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पत्रिका जनसंवाद : लोगों ने ऐसा दिया सुझाव कि अमल हो तो मॉडल सिटी बन जाएगा अपना शहर

- भविष्य के पांच साल और रीवा के विकास की रूपरेखा पर जन संवाद कार्यक्रम आयोजित- लोगों ने कहा शहर विकास के लिए हर सकारात्मक पहल में खड़े रहेंगे साथ

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रीवा

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Mrigendra Singh

Aug 28, 2019

rewa

patrika Jan Samvad, city development plan of rewa



रीवा। आने वाले समय में रीवा शहर कैसा होना चाहिए, इसके लिए शहर के प्रमुख लोगों ने एक मंच पर बैठकर चर्चा की। समस्याएं उठाने के साथ ही उसके निराकरण के लिए सुझाव भी दिए। जिला पंचायत के सभागार में 'पत्रिकाÓ द्वारा जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें भविष्य के पांच साल और रीवा के विकास की रूपरेखा पर लोगों ने चिंतन किया। कई ऐसे महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए हंै, जिससे शहर की व्यवस्थाएं सुधरेंगी। अधिकांश लोगों ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी शहर के विकास के लिए कांक्रीट के कार्य निर्माण का केवल एक पक्ष हो सकते हैं। इसके अलावा भी दूसरे कई पहलू हैं, उनके बिना विकसित शहर की परिकल्पना नहीं की जा सकती।

इस जनसंवाद कार्यक्रम में जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों के साथ ही सीइओ अर्पित वर्मा सहित प्रमुख अधिकारियों ने भी सहभागिता निभाई और कहा कि उनकी ओर से शहर के साथ ही जिले के विकास के लिए जो भी हो सकेगा, वह करने के लिए तैयार हैं।

ये समस्याएं लोगों की ओर से रखी गई

- आवारा मवेशियों की बढ़ती संख्या के चलते गांवों में किसानों की फसलों को बड़ा नुकसान हो रहा है।
- हाइवे सहित अन्य सड़कों पर दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं, मवेशी इसकी वजह बन रहे, उनकी भी मौतें हो रहीं।
- शहर के लोगों में किताबें पढऩे की भूख लेकिन लाइब्रेरी की बेहतर व्यवस्था नहीं हैं।
- कम अंक पाने वाले छात्रों को कालेेजों में प्रवेश की हो रही बड़ी समस्या।
- शहर में कई जगह श्रमिक काम के लिए खड़े होते हैं, उनके लिए सुविधाएं नहीं हैं।
- सीवरेज सिस्टम खराब है, सीवर लाइन बिछाने के लिए सड़कें खोदकर छोड़ दी गईं।
- ट्रैफिक की समस्या के चलते शहर में लगता है जाम।
- सरकारी भूमि पर बड़े पैमाने पर हो गया अतिक्रमण।
- एक ही कन्या महाविद्यालय होने से छात्राओं को एडमिशन नहीं मिल पाता।
- पुराने जलस्त्रोत कुंए, तालाब, बाउली उपेक्षित हैं।
- शहर में दूषित पानी की हो रही सप्लाई।
- अस्पतालों में चिकित्सकों के साथ ही अन्य संसाधनों की कमी है।
- मोहल्लों में जलभराव की समस्या है।
- युवाओं को रोजगार के अवसर नहीं मिल रहे हैं।
- शहर के बाजार क्षेत्र में वाहन पार्किंग की सुविधा पर्याप्त नहीं।


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लोगों की ओर से दिए गए ये सुझाव
- स्टार्टअप के लिए विश्वविद्यालय की स्थापना रीवा में हो।
- रीवा में एयरपोर्ट विकसित करने की जरूरत।
- पुरातात्विक महत्व बढ़ाने हेरिटेज जोन बनाया जाए।
- रीवा में शासन नशामुक्ति केन्द्र खोले।
- आवारा मवेशियो के लिए गौशाला एवं अन्य विकल्प बढ़ाए जाएं।
- गौ अभयारण्य ग्रामीण क्षेत्रों में बनाए जाएं।
- कालेजों में प्राध्यापकों के पद भरे जाएं।
- अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई बड़े पैमाने पर हो।
- लक्ष्मणबाग के मुख्य द्वार के पास से गौशाला हटाकर दूसरी जगह व्यवस्थित किया जाए।
- वाटर हार्वेस्टिंग के लिए बाउली एवं कुएं साफ किए जाएं।
- लाइब्रेरी की बेहतर सुविधा शहर को मिले।
- शहर में एक और कन्या महाविद्यालय की स्थापना हो
- कामर्स और आर्ट के लिए अलग कालेज स्थापित किए जाएं।
- सस्ते किराए पर महानगरीय बस सुविधा मिले।
- शहर के बाहर कामर्शियल एरिया विकसित किया जाए।
- फुटपाथ को खाली कराया जाए, ताकि लोग चल सकें।
- दूसरे देशों के पुराने शहरों की तर्ज पर रीवा का हो विकास।
- सिटीजनशिप स्थापित करने पर हो जोर।
गांवों का विकास हो, व्यवस्थाएं बने तों पलायन रूके।

