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छुहिया घाटी में थम जाते हैं वाहनों के पहिए, 12 किलोमीटर की दूरी, रोजना चार बार से अधिक लग रहा जाम

आंदोलन के बाद भी नहीं सुधरे हालत, दो विभागों में अटकी सड़क, 165 किलोमीटर में पैंच के लिए मिले महज ८५ लाख रुपए

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Road jam Every day in the Chhuhiya valley in Rewa

Road jam Every day in the Chhuhiya valley in Rewa

रीवा. एक साल पहले बीओटी की समय समाप्त होते रीवा अमरकंटक सड़क की दशा बिगडऩे लगी। ओवर लोड भारी वाहनों के कारण छुहिया घाटी में सड़क के गड्डे खाई बन गए है। इनमें रोजना बड़े वाहन फंसने के कारण जाम की स्थित बन जाती है। स्थित है कि १२ किलोमीटर की दूरी में रोजना चार बार तो इस सड़क पर जाम लग जाता है। इस दौरान कभी आधा घंटे तो कभी तीन- तीन घंटे छुहिया घाटी वाहन फंसे रहते है। इससे रीवा सीधी एवं रीवा शहडोल मार्ग के यात्रियों की मुश्किल बढ़ गई है। इससे वाकिफ होने के बावजूद विभाग ने मरम्मत से हाथ खड़े कर दिए है। आंदोलन के बाद भी सड़क की स्थिति नहीं सुधरी है।

बीओटी योजना में बनाई गई थी सड़क
रीवा से अमरकंटक 165 किलोमीटर सड़क बीओटी योजना में बनाई गई थी। इसकी अवधि दिसम्बर 2017 में समाप्त हो गईथी। इसके बाद यह सड़क एमआरडीसी को सौंप दी गई। लेकिन इसके बाद विभाग ने सड़क का मरम्मत काम नहीं कराया है। वही बालू एवं सीमेंट फैक्ट्रियों के ओवर लोड वाहन गुजरने से सड़क के परखच्चे उड़ गए है। सबसे अधिक सड़क घाटी में खराब हो गई। यहां खराब सड़क में आए दिन भारी वाहन फंस जाते है । इससे जाम की स्थिति बन जाती है। रविवार को भी सुबह ९ बसे दोपहर १२ बजे वाहनों के पहिए छुहिया घाटी में थमे रहे। इसे लेकर स्थानीय लोगों ने ग्रामीणों को आंदोलन किया था। लेकिन इसके बाद भी सड़क में सुधार काम प्रांरभ नहीं हुआ है।

दो विभागों में अटकी सड़क
बताया जा रहा है रीवा अमकंटक की बीओटी समाप्त होने के बाद इसे राज्य मार्ग से राष्ट्रीय राज्यमार्ग में उन्नयन किया जाना है। इसके प्रस्ताव एवं डीपीआर बनाकर भेज दिया गया है। लेकिन अभी तक इसकी सैद्धानंतिक स्वीकृत नहीं आई है। वहीं एमपीआरडीसी से इस सड़का एनएचएआई को सौंप दिया गया है। लेकिन विभाग के अधिकारी इस सड़क के मंटीनेंस को लेकर अनभिज्ञ है।

165 किलोमीटर 85 लाख के पैंच
विभागीय सूत्र बताते है कि 165 किलोमीटर सड़क के लिए 85 लाख रुपए मेंटीनेंस के लिए प्राप्त हुए है।इनमें लंबे समय के बाद निविदा एजेंसी मिली। लेकिन सड़क की बेहद खराब होने के कारण इतनी लागत में सड़क सुधार संभव नहीं होने के काम करने के इंकार कर दिया।