
The Chief Minister said Only the creation of an excellent India by integrum humanism
रीवा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पूर्व की सरकारों की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, आजादी के बाद पश्चिमी सभ्यता के अंधानुकरण की वजह से कई जटिलताएं पैदा हुईं। भारत को जिन ऊंचाईयों पर जाना चाहिए था, वह पाने में पीछे रह गया। उत्कृष्ट भारत के निर्माण के लिए एकात्म मानववाद ही श्रेष्ठ विचार है।
अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में आयोजित स्व. कुशाभाऊ ठाकरे स्मृति भाषणमाला में बोलते हुए मुख्यमंत्री चौहान ने कहा, देश के विकास की दिशा क्या हो जब यह तय करना था तो तत्कालीन सत्ताधीशों ने आमतौर पर पश्चिमी देशों का अंधानुकरण किया। कृषि नीति हो, उद्योग नीति हो या शिक्षा नीति, पश्चिम में जो कुछ चलता है, उसी की कॉपी करने की कोशिश की गई। पंडित दीनदयाल ने उसी समय कहा, जिन पश्चिम देशों का अंधानुकरण किया जा रहा है। क्या उससे पश्चिमी देश सुखी हो पाए हैं।
विवि में छात्र दीनदयाल और ठाकरे को पढ़ेंगे
‘एकात्म मानववाद: उत्कृष्ट भारत’ विषय पर आयोजित इस भाषणमाला के दौरान ठाकरे और दीनदयाल के नाम से शोध केंद्र की स्थापना को भी मंजूरी मुख्यमंत्री द्वारा दी गई। दरअसल विश्वविद्यालय कुलपति प्रो केएन सिंह यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे भारतीय शोध केंद्र व पं. दीनदयाल उपाध्याय सुशासन एवं लोक नीति केंद्र की स्थापना का प्रस्ताव रखा था। जिसे स्वीकार करते हुए मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय में पर्यटन कौशल विकास केंद्र की स्थापना के लिए सरकार द्वारा आर्थिक मदद दिलाने का भरोसा दिलाया। साथ ही कहा कि उनकी कोशिश होगी कि विश्वविद्यालय को शासन से प्रतिवर्ष मिलने वाले २.५ करोड़ रुपए के आर्थिक सहयोग राशि में बढ़ोत्तरी हो सके।
आनंद विभाग का शुभारंभ
इस दौरान विश्वविद्यालय में आनंद विभाग का औपचारिक उदघाटन भी हुआ। कुछ माह पूर्व विश्वविद्यालय की शिक्षा परिषद ने आनंद विभाग की स्थापना को मंजूरी दी थी। जिसे अद्वैत वेदांत विभाग में खोला गया है। लेकिन पाठ्यक्रम में शामिल नहीं किया गया था। इसके ब्रोशर का मुख्यमंत्री ने विमोचन किया। भाषणमाला में खनिज मंत्री राजेंद्र शुक्ल, सांसद जनार्दन मिश्रा, महापौर ममता गुप्ता सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। विषय प्रवर्तन वरिष्ठ नेता भगवत शरण माथुर ने किया।
विवि को प्रतिवर्ष मिले २० करोड़ का अनुदान
भाषणमाला की शुरुआत में कुलपति प्रो. केएन सिंह यादव ने विश्वविद्यालय का प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए मुख्यमंत्री के समक्ष विवि की चार जरूरतों का जिक्र किया। शोध केंद्र, नीति केंद्र और पर्यटन कौशल विकास केंद्र स्थापित करने के लिए आर्थिक मदद की अपील तो की ही। साथ ही विश्वविद्यालय को प्रतिवर्ष २० करोड़ रुपए का अनुदान दिए जाने की मांग भी की। कहा कि शासन से प्रतिवर्ष विश्वविद्यालय को वर्ष १९९५ से केवल २.५ करोड़ रुपए मिलता आ रहा है। जबकि वर्तमान में विश्वविद्यालय के पास प्रति माह तीन करोड़ रुपए केवल वेतन का खर्च है।
मुख्यमंत्री के उद्बोधन के वक्त खूब लगे ठहाके
तन के साथ मन और बुद्धि का भी सुख चाहिए। इस पर उद्बोधन के वक्त मुख्यमंत्री द्वारा राजनीति के शुरुआती दिनों में एक कवि के कविता सुनने का जिक्र किया तो श्रोताओं ने जमकर ठहाके लगाए। करीब पौन घंटे तक मुख्यमंत्री का उद्बोधन चला।
...जब कलेक्टर को मंच से उतरना पड़ा
मुख्यमंत्री के उद्बोधन के दौरान की एक वृद्ध महिला सीएम से मिलने के लिए सभागार में घुस आई। लेकिन उसे सुरक्षाकर्मियों ने रोक लिया। यह देख मुख्यमंत्री ने उद्बोधन रोकते हुए कहा कि यह भाषणमाला का कार्यक्रम है। इसमें मिलना-मिलाना नहीं हो सकता है। फिर भी मिलेंगे। बाहर इंतजार करो। इस स्थिति को देखते हुए मंच पर पीछे बैठी कलेक्टर प्रीति मैथिल श्रोताओं के बीच आ गईं। उन्होंने सुरक्षाकर्मियों से इशारे में महिला को उनसे मिलाने की बात कही।
भैयालाल शुक्ल सभागार का शिलान्यास
भाषणमाला कार्यक्रम से पहले मुख्यमंत्री ने नवनिर्मित स्वर्ण जयंती पार्क का लोकार्पण करने के साथ जैन शोध केंद्र, स्व. भैयालाल शुक्ल सभागार, सौर ऊर्जा संयंत्र व स्वर्ण जयंती द्वार का शिलान्यास भी किया। मुख्यमंत्री ने विवि द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना भी की।
Published on:
04 Sept 2017 12:53 pm
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