
Over 3,000 acres of land of dozens of farmers became barren
रीवा. दर्जनों किसानों की लगभग 3 हजार एकड़ से अधिक जमीन बंजर हो चुकी है। उस जमीन में जाने का रास्ता सोलर पॉवर प्लांट बन जाने से बंद हो गया है। जिससे किसान उक्त भूमि मेें खेती करने को नहीं पहुंच पा रहे हैं। बेबश किसानों ने कहा कि यदि जंगल एवं सोलर प्लांट के बीच उनकी अत्यंत उपजाऊ जमीन फंस गई हैं। प्रशासन की गलत नीति के कारण हजारों एकड़ में अब वे खेती नहीं कर पा रहे हैं। जबकि यह जमीन दो फसली उपज की है।
रीवा मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर बदवार गांव में बने सोलर पॉवर प्लांट के कारण इर्द-गिर्द गांव के किसानों की जमीन प्लांट और जंगल के बीच में फंस जाने के कारण लगभग 3000 एकड़ से अधिक भूमि बंजर हो चुकी है। जबकि उक्त भूमि से दो फसली उत्पादन लेने वाले किसान अब भूखों मरने की कगार पर हैं। इस जमीन में तिलहन-दलहन के साथ धान का अच्छा-खासा उत्पादन होता था। लेकिन अब किसानों का लाखों रुपए का नुकसान हो रहा है। यहां की भूमि सोलर पॉवर प्लांट को दिए जाने के समय किसानों की इस भूमि के लिए प्रशासन द्वारा रास्ते का इंतजाम नहीं किया गया था। जिसका खामियाजा अब किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
जंगल से होकर जाता है रास्ता
गांव वालों की जो जमीन पड़ती पड़ी है। वहां के खेतों तक जाने के लिए जंगल होकर के करीब 20 किलोमीटर का रास्ता तय करने के बाद जाना पड़ता है। किसानों ने बताया कि खेत तक पहुंचने के लिए ट्रैक्टर एवं अन्य वाहन ले जाने के लिए जंगल में रास्ता नहीं है। जिसके कारण उनकी भूमि बिना बोए बंजर पड़ी है। उसमें किसान खेती नहीं कर पाए हैं।
इन किसानों की जमीन हुई बंजर
सोलर प्लांट एवं जंगल के बीच में जिन किसानों की जमीन फंसकर बंजर हो गई है। उनमें बदवार निवासी बुद्धसेन पटेल, वंशगोपाल, बृजभान, दिनेश कुशवाहा, रामानुज पटेल, रामकृष्ण, विनोद कुमार आदि शामिल हैं। 20 किलोमीटर पैदल चलकर बंजर पड़ी अपनी जमीन पर पहुंचे किसानों ने बताया कि उनकी यह जमीन अत्यंत उपजाऊ थी, लेकिन अब रास्ता नहीं होने से पड़ती है। उन्होंने इसके लिए प्रशासनिक अदूरदर्शिता को जिम्मेदार ठहराया।
सबसे ज्यादा बदवार के किसान प्रभावित
प्लांट और जंगल के बीच में जिन गांवों की हजारों एकड़ जमीन फंसी है उसमें सबसे ज्यादा बदवार गांव के किसानों की जमीन शामिल है। इसके बाद बरसैता, जलदर, गढ़वा, इटार आदि गांव के किसान इस प्लांट के बीच में अपनी कृषि योग्य भूमि को छोडऩे के लिए मजबूर हो गए हैं। हालांकि इसकी जानकारी किसानों ने जिला प्रशासन के साथ ही राज्य सरकार को भी दी है। लेकिन उनकी जमीन तक पहुंचने के लिए रास्ता नहीं मुहैया कराया जा रहा है। यदि स्थिति रहेगी तो किसान अपनी पैतृक जमीन से हाथ धो बैठेंगे।
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बदवार सहित आधा दर्जन गांवों के लोगों की हजारों एकड़ जमीन सोलर प्लांट और जंगल के बीच फंस गई है। यहां तक पहुंचने के लिए रास्ता नहीं है। प्रशासन को चाहिए कि किसानों की इस जमीन तक पहुंचने के लिए रास्ता मुहैया कराए, जिससे वे खेती कर सकें।
-काशीनाथ पटेल, सरपंच ग्राम पंचायत बदवार
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खेतों की बुवाई नहीं होने से फसल नुकसान की जानकारी मिली है, रास्ता बंद की जानकारी नहीं है। नायब तहसीलदार से जानकारी लेकर समस्या का निदान किया जाएगा।
दादू भाई सिंह पेन्ड्रे, तहसीलदार गुढ़
Published on:
13 Sept 2018 01:58 pm
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