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विंध्यप्रदेश के राज्यपाल का घर रहे राजनिवास को 1.50 करोड़ से संवारने की तैयारी, ये है प्लान

पीएस की पहल पर पीआईयू व लोक निर्माण ने शासन को भेजा प्रस्ताव, राजशाही के जमाने में अतिथियों के विश्राम के लिए बनाया गया था

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Rewa Raj Niwas latest news

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लोकमणि शुक्ला @ रीवा। विंध्य प्रदेश के राज्यपाल का बंगला रहे राजनिवास को जल्द ही संवारा जाएगा। लगभग डेढ़ करोड़ रुपए से चार नए कमरे, एक हॉल का निर्माण होगा। इसके अलावा फर्नीचर व साज-सज्जा की जाएगी। इसके लिए निर्माण एजेंसी पीआईयू व लोकनिर्माण विभाग ने डीपीआर तैयार कर लिया है। दोनों का प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। सिविल लाइन स्थित राजनिवास का निर्माण रीवा राजघराने ने करवाया था।

यह भवन राजशाही के जमाने में दूसरे राज्यों के प्रमुख अतिथियों के विश्राम के लिए बनाया गया था। आजादी के बाद विंध्य प्रदेश बनने पर यह राज्यपाल का निवास बन गया। सन् 1952 से 56 तक यहां विंध्यप्रदेश के राज्यपाल सनथामन रहे हैं। इसके बाद राजनिवास का प्रयोग अधिकारी विश्राम गृह के रूप में किया जा रहा है।

नेताओं से लेकर अधिकारियों तक की पहली पंसद

शांत एवं ग्रीन एरिया में होने की वजह से राजनिवास अभी भी यहां आने वाले नेताओं से लेकर अधिकारियों तक की पहली पंसद है। यही कारण है कि हमेशा किसी न किसी विभाग के बड़े अधिकारी यहां ठहरते है। कभी-कभी कमरे खाली नहीं होने पर सत्कार अधिकारी को आवंटित करने में परेशानी होती है। भवन के ऐतिहासिक गौरव को बनाए रखने के साथ ही नए सिरे से व्यवस्थित करने का प्रस्ताव तैयार किया है।

लंबे समय से उठ रही थी उन्नयन की मांग
राजनिवास के उन्नयन की मांग लंबे समय से की जा रही थी। लिए लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव प्रमोद अग्रवाल ने पहल की है। निरीक्षण के लिए आए प्रमुख सचिव ने इसके उन्नयन का प्रस्ताव विभाग से मांगा था। प्रमुख सचिव की पहल पर सवा करोड़ रुपए का डीपीआर पीआईयू ने शासन को भेजा था, लेकिन इसकी पैरवी जनप्रतिनिधियों ने नहीं की। परिणामस्वरुप शासन से आवंटन नहीं मिला। इसके बाद पुन: पीआईयू ने डेढ़ करोड़ का प्रस्ताव बनाकर भेजा है।

20 लाख का प्रस्ताव
लोक निर्माण विभाग व राजनिवास के प्रभारी अरुण शुक्ला ने बताया कि वर्तमान में 4 रूम राजनिवास और इतने ही रूम सामने है। सामने विश्राम गृह की छत निर्माण व हॉल के लिए 20 लाख रुपए का प्रस्ताव पीडब्ल्यूडी की ओर से भी भेजा गया है।

राजनिवास का उन्नयन करने के लिए डेढ़ करोड रुपए का प्रस्ताव भेजा गया है।इसके पहले सवा करोड़ का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन तकनीकी कारणों से स्वीकृत नहीं मिली थी।
संजीव कालरा, एसडीओ पीआईयू