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राजनीतिक पार्टियों पर महिलाओं ने उठाई उंगली, मच गया घमासान, जानिए क्या है मामला

महिलाओं की आयोजित हुई तीन सभाएं...

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रीवा

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Ajit Shukla

May 31, 2018

Patrika Changemaker Campaign: meeting was held in Rewa for Womens

Patrika Changemaker Campaign: meeting was held in Rewa for Womens

रीवा। आधी आबादी सक्रिय हो जाए तो राजनीति की गंदगी साफ होते देर नहीं लगेगी। राजनीति की स्वच्छता में महिलाएं महत्वपूर्ण भूमिका में होगी। इतिहास इस बात का गवाह है। पत्रिका के महा अभियान ‘स्वच्छ करें राजनीति’ के तहत गुरुवार को आयोजित महिलाओं की सभा में यह विचार व्यक्त किया गया। साथ ही महिलाओं ने इस बात का संकल्प लिया कि वह न केवल राजनीति की स्वच्छता में सक्रिय होंगी, बल्कि इसके लिए दूसरों को भी प्रेरित करेंगी। ब्रह्माकुमारी आश्रम की संचालिका निर्मला बहन ने महिलाओं को संकल्प दिलाया। अभियान के तहत गुरुवार को तीन सभाओं का आयोजन किया गया।

महिलाओं के हाथ में रहती है सत्ता
घर हो या घर के बाहर प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से सत्ता महिलाओं के हाथ में ही रहती है। महिला अगर ठान लें तो पुरूष भी राजनीति में गंदगी से तौबा कर लेगा। जरूरत है तो बस महिलाओं को इसके लिए तटस्थता के साथ सोचने की।
निर्मला बहन, संचालिका ब्रह्माकुमारी आश्रम।

नेक इरादा रखने वालों की जरूरत
राजनीति की स्वच्छता के लिए जरूरी है कि राजनीति में नेक इरादा रखने वालों को स्थान मिले। वह महिला हो या पुरूष। शिक्षा से भी फर्क नहीं पड़ता है। हालांकि पुरूषों की तुलना में महिलाओं से स्वच्छता की उम्मीद अधिक की जा सकती है।
विभा पटेल, उपाध्यक्ष जिला पंचायत।

किसी को भी नेतृत्व देना गंदगी का कारण
राजनीति में गंदगी का सबसे बड़ा कारण किसी को भी नेतृत्व की कमान दे देना है। राजनीति पार्टियों भले ही किसी को भी चुनाव मैदान में उतार देती हों। लेकिन मतदाताओं को चुनाव उसी का करना चाहिए, जो समाज के लिए कार्य करे।
ममता नरेंद्र सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता।

महिलाओं को बनाना होगा खुद की पहचान
राजनीति में सक्रिय महिलाओं की वर्तमान में कमी नहीं है। लेकिन ज्यादातर महिलाएं केवल नाम की नेता व जनप्रतिनिधि है। उनके स्थान पर कार्य पति या पिता करते हैं। महिलाओं को अपनी खुद की पहचान बनानी होगी।
मनीषा पाठक, जिलाध्यक्ष भाजपा महिला मोर्चा।

बेटियां भी रोशन करती हैं पिता का नाम
बेटियां बेटों से कम नहीं हैं। राजनीति में भी अवसर मिले तो महिलाएं पुरूषों से बेहतर कार्य कर सकती हैं। बेटियां राजनीति में माता-पिता का नाम रोशन कर रही हैं। पूर्व के उदाहरण को छोड़ें वर्तमान में भी इसके कई उदाहरण मिलेंगे।
बबिता साकेत, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष।

परिवारवाद से मुक्त हो राजनीति
राजनीति में गंदगी का सबसे बड़ा कारण परिवारवाद है। एक ही परिवार को लोग पीढ़ी दर पीढ़ी राजनीति में बने हुए हैं। जब तक दूसरे लोगों को मौका नहीं मिलेगा राजनीति में स्वच्छता संभव नहीं है। पत्रिका का अभियान जरूर परिवर्तन लाएगा।
डॉ. सविता मिश्रा, समाजसेवी।


महिलाओं का शिक्षित होना जरूरी
राजनीति में महिलाएं अपना योगदान तभी दे पाएंगी। जब वह शिक्षित होंगी। कई महिलाएं सरपंच से लेकर विभिन्न पदों पर हैं। लेकिन शिक्षित नहीं होने के चलते कमान पतियों के हाथ में है। महिलाएं चाह कर भी कुछ नहीं कर सकती हैं।
नीलम चौरसिया, भाजपा नेत्री।


सामान्य महिलाएं भी हो जागरूक
यहां ज्यादातर ऐसी महिलाएं उपस्थित हैं, जो समाज में सक्रिय हैं। केवल इतने से काम नहीं चलेगा। जागरूक महिलाओं को चाहिए कि वह समाज की सामान्य महिलाओं को भी जागरूक करें। राजनीति में परिवर्तन तभी संभव है।
नजमा बेगम, पार्षद।

जागरूक महिलाएं दूसरों को करें जागरूक
समाज की सभी महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति तभी जागरूक होंगी, जो जागरूक महिलाएं खुद बाकी की महिलाओं को जागरूक करें। जब समाज की हर महिला जागरूक होगी तो समाज में स्थान बना लेंगी।
योगिता सिंह परिहार, अध्यक्ष छात्रसंघ।

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छात्राओं ने लिया संकल्प, स्वच्छ करेंगी राजनीति
स्वच्छ करें राजनीति के तहत महिलाओं की तरह नर्सिंग प्रशिक्षण संस्थान की छात्राओं ने भी संकल्प लिया कि वह न केवल राजनीति में अपनी सहभागिता देंगी। बल्कि घर से लेकर मुहल्ले व रिश्तेदार तक की महिलाओं को इसके लिए जागरूक भी करेंगी। छात्राओं को संस्थान की प्रभारी प्राचार्य अजगरी बेगम ने संकल्प दिलाया।

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निरंकारी संस्थान में स्वच्छ राजनीति पर चर्चा
पत्रिका अभियान के तहत निरंकारी संस्थान के सभाकक्ष में भी राजनीति की स्वच्छता व महिलाओं की भूमिका पर परिचर्चा की गई। संस्थान की संयोजिका राजकुमारी ने महिलाओं को पत्रिका के अभियान की जानकारी देते हुए कहा कि राजनीति की स्वच्छता के लिए महिलाओं को आगे आना होगा। क्योंकि जब तक महिलाएं इस बारे में नहीं सोचेंगी। राजनीति की गंदगी साफ नहीं होगी।