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पत्रिका के प्रयास को लोगों ने सराहा
शहर के विकास के लिए चिंतन करने समाज के सभी प्रमुख क्षेत्रों से जुड़े लोगों को एक मंच पर बुलाया गया। इस पर पहुंचे लोगों ने कहा कि ऐसे बहुत ही कम अवसर आए हैं, जब निर्वाचित जनप्रतिनिधि, राजनीतिक दलों के नेता, सामाजिक संगठनों के लोग, व्यवसाई, युवा, छात्र सहित अन्य एक साथ बैठे। आरोप-प्रत्यारोप की जगह शहर के विकास को लेकर सुझाव सामने आए हैं। सभी ने कहा कि पत्रिका ने सबको एक मंच पर लाकर विकास के लिए सकारात्मक चिंतन की शुरुआत की है। इसकी गति आगे भी बढ़ती रहेगी।
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शहर की जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है, गांवों के लिए सुविधा के लिए पहुंच रहे हैं। इसलिए गांवों और कस्बों में सुविधाएं देने पर जोर दिया जाए। सरकारी स्कूलों में सभी लोग बच्चों का दाखिला कराएं। तालाबों और बाउली को पुनर्जीवित करते हुए पौधरोपण पर फोकस करने की जरूरत है। जिससे हमारा पर्यावरण संरक्षित रह सके। गांवों में किसानों की फसलें आवारा जानवरों द्वारा तबाह की जा रही हैं। गौ-अभयारण्य की संख्या बढ़ाने की जरूरत है। शहर में कई जगह श्रमिक खड़े होते हैं, इनके लिए शेड एवं बैठने की व्यवस्था बनाई जाए। जनसंवाद में कुछ बड़ी मांगें उठी हैं, इसे राज्यसभा में उठाएंगे।
राजमणि पटेल, सांसद राज्यसभा
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सामाजिक सरोकार के मुद्दे पर सकारात्मक चिंतन बेहतर परिणाम देगा। हम जहां रहते हैं, वहां के लिए सोचना भी जरूरी होता है। अधोसंरचना विकास का केवल एक पक्ष है, अन्य कई जरूरतों को पूरा करने के लिए परिपक्व विकास होना चाहिए। महिलाओं, बुजुर्गों, दिव्यांगों, गरीबों सबके लिए सोचकर आगे बढऩा होगा। शहरियों को स्वयं विकास में भागीदारी निभानी होगी। एक ओर देश को चांद पर पहुंचने पर गर्व है तो वहीं हमें इसलिए भी जागरुकता का अभियान चलाना पड़ता है कि मां का दूध बच्चे के लिए लाभदायक होता है। सब मिलकर साथ चलेंगे तो बेहतर रीवा बनाने में मदद मिलेगी।
डॉ. अशोक कुमार भार्गव, संभागायुक्त रीवा
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शहर का समग्र विकास लोगों की सहभागिता से ही संभव है। मूलभूत जरूरतें सड़क, पानी और बिजली की सुविधाएं दी जा रही हैं। प्रधानमंत्री ने २०२२ तक सबको शुद्ध पानी देने का वादा किया है। रीवा शहर पहले से ही इस दिशा में आगे बढ़ रहा है। कई विसंगतियां भी आ रही हैं, इस पर कुछ कड़े कदम भी उठाने पड़ेंगे। शहरवासियों के सहयोग की इसमें जरूरत होगी। हमारा प्रयास है कि बिजली के क्षेत्र में सोलर सिटी के रूप में विकसित करें।
ममता गुप्ता, महापौर
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निर्माण कार्यों को देखकर शहर के विकास की परिभाषा नहीं गढ़ी जा सकती। रीवा में सिरमौर चौराहे के एक किलोमीटर के आसपास तक ही कांक्रीट का विकास सीमित रह गया। नई बस्तियों के लिए भी प्लान बनाने की जरूरत है। दु:ख तब होता है जब पता चलता है कि सुपर स्पेशलिटी जैसे अस्पताल को डाक्टर नहीं मिल रहे। शिक्षा ने उद्योग का रूप ले लिया है। दूसरे शहरों में संस्थान खुल रहे, रीवा में क्यों नहीं। स्टार्टअप के लिए रीवा में विश्वविद्यालय खोला जाए, पुस्तकालय की भी यहां जरूरत है।
घनश्याम सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता
