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देवी को चढ़ाई गई 101 मीटर लंबी चुनरी, जानिए क्या मांगी दुआ

शारदीय नवरात्र में पंचमी तिथि 13 एवं 14 अक्टूबर को व्याप्त रहेगी।

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रीवा

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Vedmani Dwivedi

Oct 13, 2018

shardiya navaratri 2018 101 meter chunari yatra

shardiya navaratri 2018 101 meter chunari yatra

रीवा. नवरात्रि को लेकर भक्त माता की कई प्रकार से पूजा कर रहे हैं। कोई उपवास रख रहा है तो कोई सुबह - शाम पूजन कर रहा है। कुछ लोग देवी मंदिरों में जाने के लिए पैदल यात्रा कर रहे हैं।

इसी प्रकार शुक्रवार को शहर में सांई मंदिर से लेकर रानीतालाब तक 101 मीटर लम्बी लाल चुनरी यात्रा निकाली गई। चुनरी रानीतालाब कालिका माई को चढ़ाई गई।

महिलाएं अम्बे मॉ के जयकारे लगाते हुये न्यायालय, शिल्पी प्लाजा, प्रकाश चौराहा, फोर्ट रोड होते हुए रानीतालाब पहुंची। महिलाओं ने देश में शांति एवं सर्वधर्म, सर्वजातीय में प्रेम बना रहे इसी कामना के साथ माता का पूजन अर्चन किया। समग्र समाज का कल्याण हो इसी भावना के साथ माता रानी को चुनरी चढ़ाई गई। देवी मंदिर में भगत गीत गाये गए।

चुनरी यात्रा में मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस की कार्यवाहक अध्यक्ष कविता पाण्डेय, रमा दुबे, अनीता उपाध्याय, वन्दना श्रीवास्तव, ममता तिवारी, अनामिका दुबे, उॢमला दुबे, दुर्गेश जायसवाल, सोनू साकेत, सुनीता साकेत, रमा पाण्डेय, आशा पाण्डेय, तारा त्रिपाठी, माला सिंह, संगीता मिश्रा, तनूजा मिश्रा सहित कई महिलाएं शामिल हुईं।

अधिष्ठात्री देवी कुष्मांडा का हुआ पूजन
शुक्रवार को चतुर्थी की अधिष्ठात्री देवी कुष्मांडा का पूजन - अर्जन हुआ। आदिशक्ति का श्रद्धालुओं ने विधि - विधान से पूजन - अर्जन किया। नवरात्रि के चौथे दिन देवी मंदिरों में भक्तों का ताता लगा रहा। भक्त दूर-दूर से चलकर देवी मंदिर में पूजन - अर्चन के लिए पहुंच रहे हैं। कई प्रकार से माता की पूजा की जा रही है। चतुर्थी तिथि समाप्त होने के बाद पंचमी तिथि को पूजा का विशेष महत्व है। पंचमी तिथि पर कन्या भोज भी कराया जाता है। माता के भक्त कन्या पूजन एवं भोज कराते हैं।

आज देवी स्कंदमाता की होगी पूजा
इस वर्ष शारदीय नवरात्रों में पंचमी तिथि 13 एवं 14 अक्टूबर को व्याप्त रहेगी। आज पंचमी तिथि की अधिष्ठात्री देवी स्कंद माता का पूजन किया जाएगा। मान्यता है कि इनकी कृपा से मूढ़ भी ज्ञानी हो जाता है। स्कंद कुमार कार्तिकेय की माता के कारण इन्हें स्कंदमाता नाम से अभिहित किया गया है। इनके विग्रह में भगवान स्कंद बालरूप में इनकी गोद में विराजित हैं। इस देवी की चार भुजाएं हैं।

यह दायीं तरफ की ऊपर वाली भुजा से स्कंद को गोद में पकड़े हुए हैं। नीचे वाली भुजा में कमल का पुष्प है। बायीं तरफ ऊपर वाली भुजा में वरदमुद्रा में हैं और नीचे वाली भुजा में कमल पुष्प है। शास्त्रों में इसका पुष्कल महत्व बताया गया है। इनकी उपासना से भक्त की सारी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं।

भक्त को मोक्ष मिलता है। सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी होने के कारण इनका उपासक अलौकिक तेज और कांतिमय हो जाता है। यह देवी विद्वानों और सेवकों को पैदा करने वाली शक्ति है। यानी चेतना का निर्माण करने वाली।

कहते हैं कालिदास द्वारा रचित रघुवंशम महाकाव्य और मेघदूत रचनाएं स्कंदमाता की कृपा से ही संभव हुईं। पंचमी तिथि में मां सरस्वती की विशिष्ट पूजा करने का विधान भी देवी पुराण में बताया गया है।