
Patrika talk show: Hawkers spoke, Paper distribution has become passion
रीवा। शुरुआत भले ही आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए हुई। लेकिन धीरे-धीरे अखबार के जरिए खबर बांटना कब जुनून बन गया मालूम नहीं चला। हाल यह है कि जिस दिन अखबार का वितरण नहीं किया उस दिन मन बेचैन सा रहता है। पत्रिका के स्थापना दिवस सेलिब्रेशन के तहत आयोजित टॉक शो में ज्यादातर हॉकर्स ने कुछ ऐसी ही फीलिंग शेयर की। बोले, अब सुबह उठना और लोगों को अखबार पहुंचना आदत बन गई है। बहुत नहीं मिलता। लेकिन जो मिलता है उसी में संतुष्ट हैं।
गर्मी व सर्दी हो या फिर बरसात, नहीं रुकती साइकिल
टॉक शो के दौरान हॉकर्स के उस जज्बे पर भी चर्चा हुई, जो हर मौसम में उनमें बरकरार रहता है। गर्मी हो या सर्दी या फिर बरसात। हर मौसम में हॉकर्स की साइकिल चलती रहती है। हॉकर्स ने कहा कि जिस दिन वह अपने पाठक को अखबार नहीं पढ़ा पाते बेचैन रहते हैं। इसलिए नहीं कि उनकी आय कम हो जाएगी। बल्कि इसलिए कि पाठक भी अखबार पढऩे का आदी होता है। अखबार नहीं मिलने पर ज्यादातर पाठक बेचैन रहते हैं। पाठकों की यही बेचैनी हॉकर्स को भी बेचैन करती है।
शुरुआत में रहे हॉकर, अब एजेंसी मालिक
पुराने बस स्टैंड पर अखबार की एजेंसी चला रहे वीरेंद्र साहू बताते हैं कि काम कोई भी हो। मेहनत और इमानदारी से किया जाए तो सफलता मिलनी तय है। वीरेंद्र बताते हैं कि उनके पिता समयलाल ने यह कर दिखाया है। पिता की मेहनत का फल वह और उनके भाई धीरेंद्र साहू को मिला है। वीरेंद्र के मुताबिक करीब 35 वर्ष पहले उनके पिता ने अखबार का वितरण शुरू किया था। अखबारों की संख्या में धीरे-धीरे बढ़ोत्तरी हुई और अब वह एजेंसी में तब्दील होकर शहर से लेकर गांव तक में पाठकों को अखबार उपलब्ध करा रहा है। कार्य अकेले शुरू किया, लेकिन अब दूसरों को भी व्यवसाय दे रहे हैं। पुराने बस स्टैंड में उनका बिजनेस विस्तृत रूप ले चुका है। इसके बावजूद दिन के समय में वह दूसरा बिजनेस भी कर लेते हैं। वीरेंद्र का कहना है कि पिता के साथ दोनों भाई इस बिजनेस में लगे हुए हैं।
इनकम सीमित, फिर भी 20 वर्षों से पहुंचा रहे अखबार
करीब 20 वर्ष पहले यह सोचकर अखबार बांटना शुरू किया कि कुछ इनकम हो जाएगी। सुबह समय भी प्रयोग में आ जाएगा। इनकम के लिए शुरू किया गया यह कार्य धीरे-धीरे आदत बन गई। अमहिया निवासी बलराम गुप्ता बताते हैं कि अखबार से मिल रही इनकम में केवल परिवार चलाना संभव हुआ है। इसके अलावा कुछ भी नहीं कर सके। फिर भी लोगों को घर में अखबार मुहैया कराना नहीं छोड़ा। सुबह चार बजे घर से निकलने और ११ बजे लौटकर आने का सिलसिला पिछले 20 वर्षों से चला आ रहा है। बलराम के मुताबिक अखबार बांटना छोडक़र दूसरा कोई काम शुरू किया जाए, यह बात कभी जेहन में नहीं आई। जबकि चार बच्चों सहित छह लोगों का परिवार चलाना उनके लिए चुनौती भरा रहा है। जैसे-तैसे मैनेज कर दो बेटियों की शादी की। उनका एक बेटा और एक बेटी अभी स्कूल में पढ़ाई कर रहे हैं।
राजकुमार ने संभाली पिता की विरासत
हर सुबह 400 अखबार का बंडल लेकर वितरण के लिए २५ किलोमीटर की साइकिलिंग करने वाले राजकुमार बताते हैं कि उन्हें अखबार बांटने का काम उनके पिता गुमान सिंह से विरासत में मिला। करना है या नहीं, यह ख्याल कभी मन में आया ही नहीं। राजकुमार का कहना है कि केवल अखबार बेच कर बहुत कुछ नहीं किया जा सकता है। लेकिन इतना जरूर है कि इससे बेहतर दूसरा कोई काम भी नहीं। अखबार का वितरण सुबह के समय होता है। इस समय कम पूंजी में दूसरा कोई व्यवसाय शुरू करना मुमकिन नहीं होता है। अखबार वितरण के साथ मॉर्निंग वॉक भी हो जाती है। राजकुमार भी इस बात को स्वीकार करते हैं कि जिस दिन वह अखबार बांटने नहीं निकलते मन में अजीब सी हलचल बनी रहती है। उनका कहना है कि जिस तरह अखबार पढऩा एक आदत बन जाता है। उसी प्रकार बांटना भी एक आदत बन जाती है।
