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सरकार की लापरवाही : सात माह से ठप है कोर्ट की सुनवाई, जानिए पूरा मामला

सहकारिता के जेआर का रीवा और शहडोल में पद खाली, डीआर को दिया प्रभार, अपील सुनवाई का अधिकार नहीं, भोपाल जा रहे प्रकरण
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रीवा

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Mrigendra Singh

Feb 23, 2018

rewa

The government's negligence: the court hearing is stoped from seven months, know the whole case

रीवा। सहकारिता के न्यायालयीन मामले इनदिनों सुनवाई नहीं होने के चलते अटके हुए हैं। करीब सात महीने से अधिक समय से जेआर न्यायालय का कामकाज ठप है। यह अकेले रीवा ही नहीं बल्कि शहडोल संभाग की भी स्थिति है। दोनों संभागों में जेआर का पद खाली होने के चलते न्यायालयीन मामलों की सुनवाई नहीं हो पा रही है। इससे होने वाली समस्या के प्रति शासन गंभीर नहीं है, जिसके चलते परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है।
प्रदेश के अन्य संभागों में जेआर के खाली पद भरे जा चुके हैं लेकिन रीवा और शहडोल के लिए कोई आदेश नहीं हुआ है। रीवा में जेआर रहे एके खरे 13 जुलाई 2017 को रीवा से रिलीव होकर चले गए थे। उनके पास शहडोल का भी प्रभार था। तब से जेआर कोर्ट में मामलों की सुनवाई बंद है।

प्रभारी को कोर्ट में सुनवाई का अधिकार नहीं
रीवा में सहकारिता के डीआर शिवम मिश्रा को जेआर का भी प्रभार दिया गया है। वह प्रशासनिक व्यवस्थाओं का तो संचालन कर सकते हैं लेकिन सहकारिता के जेआर कोर्ट में किसी तरह की सुनवाई नहीं कर सकते। उन्हें यह अधिकारी इसलिए नहीं दिया गया है कि क्योंकि बतौर डीआर उनके द्वारा किए गए निर्णयों की अपील यहां आएगी तो स्वयं के फैसले को पलटने में पक्षपात का भी आरोप लग सकता है। इस वजह से केवल प्रशासनिक अधिकार दिए गए हैं।

महीने भर बाद की दी जा रही पेशी
सहकारिता के जेआर कोर्ट का संचालन सोमवार, मंगलवार और बुधवार सप्ताह के तीन दिन होता है। सुनवाई नहीं होने के चलते सभी प्रकरणों की पेशी एक महीने बाद की तारीख पर बढ़ाई जा रही है। सात महीने से लगातार इस प्रत्याशा में पेशियां बढ़ाई जा रही हैं कि जब जेआर की पदस्थापना होगी तब इनकी सुनवाई होगी। अब तक इतने लंबे समय तक पद खाली नहीं रहा है।

150 मामले पेंडिंग
जेआर के रीवा कोर्ट में 150 अपीलों के प्रकरण पेंडिंग हैं। जिनकी लगातार पेशियां बढ़ रही हैं, सुनवाई नहीं हो पा रही है। इसी तरह शहडोल में 55 प्रकरण लंबित बताए गए हैं।

बैंक घोटाले की सुनवाई भी अटकी
जिला सहकारी बैंक रीवा में हुए घोटाले की सुनवाई भी जेआर कोर्ट में चल रही है। सात महीने से इस प्रकरण में भी किसी तरह की सुनवाई आगे नहीं बढ़ी है। इसमें 66 आरोपियों की संपत्ति अटैच करने और कुर्की की कार्रवाई पर सुनवाई चल रही है। जिले का सहकारिता का यह अब तक सबसे बड़ा हाईप्रोफाइल घोटाला है। जिसमें बैंक के तीन सीईओ सहित आधा दर्जन कर्मचारियों और कई नेताओं को भी आरोपी बनाया गया है।

भोपाल जा रहे प्रकरण
अपील की सुनवाई की व्यवस्था नहीं होने के चलते सहकारिता के प्रकरण अब सीधे भोपाल के आयुक्त न्यायालय भेजे जा रहे हैं। जिसमें अपीलकर्ता को कई कठिनाइयों से गुजरना पड़ रहा है।
केस-1
सीधी के रावेन्द्र तिवारी को डीआर ने सेवा पृथक कर दिया था, जो हाईकोर्ट गए तो कोर्ट ने कहा कि पहले सक्षम न्यायालय में जाएं। रीवा में जेआर के नहीं होने की वजह से उन्होंने भोपाल में अपील की और वहां पर सुनवाई चल रही है।
केस-2
सतना जिले के भंवर समिति प्रबंधक रामायण शुक्ला पर गबन का आरोप है। उनसे 58 लाख रुपए की वसूली के लिए नोटिस जारी किया गया था। रीवा में जेआर कोर्ट संचालन नहीं होने की वजह से वह भी प्रकरण की अपील करने भोपाल गए।