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सीता ने पहनाई राम को वरमाला, जयकारों से गूंजा खजुहा धाम, जानिए कैसे अदा हुई रस्में

गाजे-बाजे के साथ पहुंची राम बारात, रथों में सवार रहे राजा दशरथ, गुरु वशिष्ठ और विश्वामित्र व भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न

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रीवा

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Dilip Patel

Feb 21, 2018

sita wearing vermala to ram, gambling cheers khajuha dham

sita wearing vermala to ram, gambling cheers khajuha dham

रीवा। मिथिलाबिहारी कुंज खजुहा में मंगलवार को बड़े ही धूमधाम से सीता-राम विवाह उत्सव संपन्न हुआ। देशभर से आए संतों के सानिध्य में वैदिक रीति रिवाज में सीता ने राम को वरमाला डाली जिसके साथ ही खजुहा धाम सीता-राम के जयकारों से गूंज उठा।

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मंगलवार रात 7 बजे गाजे-बाजे के साथ रथ में सवार देवगणों के बीच भगवान राम की बारात निकली। भगवान शिव के मंदिर से बारात मिथिलाबिहारी कुंज पहुंची। तत्पपश्चात वैदिक रीति रिवाज से द्वारचार, भामरी पैपखरी एवं कोहरवार लीला के साथ रात 12 बजे विवाह संपन्न हुआ। संत अवधकिशोर दास महराज और जगदगुरु रामानन्दाचार्य स्वामी वल्लभाचार्य महाराज मैथिल पीठाधीश्वर अयोध्याधाम के सानिध्य में विवाह उत्सव हुआ।

खजुहा धाम में राम बारात में गाजे-बाजे, हाथी, घोड़े शामिल रहे। रथों पर राजा दशरथ, गुरु ? वशिष्ठ व विश्वामित्र, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न सवार रहे। विभिन्न प्रकार की झांकियों ने मन मोह लिया। सीताराम विवाहोत्सव का आनंद लेने मुंबई दिल्ली इलाहाबाद, भोपाल, कटनी, सिंगरौली, टीकमगढ, छतरपुर सहित विभिन्न स्थानों से गुरु भाई एवं साधू महात्मा पहुंचे। हजारों लोग सीता-राम विवाह के साक्षी बने।

इनकी रही विशेष मौजूदगी
आयोजन में मुख्य रूप से तुलसीदास महाराज महंत शाहनगर, उधौदास महाराज महंत, रामहर्षण कुंज, पीटीएस चौराहा रीवा, रामजियावनदास, लक्ष्मणदास महाराज अयोध्या, डॉ. अभिलाष त्रिपाठी, डॉ. चक्रपाणि, हरिगोविंददास दुबे, रामहित द्विवेदी, डॉ. मिथिलाबिहारी दास महाराज, परमानन्द त्रिपाठी, राघवेन्द्र त्रिपाठी, रमाकांत शुक्ला कनौजा, रमेश शुक्ल निपनिया, शिवभाई बाम्बे कटनी से तिवारी, डॉ. अंजनी त्रिपाठी, धर्में द्र तिवारी सहित हजारों लोग मौजूद रहे।

इन्होंने की थी शुरुआत
खजुहा धाम स्वामी रामहर्षण दास महाराज की तपोस्थली है। उन्होंने यहां रहकर तपस्या की। करीब 12 करोड़ राम मंत्रों का जाप अपने जीवन में किया। उन्होंने ही सीता राम विवाह आरंभ किया था। फाल्गुन माह की शुक्ल पंचमी को यह विवाह संपन्न होता है। हर साल यह उत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, पन्ना सहित पूरे प्रदेश से और अन्य प्रदेशों से संत, महात्मा और स्वामी राम हर्षण दास महाराज के शिष्य भक्त इस दिन उपस्थित होते हैं।