंग काम्प्लेक्स को ढहा दिया था। इसके अलावा विधायक नीलम मिश्रा ने 19.56 लाख रुपए बतौर जुर्माना राशि जमा कराया है। इसी तरह शाही बिल्डर्स और अवनीश खंडेलवाल ने भी राशि जमा कर दी है। इसके बावजूद उक्त बिल्डिंग अवैध निर्माण के रूप में अब तक निगम के रिकार्डमें चिन्हित हैं।

अधिकार को लेकर हो चुका है विवाद
अवैध निर्माण की कंपाउंडिंग करने के अधिकार को लेकर एमआईसी के सदस्यों और निगम के अधिकारियों के बीव विवाद की स्थिति पूर्व में निर्मित हो चुकी है। एमआईसी ने 3 अक्टूबर 2016 को निगम अधिकारियों के प्रस्ताव पर 11 निर्माणों को अवैध घोषित किया था। बाद में इन्हीं निर्माणकर्ताओं से यह कहते हुए निगम के अधिकारियों ने कंपाउंडिंग राशि जमा करा ली कि एमआईसी के निर्देश के पहले 20 सितंबर 2016 को शासन ने यह अधिकार निगम आयुक्त को दिया था। इस पर परिषद की कई बैठकों में हंगामा हो चुका है, इसके बाद भी कार्रवाई नहीं की गई है।

अवैध निर्माण को संरक्षण के हैं कई आरोप
नगर निगम के अधिकारियों पर अवैध निर्माण करने वालों का संरक्षण देने के कईगंभीर आरोप हैं। बीते महीने ही अवैध निर्माण पर कार्रवाई में एक पक्ष को लाभ पहुंचाने के आरोप में कोर्टने निगम के सहायक यंत्री आनंद सिंह को आरोपी बनाते हुए गिरफ्तार करवा कर जेल भेज दिया था। सबसे अधिक आरोप उन पर ही लगते रहे हैं। जेल जाने के कारण उन्हें निलंबित भी किया जा चुका है।