
The storm left the catastrophe, 2 people died and 500 houses collapsed
रीवा। रीवा शहर के साथ पूरे जिले में आए तूफान ने हर तरफ तबाही का मंजर छोड़ा है। एक दिन पहले आए इस तूफान से इतना अधिक नुकसान पहुंचा है कि दूसरे दिन पूरा दिन प्रशासनिक अमला जुटा रहा लेकिन राहत नहीं पहुंचा सका है। इस तूफान के कारण दो लोगों की मौत होने के साथ ही करीब 500 से अधिक मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके साथ ही जिले के अलग-अलग हिस्सों में करीब डेढ़ हजार से अधिक की संख्या में मवेशियों के मरने की भी खबर है। हजारों की संख्या में नए और पुराने पेड़ जमींदोज हो गए। जिससे बिजली के तारों के साथ ही मकानों, वाहनों एवं अन्य सामग्री का बड़ा नुकसान हुआ है। इस तबाही में हुई नुकसानी का आकलन करने के लिए कलेक्टर ने अलग-अलग कई बैठे ली। साथ ही भोपाल से भी अधिकारियों ने नुकसानी की जानकारी ली है। बताया जा रहा है कि विद्युत वितरण कंपनी को ही अकेले करोड़ों रुपए का नुकसान उठाना पड़ा है। अभी इसका आकलन कंपनी नहीं कर पाई है। अधिकारियों का कहना है कि पहले जिले भर में बिजली की आपूर्ति बहाली को टारगेट में रखा गया है।
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30 घंटे से अधिक का ब्लैक आउट, बिजली-पानी के बिना हाहाकार
रीवा। तेज तूफान की वजह से शहर से लेकर गांव तक तबाही हुई है। जिसमें हजारों की संख्या में पेड़ और बिजली खंभे टूट गए हैं। इस कारण बड़े हिस्से में करीब 30 घंटे से अधिक का ब्लैकआउट रहा। इसके कारण केवल बिजली ही नहीं अन्य कई समस्याओं का भी सामना करना पड़ा है । रीवा शहर में कुछ हिस्सों में आंशिक रूप से कुछ समय के लिए बिजली बहाल की गई थी लेकिन बड़े हिस्से में 1 दिन पहले से बिजली आपूर्ति ठप रही। गुरुवार को सायं करीब 5 बजे से बिजली आपूर्ति तेज तूफान के चलते ठप हो गई थी। पूरी रात इसकी मरम्मत में विद्युत वितरण कंपनी का अमला लगा रहा। शुक्रवार की सुबह भी मरम्मत कार्य प्रारंभ किया गया जो देर रात तक जारी रहा। इसमें से कई हिस्सों में आपूर्ति बहाल हुई लेकिन शहर का बड़ा हिस्सा देर रात तक अंधेरे में रहा।
बिजली कटौती की वजह से शहर की पेयजल सप्लाई भी बाधित हुई है। शहर के तीनों फिल्टर प्लांट नहीं चल सके , इस कारण सुबह और सायं पानी की सप्लाई नलों के जरिए नहीं हो सकी। कुठुलिया, रानी तालाब एवं अजिगरहा का फिल्टर प्लांट बिजली आपूर्ति बाधित होने की वजह से नहीं चल सका । इस कारण शहर की टंकियां खाली रह गई और पानी की सप्लाई नहीं हुई। इसके साथ ही बिजली की समस्या के कारण उन लोगों को भी पानी के संकट का सामना करना पड़ा जिनके घर स्वयं की बोरिंग है लेकिन बिजली नहीं होने के चलते वे लोग भी पूरे दिन पानी की समस्या से जूझते रहे।
- सड़कों और बिजली लाइन पर गिरे पेड़ों को हटाया
एक दिन पूर्व आए तेज तूफान की वजह से शहर से लेकर गांव तक बड़ी संख्या में पेड़ गिर गए थे। शुक्रवार को पूरे दिन सड़कों और बिजली के तारों पर गिरे इन पेड़ों को हटाने का कार्य चलता रहा। बताया गया है कि इतनी बड़ी संख्या में नुकसानी हुई है कि विद्युत वितरण कंपनी के पास फौरी राहत देने के लिए पर्याप्त अमले की कमी होने लगी है। कई जगह तो श्रमिकों का भी सहारा लिया गया।
- शहर में दूसरे फीडरों से की टेस्टिंग
शहरी क्षेत्र के कई हिस्सों में बिजली की आपूर्ति बीती रात ही बहाल कर दी गई थी लेकिन सुबह वहां भी सप्लाई रोक दी गई और मरम्मत कार्य शुरू किया गया। इसके बाद अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग समय के लिए दूसरे फीडरो से सप्लाई की टेस्टिंग की गई । जिसमें 15 से 20 मिनट तक बिजली दी गई। हालांकि यह बड़ी राहत देने वाली बिजली रही। अधिकांश लोगों ने बोरिंग के जरिए अपने घरों में पानी का इंतजाम तब तक कर लिया।
-- हर तरफ बिजली गुल होने से अफसरों पर दबाव
शहरी क्षेत्र के साथ ही ग्रामीण इलाकों में भी बिजली सप्लाई बाधित होने के चलते विद्युत वितरण कंपनी के अफसरों पर भारी दबाव रहा। सुबह से प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ ही आम उपभोक्ताओं की ओर से तत्काल बिजली आपूर्ति बहाल करने का दबाव बनाया जाता रहा। इतना ही नहीं जबलपुर एवं भोपाल से कई बार अधिकारियों ने नुकसानी और बिजली सप्लाई बहाल करने का फीडबैक लिया।
Updated on:
30 May 2020 10:08 pm
Published on:
30 May 2020 10:49 am
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