
special Mango for Diabetes patients
रीवा. गोविंदगढ़ के बाग में होने वाला सुंदरजा आम सुगंध व स्वाद के लिए विश्व में अपनी पहचान बना चुका है। इसके अलावा सुंदरजा आम की ख्याति इसलिए भी है कि इसका उपयोग शुगर के मरीज भी कर सकते हैं। मिठास होने के साथ ही इसमें शुगर की मात्रा कम होती है। साथ ही खाते समय इसमें रेसे नहीं होते। यह केवल मप्र के रीवा जिले के गोविंदगढ़ में ही पाया जाता है। इसके पौधों जो अन्य जिले में गए हैं वह इस तरह की मिठास नहीं देता। इसलिए गोविंदगढ़ बाग का सुंदरजा आम और भी खास हो जाता है।
गोविंदगढ़ के सुंदरजा में हल्की सफेदी होती है
सुगंध और स्वाद के दम पर सुंदरजा आम की पहचान गोविंदगढ़ के किला परिसर में स्थित बागान से बनी। किस्म के प्रसार के उद्देश्य से कुठुलिया के बाग में भी सुंदरजा के कलम लगाए गए। कुछ पौधे तैयार तो हुए लेकिन उनमें वह सुगंध व स्वाद नहीं, जो गोविंदगढ़ बाग के पेड़ों के फल में होते हैं। देखने मात्र से दोनों जगह के आम की पहचान हो जाती है। गोविंदगढ़ के बाग का सुंदरजा हल्की सफेदी लिए होता है, जबकि कुठुलिया बाग के सुंदरजा आम में हरापन ज्यादा होता है।
गोविंदगढ़ की मिट्टी का कमाल
हालांकि देश-विदेश में मशहूर हो चुके सुंदरजा की उपज दिन ब दिन कम होती जा रही है। वजह लगातार पेड़ों की घटती संख्या और नए पेड़ों का तैयार नहीं हो पाना है। पूर्व पेड़ों की तुलना में अब के पेड़ों में लगने वाले आम के फलों की सुगंध व स्वाद में अंतर आना भी अधिकारियों की समझ से परे साबित हो रहा है। वैज्ञानिक इसे गोविंदगढ़ की मिट्टी का कमाल मान रहे हैं।
गोविंदगढ़ की मिट्टी में है कुछ खास
कलम के जरिए अब तक कई पौधों का रोपण करा चुके उद्यानिकी विभाग के अधिकारी व कृषि वैज्ञानिक भी इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि उनकी ओर से कलम व बीज के जरिए तैयार किए गए सुंदरजा किस्म के आमों में वह गुणवत्ता नहीं मिल रहा है, जो गोविंदगढ़ के बाग के आमों में है। अधिकारी व वैज्ञानिक दोनों इसे गोविंदगढ़ की मिट्टी का कमाल मान रहे हैं, क्योंकि दूसरे क्षेत्रों में तैयार पौधों के फलों में न ही वह सुंगध व स्वाद है और न ही वह साइज है।
लगातार जारी है प्रयोग और प्रयास
सुंदरजा किस्म के प्रसार को लेकर उद्यानिकी विभाग की ओर से प्रयास लगातार जारी है। विभाग की ओर से सुंदरजा के कलम और बीज के जरिए पौधे तैयार करने के लिए विशेष रूप से कोशिश की जा रही है। गोविंदगढ़ व कुठुलिया के अलावा जिले के दूसरे क्षेत्रों में सुंदरजा के पौधे रोपे जा रहे हैं लेकिन उन्हें तैयार कर पाना चुनौतीभरा साबित हो रहा है।वजह जो भी हो, हकीकत यही है कि प्रतिवर्ष सैकड़ों पौधों का रोपण किया जाता है लेकिन तैयार होने वाले पौधे गिनती हैं।
पहले थी महाराजाओं की पसंद, अब विदेशों तक पहुंच
गोविंदगढ़ के किला परिसर में तैयार आम का बाग व सुंदरजा के पौधे राजघराने की देन है। सुंदरजा किस्म का आम महाराजाओं की खास पसंद में शामिल रहा है। अब इसकी मांग विदेशों तक में है। सुंदरजा के थोक विक्रेता संतोष कुमार गुप्ता की माने तो आम की सप्लाई फ्रांस जैसे कई दूसरे देशों तक होती है। इसके अलावा दिल्ली, छत्तीसगढ़ व गुजरात के कई व्यापारी एडवांक बुकिंग करा लेते हैं।
400 रुपए किलो तक बिका सुंदरजा
विक्रेता के मुताबिक, इस बार सुंदरजा का उत्पादन गोविंदगढ़ बाग से २५० क्विंटल हुआ है, जो गत वर्षों की तुलना में कम है। रही बात बिक्री की तो अंत में यह आम ४०० रुपए प्रति किलोग्राम की दर से बिका है। हालांकि सुंदरजा के अलावा गोविंदगढ़ के फजली, आम्रपाल, राजदरबार, कोहिनूर व मल्लिका जैसे दूसरे किस्म के आमों की जबरदस्त मांग है।
Published on:
22 Jul 2018 08:19 pm
बड़ी खबरें
View Allरीवा
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