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समस्याएं इतना अधिक हैं कि विकास की बातों के लिए हम आगे बढ़ नहीं पा रहे। कार्यांे के दौरान प्रमुख समस्या यह आ रही है कि हमारा मास्टर प्लान कई जगह कल्पनाओं पर आधारित होता है। प्लान में कोई क्षेत्र ग्रीन बेल्ट बताया जाता है, पता चलता है वहां वर्षों से कालोनी बनी है। इसलिए प्लानिंग को बेहतर करने की जरूरत है। वाटर हार्वेस्टिंग पर बेहतर काम होगा। छोटे व्यवसाइयों को ध्यान में रखकर काम करने की जरूरत है। जनसंवाद में जो भी सुझाव आए हैं, उन सब पर अमल करेंगे। लोगों से सहयोग की अपेक्षा रहेगी।
सभाजीत यादव, आयुक्त नगर निगम
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अधोसंरचना के आगे भी विकास है, यह समझने की जरूरत है। मास्टर प्लान जो बनाए जाते हैं वह किताबी होते हैं। इसमें अस्पतालों को लेकर जो शर्तें हैं, कोई भी पूरा नहीं कर रहे। नए और पुराने दो हिस्सों में हमारा शहर बंटा हुआ है। पुराना मोहल्ला उपरहटी संकरी गलियों के बाद भी व्यवस्थित है। नए मोहल्लों में जलभराव, ट्रैफिक की समस्या बनी रहती है। रेनवाटर हार्वेस्टिंग की शर्तों का पालन हो, युवाओं के लिए खेल सुविधाएं दी जाएं। कस्बाई क्षेत्रों का विकास हो तो शहर में जनसंख्या का दबाव घटे।
इंजी. राजेन्द्र शर्मा, अध्यक्ष चेंबर आफ कामर्स एण्ड बिल्डर्स
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शहर में आवारा पशुओं की बड़ी समस्या है। उनके संरक्षण की जरूरत है। मिलावटखोरी पर सरकार ने अच्छी पहल शुरू की है, इसमें आम लोगों को आगे आना होगा। शहर का सीवरेज सिस्टम खराब है, उसके सुधार की जरूरत है। अस्पतालों में संसाधनों की कमी है, पद खाली पड़े हैं भरने की जरूरत है। नए स्कूल तो खोलने की होड़ लगी है लेकिन पुरानों को व्यवस्था नहीं किया जा रहा है। शिक्षा सुधरेगी तो हमारी नई पीढ़ी शहर को संवारने का काम करेगी।
डॉ. सीबी शुक्ला, पूर्व संचालक एसजीएमएच
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पूरे रीवा जिले में बेसहारा पशुओं की समस्या है। सड़कों पर मरे पड़े मिलते हैं। इनके लिए पूरे विंध्य को बड़े प्रोजेक्ट की जरूरत है। किसानों की फसलों की सुरक्षा भी जिले में बड़ी समस्या है। सरकार ने ७० फीसदी स्थानीय युवाओं को रोजगार का दावा किया है। यहां जो भी उद्योग हैं, उनमें युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहे। अधिकारी बाहर के बुलाए जाते हैं और श्रमिक यहां के होते हैं। रीवा शहर को अभी मूलभूत सुविधाओं की जरूरत है।
लक्ष्मण तिवारी, पूर्व विधायक
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रीवा में एक और कन्या महाविद्यालय की जरूरत है। गांवों से आने वाली छात्राओं को प्रवेश नहीं मिल पाता। कम अंक पाने वाली छात्राओं को अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। सरकार को ऐसे नियम बनाने चाहिए ताकि सबको लाभ मिल सके। महिलाओं को स्वरोजगार से जोडऩे के लिए नए स्किल डेवलपमेंट सेंटर खोले जाएं।
विभा पटेल, उपाध्यक्ष जिला पंचायत रीवा
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मास्टर प्लान का पालन हो तो किसी और बात की जरूरत ही नहीं रहे। डिवाइडर के कट प्वाइंट ऐसे हैं कि हर दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। निगम की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों पर सख्ती की जरूरत है। अब जरूरत है कि नए स्थान पर शहर बसाया जाए। जागरुकता लाने की भी जरूरत है।
अजय मिश्रा बाबा, नेता प्रतिपक्ष नगर निगम
