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RTI Act : आयोग पर सवाल उठाने वाली लोक सूचना अधिकारी पर जुर्माने के साथ विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा

- रीवा जनपद की तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी ने सुनवाई के दौरान अपने जवाब में आयोग पर उठाए थे सवाल

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रीवा

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Mrigendra Singh

Feb 08, 2024

- रीवा जनपद की तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी ने सुनवाई के दौरान अपने जवाब में आयोग पर उठाए थे सवाल

- रीवा जनपद की तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी ने सुनवाई के दौरान अपने जवाब में आयोग पर उठाए थे सवाल


रीवा। राज्य सूचना आयोग ने समय पर जानकारी नहीं देने के मामले में एक बार फिर लोक सूचना अधिकारी पर कार्रवाई की है। रीवा जनपद की तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी सुरभि दुबे से जुड़े मामले में सुनवाई के बाद आयोग ने 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। सुरभि ने अपने जवाब में राज्य सूचना आयुक्त पर ही कई सवाल उठाए थे। इस जवाब पर आयोग ने कहा है कि यह सिविल सेवा नियमों का उल्लंघन और कदाचरण की श्रेणी में आता है। आयोग ने सामान्य प्रशासन विभाग को पत्र लिखकर कहा है कि विभागीय सेवा शर्तों और प्रशासनिक नियमों के अनुसार संबंधित पर कार्रवाई की जाए।

वर्ष 2020 में रमाकांत त्रिपाठी निवासी बोदाबाग रीवा ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांगी थी लेकिन वह नहीं दी गई। दो बिन्दुओं पर जानकारी आवेदक ने चाही थी जिसमें तत्कालीन जनपद सीईओ के वाहन की गति माप पुस्तिका और टूर डायरी की सत्यापित कापी और संबंधित भ्रमण के दौरान की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी थी।

जब समय पर जानकारी नहीं मिली तो प्रथम अपील के बाद मामला सूचना आयोग के पास पहुंचा। जहां पर राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने दोनों पक्षों को सुना और लोक सूचना अधिकारी से जवाब मांगा था। जिस पर लोक सूचना अधिकारी सुरभि दुबे ने कई ऐसे जवाब दिए जिन्हें सिविल सेवा नियमों के विपरीत और आपत्ति जनक माना गया। साथ ही 25 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है और कहा गया है कि इसे सेवा पुस्तिका में भी अंकित किया जाए।


- जवाब के इन बिन्दुओं पर आयोग ने जताई आपत्ति
राज्य सूचना आयुक्त ने तत्कालीन पीआईओ सुरभि दुबे के जवाब कई बिन्दुओं पर आपत्ति दर्ज कराई है और कदाचरण बताया है। जिसमें प्रमुख रूप से उन्होंने लिखा था कि 'आयुक्त महोदय की रुचि जानकारी से ज्यादा सुरभि दुबे जिनके पास जानकारी नहीं है और न ही वह लोक सूचना अधिकारी हैं कि व्यक्तिगत उपस्थिति में है।Ó साथ ही कहा था कि आयुक्त प्रकरण की दिशा भटकाने के उद्देश्य से पद की गरिमा के विपरीत प्रक्रिया अपना रहे हैं। इसके अलावा सूचना आयुक्त पर कल्पित आरोप लगाने का उल्लेख भी किया था। जवाब में यह भी सुरभि ने कहा था कि जनपद सीईओ से जुड़ी जानकारी चाही गई थी जो कार्यालय प्रमुख हैं इस कारण उनसे जुड़ी जानकारी नहीं दी गई। उस दौरान जानकारी उपलब्ध भी नहीं थी। अब आयोग ने शासन को दिए गए निर्देश में उन सभी बिन्दुओं का उल्लेख करते हुए कहा है कि यह सरकारी सेवा में कार्यरत अधिकारी के कदाचरण के दायरे में आता है।
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रीवा जनपद के मामले में तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी का जवाब आपत्तिजनक पाया गया है। उनसे समय पर जानकारी उपलब्ध नहीं कराने का कारण पूछा गया था लेकिन उन्होंने आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। यह सिविल सेवा नियमों के विपरीत है, इस कारण उन पर विभागीय स्तर पर कार्रवाई के लिए भी लिखा गया है। ऐसे अधिकारी आम जनता से कैसा बर्ताव करते होंगे यह भी समझा जा सकता है।
राहुल सिंह, राज्य सूचना आयुक्त