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रीवा/अतरैला. ग्राम सेवादल समिति एवं शोध संस्थान के अध्यक्ष एवं पोषण अभियान टीम जवा द्वारा विलुप्त हो रहे जैविक अनाजों के संरक्षण एवं संर्वधन के लिये पहल की गई है। जिसका परिणाम है कि विलुप्त हो रही मोटे अनाज की फसलें किसानों के खेतों में लहलहा रही है।
पांच-पांच किसानों को दिए गए बीज
बताया गया है कि दस गांवों में किसानों को चिन्हित कर मिट्टी परीक्षण कराकर जैविक अनाज सामा, काकुन, कोदौ, ज्वार, बाजरा की खेती की गई है। चिह्नित गांवों भडऱा, सांगी, चिर्रिहा, सोनापोखर, डांड़ी, ऊचाडीह, इटमा, मुसरा, इटौरी गांव के पांच-पांच किसानों को बीज प्रदाय कर खेतों में बुबाई करायी गयी। जिससे आने वाले समय में इन विलुप्त हो रही जैविक अनाजों का बीज तैयार किया जा सके। यह जानकारी देते हुए टीम के समन्यवक ह्रिदयेश सिंह ने बताया कि आज के समय में जैविक अनाज सामा, काकुन, कोदौ, ज्वार-बाजरा विलुप्त होने की कागार पर है । जिनके संरक्षक के लिए किसानों में जागरूक्ता लाकर पारम्परिक फसलों की बुवाई कराकर फसल तैयार किया जा रही है। जिससे आने वाले समय में पर्याप्त मात्रा में इन फसलों का बीज उपलब्ध हो सके वा किसान जैविक अनाजों का उत्पादन कर अपना जीवन खुशहाल बनायें।
इन बीमारियों से बचाते हैं मोटे अनाज
बताया गया है कि पारम्परिक मोटे अनाजों के उपयोग से डायबिटीज, ब्लड प्रेसर, गैस्टिक जैसी अन्य बीमारियों से बचा जा सकता है। इस कार्य में जिला समन्यवक प्रवीण सिंह, कप्तान सिंह, जगदीश यादव, सशांक तिवारी, संतोष वर्मा, लालता प्रसाद, रमेश अदिवासी आदि सहयोग कर रहे हैं।
Published on:
26 Aug 2019 05:31 pm
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