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युद्ध हो या संघर्ष, रीवा ने हर मोर्चे पर दी है कुर्बानी, यहां जानिए रीवा जिले में अब तक हुए शहीदों के बारे में

- लद्दाख के गलवान घाटी में दीपक सिंह गहरवार की शहादत ने विंध्य की माटी का गौरव बढ़ाया

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रीवा

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Mrigendra Singh

Jun 20, 2020

rewa

Regarding the martyrs so far in Rewa district, rewa ke shaheed


रीवा। देश के लिए जब भी कुर्बानी देने की बात आई है, रीवा के रणबाकुरों ने सामना किया है। देश को विजय दिलाने में कई बार रीवा सहित विंध्य के सैनिकों की प्रमुख भूमिका रही है। अंतिम सांस तक लड़कर देश के लिए अब तक कई सपूतों ने शहादत दी है। आजादी के बाद से देश की सीमाओं में सुरक्षा के लिए शहादत देने में यह क्षेत्र आगे रहा है। कई बार दूसरे देशों से युद्ध भी हुए, जिनमें रीवा और आसपास के जिलों के सैनिकों ने आखिरी दम तक लड़ाई लड़ी।

अब भारत और चीन की सीमा में लद्दाख क्षेत्र के गलवान घाटी में तनाव की स्थिति बनी है। चीन की सेना ने घात लगाकर हमला किया, जिसके बाद वहां की सेना को भगाते हुए भारतीय वीरों ने संघर्ष किया और खदेड़ा। इसी दौरान देश की सीमा में घुसने से रोकते हुए रीवा जिले के फरेंदा गांव के दीपक सिंह गहरवार भी 20 सैनिकों के साथ शहीद हो गए। दीपक ने विंध्य के वीरों द्वारा अब तक देश सुरक्षा के लिए बनाए गए गौरव को बनाए रखा।

इस शहादत ने विंध्य के लोगों का सिर फक्र से ऊंचा कर दिया है। एक नौजवान के कम उम्र में चले जाने का गम लोगों में है, साथ ही शहादत पर गर्व है कि हमारे वीर सपूत ने देश की सुरक्षा के लिए आखिरी सांस तक संघर्ष किया।


- अब तक शहीद हुए सैनिकों पर एक नजर
रीवा जिले के वीर सपूतों ने जब भी समय आया है देश के लिए कुर्बानी दी है। जिला सैनिक कल्याण बोर्ड की ओर से इन वीर जवानों की वीर नारियों को विशेष अवसरों पर सम्मानित कराया जाता है। अब तक शहीद होने वालों में प्रमुख रूप से एलएन तिवारी, ओझा पुरवा गांव के जो इंडो-चाइना वार में 18 नवंबर 1962 को शहीद हुए थे। इसी तरह इंडो-पाक वार में खड्डा के रामचरण 20 सितंबर 1965 को शहीद हुए। पाकिस्तान के साथ ही 1971 में युद्ध करते हुए पुरवा के रामखेलावन, खैर के जयपाल सिंह शहीद हुए। 1988 के आपरेशन पवन में गाडऱपुरवा के पीके गौतम, 1989 में गाजीपुर(मऊगंज) के बंसतलाल, भगदेवा के आरएन मिश्रा, आपरेशन मेघदूत में 1989 में गहिरा के रामभुवन पटेल, 1990 में मौहरिया के वीपी चतुर्वेदी, 1992 में तोमरपुरवा के अवधेश सिंह तोमर, आपरेशन रक्षक में 1992 में लौआ के सुखेन्द्र सिंह बघेल, आपरेशन सोमालिया में 1994 में देवरी बघेलान के रामलाल पटेल, नैकिन के रामपाल गुप्ता, ऊंची के रामस"ान जायसवाल, आपरेशन करगिल विजय में 1999 में देवरा के कालू प्रसाद पाण्डेय, आपरेशन रक्षक में भेर्रहा खैरहन के चंद्रचूर्ण प्रसाद, 2001 में गुढ़वा के सुभाष त्रिपाठी, 2003 में लभौली के पुष्पराज सिंह, इसी वर्ष अमहिया के आशीष कुमार दुबे, म्यांमार बार्डर पर फरहदी के जितेन्द्र कुमार कुशवाहा, छह नंवबर 2019 को गोंदरी के अखिलेश कुमार पटेल, नौ मार्च 2020 को मझगवां के वीरेन्द्र कुमार कुशवाहा आदि शहीद हुए हैं।


- चीन के बार्डर में पांच लोग शहीद हो चुके
पूर्व सैनिक सेवा परिषद के संरक्षक लक्ष्मण प्रसाद तिवारी ने बताया कि चीन के बार्डर पर अब तक पांच लोग शहीद हुए हैं। जिसमें लालमणि सिंह, रामविश्वास सिंह, सिपाही अंझा, लक्ष्मणी निवास, दीपक सिंह आदि चीन के बार्डर पर शहीद हुए हैं। इसी तरह सतना जिले के पांच वीर शहीद हुए हैं। पूरे प्रदेश से कुल 32 लोग शहीद हुए हैं।


- सुधाकर की शहादत से देश हिल गया
विंध्य के सीधी जिले के चुरहट के नजदीक डढिय़ा गांव के सुधाकर सिंह बघेल की जनवरी 2013 में हुई शहादत ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले के मेंढर सेक्टर में रात्रि गश्त के दौरान पाकिस्तान की सेना से मुठभेड़ हुई, जिसमें दो सैनिकों ने करीब घंटे भर से अधिक समय तक संघर्ष किया और देश के लिए शहीद हो गए। उस दौरान सुधाकर के साथ के ही उत्तरप्रदेश के हेमराज नाम के जवान की शहादत हुई थी। पाकिस्तानियों ने पार्थिव शव के साथ बर्बरता करते हुए सिर भी काट दिया था। उस दौरान सुधाकर की शहादत को लेकर पूरा देश आक्रोश में था। पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर लगातार देशभर में प्रदर्शन हुए थे।


- देश के लिए ये भी हुए कुर्बान
देश के सेवा में लगे हमारे वीरों ने अन्य अवसरों पर भी शहादत दी है। इसमें सेना के साथ अर्धसैनिक बल के भी जवान शामिल हैं। नायक छोटेलाल लोध, बरहुला पनवार 1999 में, सीआरपीएफ के जवान नारायण सोनकर गंगतीरा सहित दर्जनों की संख्या में ऐसे नाम हैं, जिन्होंने देश के लिए कुर्बानी दी है।