
Rewa's Farmer adopt dairy business, earn good profit
रीवा। एमकॉम की पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार के लिए दर-दर भटकने से बेहतर खुद का व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया। गौपालन का व्यवसाय अपनाया तो किस्मत खुल गई। महज एक वर्ष में 120 लीटर दुग्ध का उत्पादन शुरू कर दिया। बात बरेही गांव के दीपांशु की कर रहे हैं। व्यवसाय में दीपांशु की मेहनत को रंग लाते देख उनके भाई दिव्यांशु भी साथ आ गए। अब दोनों भाई मिलकर न केवल खुद अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। बल्कि आधा दर्जन को रोजगार भी दे रखा है।
एक साथ खरीदी 10 गाय
करीब एक वर्ष पहले दीपांशु ने गौशाला के व्यवसाय का निर्णय लिया। उन्होंने एक साथ 10 गाय खरीदी और एक दुग्ध पैक करने वाली कंपनी को सप्लाई करने लगे। महज एक वर्ष में उनकी गौशाला में 10 गायों के साथ सात बछिया भी हो गई हैं। दीपांशु बताते हैं कि दो वर्ष बाद उनकी गौशाला में करीब दो गुने मवेशी होंगे। बछिया उनको बोनस के रूप में मिली हैं। दीपांशु को गौपालन के व्यवसाय का मशविरा उनके पिता एसपी मिश्रा से मिला। पिता इंदौर में कृषि विभाग में पदस्थ हैं।
हर रोज 4200 रुपए की आय
गौपालन के व्यवसाय से दीपांशु को हर रोज से करीब 120 लीटर दुग्ध का उत्पादन प्राप्त होता है। कुछ उत्पादन गांवों में ही बिक जाता है तो कुछ उत्पादन एक दुग्ध पैकिंग कंपनी को देते हैं। औसतन प्रति लीटर 35 रुपए की आमदनी होती है। इस तरह से दीपांशु हर रोज 4200 रुपए का दुग्ध उत्पादन कर रहे हैं। लागत के दो हजार रुपए निकाल दिए जाएं तो न्यूनतम दो हजार रुपए की हर रोज बचत होती है।
गोबर से बनाते हैं जैविक खाद
गौपालन से दूसरा फायदा जैविक खाद के रूप में मिल रहा है। गायों के गोबर से दीपांशु ने जैविक खाद बनाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। फिलहाल अभी वह खादों का प्रयोग खुद के खेतों में कर रहे हैं। आगे चलकर जैविक खाद के उत्पादन में बढ़ोत्तरी होती है जो वह बिक्री भी शुरू करेंगे। यह मुनाफा भी उनके गौपालन व्यवसाय से ही होगा।
Published on:
02 Jun 2018 02:46 pm
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