अखबार वितरण के साथ दूसरा बिजनेस भी
वर्ष 2012 से करीब 200 घरों में अखबार पहुंचा रहे अजय कुमार का मानना है कि सुबह के समय का सदुपयोग इससे बेहतर उनके लिए संभव नहीं है। सुबह अखबार बांटने से होने वाली इनकम से बहुत कुछ तो नहीं किया जा सकता है। लेकिन सपोर्ट के लिए बेहतर है। हालांकि अखबार बेचने से हुई इनकम के दम पर ही उन्होंने दूसरा बिजनेस शुरू कर दिया है। सुबह अखबार बांटने के बाद पूरा दिन बचता है। जिसमें उन्होंने रेडिमेड कपड़े का बिजनेस शुरू कर दिया है। अजय के मुताबिक अखबार के साथ अब उन्हें रेडिमेड कपड़ों की दुकान से भी अर्निंग होने लगी है। दोनों इनकम साथ हो रही है। अजय दो बेटियों व माता-पिता के साथ छह सदस्यों का परिवार सम्मानजनक तरीके से चला रहे हैं। अखबार का वितरण वह उनके लिए लकी मानते हैं।
अखबार के दम पर शुरू हुआ दूसरा बिजनेस
पिछले 30 वर्षों से अखबार के बिजनेस में लगे लल्लू प्रसाद साहू बताते हैं कि उन्होंने कक्षा नवीं की पढ़ाई के दौरान ही इस योजना के साथ अखबार का वितरण शुरू किया कि कुछ इनकम हो जाएगी। धीरे-धीरे अखबार के जरिए लोगों तक खबर पहुंचाना एक जुनून बन गया। इमानदारी व मेहनत से काम किया। जिसका नतीजा यह रहा कि 100 कॉपी से हुई शुरुआत अब एक हजार कॉपी तक पहुंच गई है। वितरण के लिए खुद के साथ दूसरे हॉकर्स की मदद भी लेते हैं। लल्लू प्रसाद का कहना है कि अखबार के दम पर उन्होंने किराने की दुकान भी बना ली है। अखबार वितरण में सुबह के समय का सदुपयोग करते हैं और फिर दिन में अपनी दुकान भी देख लेते हैं। इतना ही नहीं ग्राहकों की संतुष्टि लल्लू की प्राथमिकता में है। यही वजह है कि वह हर रोज ग्राहकों से मिलने के लिए साइकिल लेकर निकलते हैं। रोजाना 10 किलोमीटर की साइकिलिंग करते हैं।
रामू ने संभाल ली पिता की जिम्मेदारी
करीब ५० वर्ष पहले पिता रामकुमार अग्रवाल की ओर से शुरू किए गए काम को रामू प्रसाद अग्रवाल आगे बढ़ा रहे हैं। रामू की माने तो आज भी वह उन घरों में अखबार पहुंचाते हैं, जहां पहले उनके पिता पैदल ही अखबार का वितरण करते रहे। रामू के मुताबिक अखबारों की संख्या समय-समय पर घटती व बढ़ती रही। लेकिन उन्होंने कभी अखबार वितरण करने का काम छोड़ा नहीं। पिता की विरासत को संभाला और आज ५५० लोगों को अखबार पढ़ा रहे हैं। हर रोज १५ किलोमीटर की साइकिलिंग करने वाले रामू बताते हैं कि उन्हें इस व्यवसाय से इतना लगाव हो गया है कि वह दूसरे व्यवसाय के बारे में सोचते ही नहीं। इसे ही बढ़ाने की कोशिश में लगे हुए हैं। उन्हें पूरा विश्वास है कि एक दिन वह अच्छा करेंगे। उन्हें अच्छा लगता है जब वह देखते हैं कि लोग अखबार के लिए उनका इंतजार करते हैं।
सेहत दुरुस्त होने के साथ मिल रही इनकम
पिछले १४ वर्ष से अखबार का वितरण कार्य कर रहे राजेंद्र भगत बताते हैं कि वह जब १६ वर्ष के रहे, तभी से अखबार बांट रहे हैं। हालांकि अब वह सुबह अखबार बांटने के बाद दिन में सीसीटीवी कैमरा इंस्टॉल करने का काम करते हैं। उन्हें इससे अच्छी इनकम भी हो जाती है। लेकिन इसके बावजूद राजेंद्र अखबार बांटने का काम बंद नहीं करना चाहते। उनका कहना है कि सुबह के समय का इससे बेहतर सदुपयोग कुछ हो ही नहीं सकता है। मॉर्निंग में साइकिलिंग से सेहत तो दुरुस्त होती ही है। साथ ही इनकम भी मिल जाता है। राजेंद्र ग्राहकों को अखबार पढ़ाकर भी खुद को सुकून भरा महसूस करते हैं। उनका कहना है कि बेहतर होता कि अखबार वितरण से होने वाली इनकम महंगाई के साथ बढ़ती जाती।
Published on:
19 Apr 2018 12:59 pm
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