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रीवा का ऐतिहासिक महत्व रहा है। पुरातत्व के महत्व से जुड़ी बिल्डिंग का संरक्षण होना चाहिए। शिक्षा के बड़े संस्थानों की और जरूरत है। एयरपोर्ट की सुविधा हो तो बड़े डाक्टर रीवा आने लगें। लोगों को टहलने के लिए पार्कों को विकसित करने की जरूरत है।
एसएस तिवारी, संचालक जेएनसीटी
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रीवा शहर में क्राइम का रिश्ता सीधे तौर पर नशे से जुड़ रहा है। नशे के लिए युवक अपराध कर रहे हैं। नशामुक्ति के जो केन्द्र हैं वह प्रभावी नहीं हो रहे हैं। शासन स्तर से रीवा में बड़े नशामुक्ति केन्द्र खोलने की जरूरत है। जागरुकता के साथ ही लोगों को आगे आना होगा, तभी इस पर रोक लग सकती है।
शिवेन्द्र सिंह बघेल, सिटी एसपी रीवा
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हमें केवल पांच साल नहीं बल्कि आगामी २५ वर्षों के लिए चर्चा करने की जरूरत है। कालेजों में पद हैं, प्राध्यापक नहीं हैं। छात्रों के साथ छात्राएं भी बड़ी संख्या में नशे की ओर जा रहे हैं। शहर के व्यवस्थित विकास के लिए युवाओं का भविष्य देखना भी जरूरी है।
डॉ. विनोद श्रीवास्तव, रिटायर्ड एडी उच्च शिक्षा
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शहर की सबसे बड़ी समस्या अतिक्रमण की है, उसे दूर करने के लिए प्रयास हों। ट्रैफिक की अव्यवस्था ऐसी है कि हर जगह जाम लगता है। वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को बढ़ाने के लिए पुरानी बाउलियों को व्यवस्थित किया जाए। लक्ष्मणबाग आस्था का केन्द्र है, इसकी गौशाला को सामने से हटाकर अन्यत्र किया जाए।
मान सिंह, संरक्षक क्षत्रिय समाज
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कम किराए पर महानगरीय बस सेवा उपलब्ध कराने की जरूरत है। बस स्टैंड और ट्रांसपोर्ट नगर शहर के बाहर स्थापित हों तो वाहनों का दबाव कम होगा। नए कामर्शियल एरिया विकसित करने की जरूरत है। आगामी मास्टर प्लान के लिए काम चल रहा है।
आरके पाण्डेय, जेडी टीएण्डसीपी
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दूसरे देशों ने पुराने शहरों को किस तरह डेवलप किया है, उसी तर्ज पर रीवा को मॉडल सिटी बनाया जा सकता है। प्राकृतिक और ऐतिहासिक महत्व यहां पहले से मौजूद हैं। रीवा का फुटपाथ समझ में नहीं आता कि यह लोगों के चलने के लिए हैं या फिर पार्किंग एवं दुकानों के लिए। अनियंत्रित ट्रैफिक को सुधारने की जरूरत है।
प्रशांत जैन, चार्टर्ड एकाउंटेंट
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शहर में केवल एक सप्ताहिक बाजार है, इसे बढ़ाने की जरूरत है। ट्रैफिक का भार घटेगा। पार्किंग के संसाधन और बढ़ाए जाएं। अस्पतालों की दशा बेहद खराब है, स्टाफ की समस्या है। सोचने वाली बात यह है कि सिटीजनशिप समाप्त होती जा रही है। जनता को समस्याएं लेकर आगे आना होगा और सकारात्मक दिशा में सहयोग की जरूरत है।
डॉ. मुजीब खान, समाजसेवी
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युवाओं को शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट के लिए पूरे संसाधन देने की जरूरत है। शहर में सेंट्रल लाइब्रेरी के विकास की जरूरत है। इ-लाइब्रेरी की मांग भी है। गरीबों के बच्चों को शिक्षा की सुविधाएं नहीं मिल पाती। स्कूलों में नशे के प्रति जागरुकता चलाई जाए।
बीएन त्रिपाठी, संचालक पेंटियम प्वाइंट कालेज
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शहर की मूल जरूरतों को पूरा करने के साथ ही यह भी देखना होगा कि इससे परेशानी तो नहीं हो रही है। सड़कों को सुधारने की जरूरत है। कांक्रीट की जगह डामर की सड़कें बनाई जाएं। शहर के नजदीक नई सिटी बनाने पर भी सोचना होगा, क्योंकि स्थान के अभाव में अव्यवस्थित विकास हो रहा है।
