
रीवा
रीवा. शहर की पानी सप्लाई व्यवस्था को हाईटेक बनाने के लिए नए संसाधन बढ़ाए जा रहे हैं। अमृत योजना के तहत नगर निगम को मिले 30 करोड़ रुपए से पाइप लाइन डालने के साथ ही पानी की टंकियां भी बनाई गई हैं। सबसे बड़ी समस्या शहर में पेयजल की पाइप लाइन के लीकेज की है। इसके लिए नया सिस्टम डेवलप किया जा रहा है, जिससे वाटर फिल्टर प्लांट से टंकी तक जाने वाले पानी के फ्लो का हिसाब रहेगा। टंकी तक यदि कम पानी पहुंचता है तो इसकी जानकारी बनाए गए कंट्रोल रूम में पता चल जाएगी।
टंकियों का रुकेगा ओवरफ्लो
अब तक अक्सर ऐसा होता है कि टंकियां फुल भर जाती हैं इसके बाद भी प्लांट से पानी की सप्लाई जारी रहती है। इसी वजह से टंकियों के आसपास ओवरफ्लो होकर पानी बहता है। इसकी निगरानी के लिए सुपरवायजरी कंट्रोल एंड डाटा एक्यूजिशन(स्काडा) का सेट लगाया जा रहा है। कुठुलिया के फिल्टर प्लांट में इसका सेंसर लगाए जाने का कार्य इनदिनों चल रहा है। प्लांट में ही एक कंट्रोलरूम बनाया जाएगा जहां से टंकियों को जाने वाले पानी पर निगरानी रहेगी। टंकी में कितना पानी भरा है और कितनी खाली रह गई है, इसकी जानकारी स्काडा के कंट्रोल रूम में रहेगी। इस कारण समय पर टंकियों को जाने वाले पानी को रोक दिया जाएगा ताकि वह ओवरफ्लो होकर सड़क और नाली में नहीं बहे।
तीनों प्लांटों में लगेंगे सेंसर
अमृत योजना के तहत सीएमआर कंपनी को शहर की पेयजल व्यवस्था सौंपी गई है। कंपनी कुठुलिया, रानीतालाब और अजगरहा के फिल्टर प्लांट में स्काडा का सेंसर लगाएगी। अभी कुठुलिया से इसकी शुरुआत की गई है। कंपनी ने दावा किया है कि मार्च के पहले तीनों प्लांटों में यह सिस्टम लगा दिया जाएगा।
लीकेज स्पाट नहीं बताएगा कंट्रोलरूम
मेनराइजिंग पाइप लाइन से होने वाले लीकेज की जानकारी स्काडा के कंट्रोल रूम में पता चल जाएगी। यह भी जानकारी मिल जाएगी कि कितनी मात्रा में पानी का लीकेज हो रहा है लेकिन अभी ऐसा कोई सिस्टम नहीं है जिससे स्पाट की सटीक जानकारी हो सके। इसके लिए प्लांट और टंकी के बीच की पाइप लाइन का निरीक्षण करना पड़ेगा। बताया जा रहा है कि अभी लीकेज के कई दिनों बाद तक निगम के अधिकारियों को जानकारी नहीं मिल पाती है। शिकायतों के बाद पता चलता है।
ठीक से हो सकेगी निगरानी
नगर निगम के पेयजल प्रभारी रामजी त्रिपाठी ने बताया कि फिल्टर प्लांट से टंकियों तक जाने वाले पानी की निगरानी के लिए स्काडा सिस्टम लगाया जा रहा है। टंकियों में कितना पानी पहुंच रहा है इसकी जानकारी रहेगी। इस व्यवस्था से पानी को व्यर्थ में बहने से रोका जा सकेगा।
Published on:
16 Jan 2018 12:42 pm
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