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अब मरीजों को ऑनलाइन मिलेगा आयुर्वेदिक उपचार, जानिए कैसे ले सकेंगे सुविधा का लाभ

आयुर्वेद कॉलेज प्रबंधन ने जारी किया नंबर, हर दिन एक घंटे चिकित्सक रहेंगे मौजूद

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रीवा. लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे मरीज अब फोन पर आयुर्वेद चिकित्सा की सलाह ले सकेंगे। यह नई व्यवस्था आयुर्वेद कॉलेज ने बनाई है। प्रबंधन की ओर से फोन नंबर भी जारी कर दिया गया है।

सुबह 10 से 11 बजे तक मिलेगी सुविधा
फोन नंबर 07662 221042 पर सुबह 10 बजे से 11 बजे तक संपर्क कर मरीज आयुर्वेद के विशेषज्ञ चिकित्सकों से सीधे बात कर सकेंगे। कॉलेज प्रबंधन की ओर से मरीजों को चिकित्सीय उपचार की सलाह देने के लिए अलग-अलग दिन निर्धारित किए गए हैं।

इन बीमारियों को मिलेगा इलाज
सोमवार को कायचिकित्सा एवं पंचकर्म, मंगलवार को शल्य चिकित्सा, बुधवार को नाक, कान, गला, नेत्र, मुख, दंत रोग और गुरुवार को बाल रोग, शुक्रवार को स्त्री एवं प्रसूति रोग, शनिवार को योग चिकित्सा संबधी सलाह प्रदान की जाएगी। मालूम हो कि आयुर्वेद चिकित्सालय में बवासीर, भगदंर का क्षारसूत्र विधि से उपचार किया जाता हे। अग्निकर्म चिकित्सा व जलौकावचारण चिकित्सा लीच थैरेपी से हार्ट की बीमारी का उपचार यहां होता है। आयुर्वेद कॉलेज के प्राचार्य डॉ. दीपक कुलश्रेष्ठ ने बताया कि इस सुविधा से मरीजों को आने-जाने का खर्च बचेगा।

अब योग की पढ़ाई भी होगी
आयुर्वेद कॉलेज में अब योग की पढ़ाई भी होगी। एक वर्षीय योग सर्टिफिकेट कोर्स प्रारंभ किया गया है। पैरामेडिकल काउसिंल भोपाल से संबद्धता प्राप्त हो गई है। यह पाठ्यक्रम रोजगार परक बताया जा रहा है। अभ्यर्थी बारहवीं के बाद इसमें प्रवेश ले सकते हैं।

आयुर्वेद क्या है?
आयुर्वेद प्राचीन भारतीय प्राकृतिक और समग्र वैद्यक-शास्र चिकित्सा पद्धति है। जब आयुर्वेद का संस्कृत से अनुवाद करे तो उसका अर्थ होता है "जीवन का विज्ञान" (संस्कृत मे मूल शब्द आयुर का अर्थ होता है "दीर्घ आयु" या आयु और वेद का अर्थ होता हैं "विज्ञान"। आयुर्वद का ज्ञान पहले भारत के ऋषि मुनियों के वंशो से मौखिक रूप से आगे बढ़ता गया उसके बाद उसे पांच हजार वर्ष पूर्व एकग्रित करके उसका लेखन किया गया। आयुर्वेद पर सबसे पुराने ग्रन्थ चरक संहिता, सुश्रुत संहिता और अष्टांग हृदय हैं। यह ग्रंथ अंतरिक्ष में पाये जाने वाले पाँच तत्व-पृथ्वी, जल वायु, अग्नि और आकाश, जो हमारे व्यतिगत तंत्र पर प्रभाव डालते हैं उसके बारे में बताते हैं। यह स्वस्थ और आनंदमय जीवन के लिए इन पाँच तत्वों को संतुलित रखने के महत्व को समझते हैं।