10 मई 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

रीवा में छात्रवृत्ति घोटाले की ईओडब्ल्यू ने फिर खोली फाइल, कई और संदेह के दायरे में

-एक साल से बंद पड़ी थी जांच, कई कालेजों में डाले गए थे छापे-ईओडब्ल्यू एसपी ने कहा नए सिरे से अध्ययन कर जांच तेज करेंगे

3 min read
Google source verification

रीवा

image

Mrigendra Singh

Jun 29, 2020

rewa

scholarship scam rewa, corruption in rewa, eow rewa,scholarship scam rewa, corruption in rewa, eow rewa,scholarship scam rewa, corruption in rewa, eow rewa


रीवा। छात्रवृत्ति के नाम पर करोड़ों रुपए की हुई आर्थिक अनियमितता के मामले में लंबे अंतराल के बाद ईओडब्ल्यू ने जांच फिर से शुरू कर दी है। करीब एक वर्ष से अधिक समय से इस मामले की फाइल पर कोई विवेचना आगे नहीं बढ़ी है। जिसके चलते आरोपी पक्ष पर शिकंजा नहीं कसा जा सका है और आवश्यक दस्तावेज भी जब्त नहीं हो सके हैं।

ईओडब्ल्यू में नए पुलिस अधीक्षक ने पुराने मामलों की फाइल खंगालना शुरू किया है। जिसमें छात्रवृत्ति घोटाले को प्राथमिकता में लेते हुए विवेचना से जुड़े अधिकारियों से कहा है कि सभी औपचारिक पूर्ति कर इसमें चालान पेश करने की तैयारी की जाए। दो वर्ष पहले ईओडब्ल्यू ने इस पर एफआइआर दर्ज किया था, बाद में कुछ और संदिग्ध नामों की सूची तैयार की थी। पहले 13 फिर नौ और लोगों को आरोपी बनाया जा चुका है। एफआइआर के बाद ईओडब्ल्यू ने शहर के प्रमुख कालेजों में दबिश देकर कुछ दस्तावेज जब्त किए थे लेकिन अब भी बड़ी मात्रा में दस्तावेजों को जब्त किया जाना है।

-
आठ वर्ष पहले हुआ था घपला
पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति भुगतान के नाम पर किए गए घोटाले पर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (इओडब्ल्यू) ने करीब दो दर्जन लोगों को नामजद किया है। इसमें सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों के प्राचार्य एवं छात्रवृत्ति वितरण से जुड़े अधिकारी, कर्मचारी शामिल हैं। कई प्राइवेट कालेजों के संचालकों को भी आरोपी बनाया गया है। यह मामला वर्ष 2012-13 का है, जिसमें करोड़ों रुपए की आर्थिक अनियमितता पकड़ी गई थी। ईओडब्ल्यू की अब तक की जांच में पाया गया कि पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक वर्ग, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के छात्रों को दी गई छात्रवृत्ति में कूटरचित दस्तावेज का उपयोग कर नोडल अधिकारियों और कॉलेजों के जवाबदेह अधिकारियों की मिलीभगत से राशि आहरित की गई थी।

- इन पर दर्ज है प्रकरण
छात्रवृत्ति घोटाले में जिन पर एफआईआर दर्ज की गई है, उसमें प्रमुख रूप से अखंड प्रताप मिश्रा तत्कालीन प्राचार्य टीआरएस कॉलेज, डॉ. दीपक कुलश्रेष्ठ संचालक एसएस सांईनाथ पैरामेडिकल कॉलेज, डॉ. एमएल कुशवाहा तत्कालीन प्राचार्य शासकीय आयुर्वेद कॉलेज, डॉ. विनोद पाण्डेय प्राचार्य एसएस पाण्डेय पैरामेडिकल संस्थान, कमलेश्वर प्रसाद पाण्डेय संचालक एसएस पाण्डेय पैरामेडिकल संस्थान, ब्रह्मनंद त्रिपाठी, डॉ. एसएस कुशवाहा तत्कालीन डीन एसएस मेडिकल कॉलेज रीवा, डॉ. चंदा रजक प्रभारी अधिकारी छात्र शाखा शासकीय एसएस मेडिकल कॉलेज रीवा, सीएल सोनी सहायक संचालक पिछड़ावर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, टीपी अहिरवार कनिष्ठ लेखाधिकारी कार्यालय सहायक पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग रीवा, एसडी सिंह, तत्कालीन जिला संयोजक आदिम जाति कल्याण विभाग, कनिष्ठ लेखाधिकारी, प्रभाशंकर कोल तत्कालीन लिपिक टीआरएस कॉलेज एवं अन्य कार्यालय आजाक रीवा पर एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। इन आरोपियों के विरुद्ध भादवि की धारा 420, 409, 120 बी एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13(1)डी एवं 13(2) के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है।

- कालेजों से और दस्तावेज किए जाएंगे जब्त
एफआईआर के बाद ईओडब्ल्यू ने टीआरएस कालेज, एसएस मेडिकल कालेज, आयुर्वेद कालेज, पीपीटीसी सहित कई अन्य स्थानों पर दबिश देकर दस्तावेज जब्त किए थे। उस दौरान संबंधित कालेजों की ओर से अलग-अलग बहाने बनाकर सभी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए थे और कहा गया था कि बाद में उपलब्ध कराएंगे। धीरे-धीरे ईओडब्ल्यू अधिकारियों ने भी जांच की रफ्तार धीमी कर दी और मामला ठंडे बस्ते में चला गया। इसी बीच एसपी सहित अन्य अधिकाारियों के तबादले भी हो गए जिसके चलते जांच में विलंब होता रहा है। अब ईओडब्ल्यू एसपी ने इस मामले में विवेचकों को निर्देशित किया है कि जो भी आवश्यक कार्रवाई हो उसे पूरा करें, जहां आवश्यकता हो छापामार कार्रवाई भी करें।

- लॉकडाउन के चलते गतिविधियां शून्य थी
कोरोना संक्रमण की वजह से 22 मार्च 2020 से लॉकडाउन रीवा में प्रभावी हो गया था। करीब ढाई महीने के बाद इसमें ढील दी गई है। अब स्थितियां सामान्य होने लगी हैं तो ईओडब्ल्यू ने भी पुराने मामलों की जांच में तेजी लाने के संकेत दिए हैं। लॉकडाउन के कारण आरोपी व शिकायकर्ता पक्ष को आफिस नहीं बुलाया गया।

--
---------
लॉकडाउन के चलते अपराधों की विवेचना का कार्य भी प्रभावित हुआ है। सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने के लिए कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की गई है। प्रकरणों की समीक्षाएं चल रही हैं। छात्रवृत्ति में अनियमितता का मामला भी हमारी प्राथमिकता में है। जल्द ही इसकी जांच में तेजी आएगी।
वीरेन्द्र जैन, एसपी ईओडब्ल्यू रीवा