नीरज पटेल, सदस्य मेयर इन काउंसिल
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स्वरोजगार के लिए अवसर उपलब्ध कराने की जरूरत है। उद्योग पतियों के साथ समिट की जा रही है, छोटे कारोबारियों के साथ भी सरकार बात करे, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार मिले। शहर में अवैध कालोनियों की संख्या बढ़ रही है, उस पर सख्ती से रोक लगाई जाए।
पंकज पटेल, बसपा नेता
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रीवा में स्वास्थ्य की सुविधाओं की समस्या है। सरकारी स्कूलों के सुधार हों, मूलभूत सुविधाओं पर भी जोर देने की जरूरत है। गरीब और बुजुर्ग भीख मांगते हैं, इनके लिए शेड एवं अन्य सुविधाएं दी जाएं। मंदिर का रखरखाव सुधारा जाए ताकि लोग सहजता से पूजापाठ कर सकें।
जुगुल किशोर कनौडिया, कारोबारी
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एक और कन्या महाविद्यालय की जरूरत है। शहर में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को लेकर अपेक्षा के अनुरूप काम नहीं हो रहा है। ट्रैफिक की समस्या है ही। सीसीटीवी कैमरे बढ़ाए जाएं ताकि महिलाओं को सुरक्षा मिल सके।
अनुराधा श्रीवास्तव, अध्यक्ष लायंस क्लब रीवा रायल
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युवाओं के लिए रोजगार की पहली जरूरत है। इसके लिए उद्योग स्थापित किए जाएं। नशे की लत भी भटकाव पैदा करती है, इसे रोकने के लिए शासन के स्तर पर बड़े प्रयास हों तो सुधार हो सकता है। सरकारी भूमियों को बचाने के लिए भी सबको आगे आने की जरूरत है।
बीके माला, सामाजिक कार्यकर्ता
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नए स्कूल खोलने के बजाय पुराने जो हैं, उनमें संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। स्कूलों के पास नशा की सामग्री बिक्री हो रही है, इसके लिए कड़े प्रावधान हों। सीवरेज सिस्टम भी शहर का बिगड़ता जा रहा है। निगम प्रशासन को इसके लिए भी ध्यान देने की जरूरत है।
ममतानरेन्द्र , सामाजसेविका
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गांवों से लोग शहर की ओर आ रहे हैं। इसलिए पहले गांवों का पलायन रोकने के लिए वहां शिक्षा, स्वास्थ्य के साथ ही रोजगार की सुविधा देने की जरूरत है। नगर निगम छोटे व्यवसाइयों को ध्यान में रखकर काम करे।
वीरेन्द्र सिंह पटेल, पूर्व पार्षद
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इन्होंने भी दिए सुझाव
शहर के आगामी पांच साल में किस तरह का विकास हो, इसके लिए कई अन्य लोगों ने भी अपने सुझाव दिए। जिसमें पार्षद रामप्रकाश तिवारी ने ट्रैफिक और अवैध कालोनियों की समस्या उठाई। पार्षद अशोक पटेल ने कहा कि शहर के बाहरी हिस्से के वार्डों में मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, उस पर ध्यान देने की जरूरत है। पूर्व पार्षद धनेन्द्र सिंह ने भी कहा कि मास्टर प्लान के अनुसार कार्य किए जाएं। व्यापारी संघ के अध्यक्ष नरेश काली ने कहा कि पार्किंग के लिए लोग परेशान होते हैं। स्वास्थ्य सेवाएं संसाधनों की कमी से जूझ रही हैं। बिल्डिंग हैं लेकिन डाक्टर नहीं हैं। महमूद खान ने कहा कि समग्र विकास के लिए सबको मिलकर प्रयास करना होगा। इसके अलावा रमेश पटेल, अशफाक अहमद, अनिल सिंह पिंटू, छात्र नेता अभिषेक तिवारी सहित अन्य ने शहर के विकास को लेकर अपने सुझाव दिए।