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मुर्राह भैंस से ज्यादा दूध देती है यह गाय

20 लीटर दूध के साथ पहले स्थान पर, पशु स्वास्थ्य चिकित्सा विभाग ने किया पुरस्कृत

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रीवा

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Vedmani Dwivedi

Jan 22, 2019

Sahiwal cow gives milk 20 liters per day

Sahiwal cow gives milk 20 liters per day

रीवा. सिरमौर निवासी विनोद कुमार कुशवाहा की साहिवाल गाय लोगों की पहली पसंद बनी हुई है। दरअसल यह गाय जिले में सबसे ज्यादा दूध उत्पादन करने वाली गाय है। इस गाय की तुलना में मुर्रा नस्ल की भैस भी पीछे हो गई हैं।

विनोद की साहिवाल गाय औसत रूप से प्रतिदिन 20.170 लीटर दूध देती है। जो कि मुर्राह नस्ल की भैस के दूध उत्पादन की अपेक्षा ज्यादा है। पशु एवं चिकित्सा विभाग द्वारा पशु पालकों के बीच कराए गए दूध उत्पादन की प्रतियोगिता में यह बात सामने आई है।

विनोद को इसके लिए पशु चिकित्सा विभाग की ओर से 50 हजार रुपए इनाम देकर पुरस्कृत किया गया है।

इन गौपालकों को किया गया पुरस्कृत
- सिरमौर निवासी विनोद कुमार कुशवाहा के पास साहिवाल नस्ल की गाय है। जो औसत रूप से 20.170 लीटर दूध देती है। इन्हें गोपालक पुरस्कार में प्रथम स्थान मिला है। 50 हजार रुपए देकर पुरस्कृत किया गया।

- सिलपरी निवासी सुदर्शन यादव के पास गिर नस्ल की गाय है। जो औसत रूप से 16.290 लीटर दूध देती है। इन्हें द्वितीय स्थान मिला। 25 हजार रुपए से पुरस्कृत किया गया।

- सिलपरी निवासी सूरज कुशवाहा के पास गिर नस्ल की गाय है। जो औसत रूप से 9.960 लीटर दूध देती है। इन्हें तृतीय स्थान मिला। 15 हजार रुपए से पुरस्कृत किया गया।

सबसे ज्यादा दूध देती है पंकज की भैंस
उमरी निवासी पंकज त्रिपाठी के पास मुर्राह नस्ल की भैंस है। जो औसत रूप से 23.960 लीटर दूध देती है। जिले की सबसे ज्यादा दूध देने वाली भैंस है। इन्हें प्रथम पुरस्कार के रूप में 50 हजार रुपए दिया गया। हर्षबर्धन त्रिपाठी की मुर्राह नस्ल की भैस 16.406 लीटर दूध के साथ जिले में सबसे ज्यादा दूध देने के मामले में दूसरे नंबर पर है। इन्हें 25 हजार रुपए से पुरस्कृत किया गया। उमरी निवासी मोतीलाल त्रिपाठी की मुर्राह भैंस इस मामले में तीसरे नंबर पर है। वह औसतन 16.406 लीटर दूध दे रही है। इन्हें 15 हजार रुपए से पुरस्कृत किया गया।

उपसंचालक कार्यालय में किया गया पुरस्कृत
उपसंचालक कार्यालय मेंं एक कार्यक्रम आयोजित कर पशुपालाकों को पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला पंचायत कृषि समिति के अध्यक्ष लल्लू लाल कुशवाहा रहे। इसके साथ ही डीन एग्रीकल्चर डॉ. एसके पाण्डेय, डीन पशु चिकित्सा महाविद्यालय डॉ. एसएस भदौरिया, उप संचालक पशु चिकित्सा केके सिंह चौहान, पशु चिकित्सक एवं किसान मौजूद रहे।

हर वर्ष होती है प्रतियोगिता
दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित करने अधिक दुग्ध उत्पादन देने वाली भारतीय नस्ल के गाय एवं भैंस के पशुपालकों के बीच हर वर्ष यह प्रतियोगिता होती है। प्रतियोगिता में प्रतिदिन चार लीटर दूध देने वाली गाय एवं छह लीटर दूध देने वाली भैंस को शामिल किया जाता है। सबसे ज्यादा दूध देने वाली तीन गाय एवं तीन भैंसों को पुरस्कृत किया जाता है। सात अन्य को सांत्वनां पुरस्कार दिया जाता है। इस वर्ष जिला स्तर पर चार गाय एवं चार भैंस को पुरस्कृत किया गया। सांत्वना पुरस्कार के लिए और प्रतिभागी नहीं थे। जिसकी वजह से छह सांत्वना पुरस्कार नहीं दिए गए।