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आइए रीवा : टूरिस्ट सर्किट का केन्द्र बनेगा रीवा, यहां प्रकृति और पुरातत्व प्रमुख आकर्षण

- जिले में दो नए टूरिस्ट सर्किट विकसित करने का प्रस्ताव शासन को भेजा- सड़क और ठहराव की सुविधाओं पर फोकस करेगा प्रशासन

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रीवा

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Mrigendra Singh

Jan 25, 2023

rewa

Tourism spot Rewa Madhya Pradesh, new tourist circuit mp-up


रीवा। रीवा शहर से लेकर पूरा जिला प्राकृतिक एवं पुरातात्विक स्थलों से भरा है। यहां पर पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए कई नई योजनाएं बनाई गई हैं। इस साल पर्यटन पर फोकस रहेगा। जिला प्रशासन ने बड़ी कार्ययोजना तैयार की है, जिसके तहत आने वाले समय में पर्यटकों को रीवा में आकर्षित करने के साथ ही यहां पर संसाधनों में वृद्धि करने की तैयारी है। जिले में धार्मिक महत्व के स्थलों के साथ ही पुरातात्विक महत्व के कई स्थल मौजूद हैं। पहाड़, नदियों और जलप्रपातों की भी बड़ी श्रृंखला है। इन सभी स्थानों की अब प्रशासनिक तौर पर ब्रांडिंग शुरू की गई है। रीवा को टूरिस्ट सर्किट के बड़े केन्द्र के रूप में स्थापित करने की तैयारी है। यहां पर वाराणसी, प्रयागराज, खजुराहो, जबलपुर, चित्रकूट, मैहर, संजय टाइगर रिजर्व, बांधवगढ़ आदि स्थानों पर आने वाले पर्यटकों को आकर्षित किया जाएगा। इसके लिए स्थानीय स्तर पर आवागमन और ठहराव की व्यवस्था भी की जाएगी। बाहर से आने वाले पर्यटक यदि इस क्षेत्र में आते हैं तो रीवा में ठहरकर आसपास के प्रमुख स्थलों तक तीन से चार घंटे के बीच ही पहुंच सकते हैं।
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दो नए टूरिस्ट सर्किट रीवा में होंगे विकसित
1-सारनाथ-देउरकोठार-प्रयागराज
जिले के देउर कोठार में सम्राट अशोक के शांति संदेशों के स्थापित स्तंभ हैं। रीवा-प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर मनगवां, गंगेव, गढ़ से आगे बढ़ते हुए कटरा के समीप स्थित देउर कोठार गांव में बौद्ध स्तूप हैं। रीवा से 65 किलोमीटर दूर स्थित यह स्थल बौद्ध अनुयायियों के साथ ही ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थ्लों का भ्रमण करने वाले पर्यटकों के लिए प्रमुख केन्द्र बनाया जा सकता है। यहां तीन बड़े एवं 44 छोटे पाषाण स्तूप हंै। जिसमें पकी ईंटों का भी उपयोग हुआ है। यहां पर उत्खनन से तोरण द्वार, हर्मिका, रेलिंग वेदिका स्तम्भ, सूची, प्रदक्षिणा पथ, अलंकृत शिलापट्ट आदि प्राप्त हुए हैं। यहां से चार ब्राह्मी लिपि (अशोक कालीन) अभिलेख भी मिले हैं। वर्तमान में इसे भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित किया जा रहा है। यह स्थान गौतम बुद्ध की नगरी सारनाथ से मिर्जापुर होते हुए चार घंटे के रास्ते पर है। यहां से प्रयागराज डेढ़ घंटे के रास्ते पर है।
2- ह्वाइट टाइगर सफारी-वाटरफाल एवं जिले के अन्य स्थल
जिला प्रशासन ने शासन ने को प्रस्ताव भेजा है। जिसमें कई टूरिस्ट रूट बताए गए हैं। इसमें बताया गया है कि रीवा आने वाले पर्यटक जिले के जिस हिस्से से गुजरेंगे उन्हें पर्यटन स्थल उपलब्ध रहेगा। इन स्थलों को पर्यटन के नक्शे में जोडऩे के लिए प्रस्ताव भेजा गया है।
इसमें बेला की ओर से रीवा आने वाले पर्यटकों को पुरवा वाटरफाल, चचाई वाटरफाल, टोंस वाटरफाल, घिनौचीधाम, आल्हाघाट, केवटी वाटरफाल और किला, देउर कोठार होते हुए प्रयागराज जाया जा सकता है। साथ ही यदि बनारस की ओर जाना है तो बहुती वाटरफाल, अष्टभुजा मंदिर, देवतालाब शिवमंदिर होते हुए बनारस पहुंचा जा सकता है।
दूसरे रूट में मुकुंदपुर में ह्वाइट टाइगर सफारी, गोविंदगढ़ में किला, मंदिर और तालाब, गुढ़ में भैरव बाबा मंदिर, सोलर पॉवर प्लांट, मोहनिया ट्विन ट्यूब टनल होते हुए संजय नेशनल पार्क सीधी, परसिली रिसार्ट, बांधवगढ़ नेशनल पार्क के बाद जबलपुर पहुंचा जा सकता है।

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हवाई अड्डा और सड़कों का विस्तार बढ़ाएगा पर्यटक
रीवा जिले में अब पर्यटकों की संख्या में बढ़ोत्तरी होने की संभावना है। अब तक बाहर से आने वाले पर्यटक जिले के प्रमुख स्थलों तक इसलिए नहीं पहुंच पाते थे क्योंकि सड़कों की स्थिति ठीक नहीं थी। अब जिले में नेशनल हाइवे की संख्या लगातार बढ़ रही है, साथ ही सड़कों का जाल बिछता जा रहा है। हवाई पट्टी को हवाई अड्डे के रूप में विकसित करने का कार्य भी प्रारंभ हो गया है। आने वाले समय में जिले के हर हिस्से में लोग सहजता से पहुंच सकेंगे।
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होम स्टे की भी रीवा में होगी व्यवस्था
रीवा जिले में पहली बार बड़े पर्यटन स्थलों की तर्ज होम स्टे की व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए कुछ क्षेत्र चिन्हित किए गए हैं। वहां के लोगों को तैयार किया जा रहा है कि जिनके पास ऐसे मकान हैं कि वह कुछ दिनों के लिए किराए पर दे सकते हैं। लोगों को प्रशिक्षित किया जाएगा। रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया भी इसके लिए होगी। संबंधित लोगों का पूरा डाटा प्रशासन के पास रहेगा। इसके लिए जवा जनपद के पहाड़ी क्षेत्र के कुछ गांवों को चिन्हित किया गया है। साथ ही त्योंथर के पास के कई गांव हैं। देउर कोठार में घूमा, कटरा के पास कुछ गांवों को चिन्हित किया जा रहा है।
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इंवेस्टमेंट पैटर्न : आइए रीवा अभियान पर्यटन के साथ रोजगार भी बढ़ाएगा
रीवा के जिला प्रशासन ने पर्यटन को रोजगार से जोडऩे के लिए आइए रीवा नाम से एक अभियान की शुरुआत की है। इससे न केवल जिले के पर्यटन स्थलों की ब्रांडिंग की जा रही है बल्कि इंवेस्टमेंट पैटर्न पर इसे आगे बढ़ाया जा रहा है। आइए रीवा के तहत हाल ही में प्रयागराज में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। जहां पर कलेक्टर मनोज पुष्प सहित जिले के कई अधिकारी भी पहुंचे थे और रीवा जिले के धार्मिक, ऐतिहासिक, प्राकृतिक पर्यटन स्थलों की ब्रांडिंग की थी। साथ ही इंवेस्टर्स से मिलकर जिले में उद्योग स्थापित करने के लिए आमंत्रित भी किया है। जिस पर 250 करोड़ रुपए से अधिक के निवेश की सहमति भी हो चुकी है। इसमें खासतौर पर उन्हीं क्षेत्रों में निवेश कराया जाएगा जहां पर्यटन की संभावनाएं अधिक हैं। इसलिए पर्यटन स्थलों में सुविधाओं में वृद्धि के साथ ही रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।


तीन प्रारूपों में बढ़ेगा पर्यटन
1- स्व सहायता समूहों को पर्यटन स्थलों पर रखरखाव और व्यापारिक संचालन की अनुमति दी जाएगी। इससे स्थानीय कला-संस्कृति के साथ ही कलाकृतियों की ब्रांडिंग भी कराई जाएगी। स्थानीय खानपान को भी देश-दुनिया में प्रचारित किया जाएगा।
2- इंवेस्टमेंट पैटर्न से पर्यटन स्थलों के आसपास छोटे उद्योग स्थापित कराए जाएंगे जहां पर्यटकों की जरूरत से जुड़ी सामग्री निर्मित होगी। इससे पर्यटकों की सुविधाएं बढ़ेंगी साथ ही स्थाई तौर पर क्षेत्र के लोगों को रोजगार भी मिलेगा।
3- टूरिस्ट सर्किट बनाए जाने से एक स्थल से दूसरे स्थल तक पहुंचने के लिए आवागमन के क्षेत्र में रोजगार बढ़ेगा। साथ ही रास्ते में अन्य स्वरोजगार के साधन बढ़ेंगे। जिन स्थानों पर पर्यटक पहुंचेंगे वहां भी लोगों को स्वरोजगार स्थापित करने का मौका मिलेगा।
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पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए आइए रीवा के नाम से अभियान चला रहे हैं। इसमें न केवल रीवा घूमने के लिए बल्कि इंवेस्टमेंट के लिए भी आमंत्रित किया जा रहा है। पर्यटन स्थलों पर स्थाई तौर पर रोजगार स्थापित करने के प्रयास हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्व सहायता समूहों को जोड़ेंगे इससे स्थानीय कलाओं के साथ ही व्यंजनों का प्रचार होगा और रोजगार बढ़ेगा।
मनोज पुष्प, कलेक्टर रीवा
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पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हर तरह से प्रयास किए जा रहे हैं। इसी के तहत स्व सहायता समूहों को जोड़ा जा रहा है। साथ ही होम स्टे की व्यवस्था भी रीवा में शुरू करने की तैयारी है। इसके लिए जवा और त्योंथर के कुछ क्षेत्र चिन्हित हो गए हैं। बौद्ध स्तूप देउर कोठार के पास के भी गांवों में यह व्यवस्था कराने लोगों से संवाद चल रहा है।
स्वप्निल वानखड़े, सीईओ जिला पंचायत रीवा
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