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टीआरएस कालेज के स्थापना वर्ष विवाद पर फिर शुरू हुई जांच, इस मामले पर मचा है बवाल

- कलेक्टर ने अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा से रिपोर्ट मांगी, तीन सदस्यीय समिति गठित

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रीवा

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Mrigendra Singh

Jun 27, 2020

rewa

Trs college Rewa controversy, 150 year stabalishment of coliege


रीवा। ठाकुर रणमत सिंह कालेज के स्थापना वर्ष को लेकर शुरू हुआ विवाद अब प्रशासनिक स्तर पर जांच के दायरे में आ गया है। लगातार कई संगठनों द्वारा उठाई गई मांग पर संभागायुक्त ने कलेक्टर से प्रतिवेदन मांगा था। जिस पर अब कलेक्टर की ओर से भी अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा को पत्र भेजकर रिपोर्ट मांगी गई है।

अतिरिक्त संचालक ने तीन वरिष्ठ प्रोफेसर्स की समिति गठित कर दी है। समिति ने शिकायतों में दिए गए बिन्दुओं पर जांच शुरू की है। बताया गया है कि टीआरएस कालेज की स्थापना के 150 वर्ष पूरे होने पर प्रबंधन द्वारा भव्य कार्यक्रम आयोजित करने की प्रक्रिया चल रही है। इस पर अब सवाल उठाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ता सामाजिक कार्यकर्ता बीके माला ने संभागायुक्त को ज्ञापन सौंपकर मांग उठाई थी कि यदि कालेज की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने का कार्यक्रम वर्ष 1983-84 में मनाया गया तो अब 150 वर्ष पूरे होने का कार्यक्रम क्यों मनाया जा रहा है।

शताब्दी वर्ष समारोह के कार्यक्रम होने से अब तक ३६ वर्ष ही पूरे हो रहे हैं। इस पर जांच पूरी हो चुकी है और प्राचार्य की भूमिका सवालों के घेरे में रही है। वहीं अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज की ओर से दिए गए ज्ञापन पर अब फिर से उच्च शिक्षा के अतिरिक्त संचालक से प्रतिवेदन मांगा गया है।

- इन प्रोफेसर्स को सौंपी गई जांच
कलेक्टर का निर्देश मिलने के बाद अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा ने तीन वरिष्ठ प्रोफेसर्स की कमेटी गठित कर टीआरएस कालेज के स्थापना वर्ष विवाद पर रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा है। इस टीम में प्रो. महेन्द्रमणि द्विवेदी शासकीय कन्या महाविद्यालय रीवा, प्रो. सुशील दुबे टीआरएस कालेज एवं प्रो. कमलेश सिंह शासकीय महाविद्यालय मनगवां आदि को शामिल किया गया है।

- प्राचार्य पर कार्रवाई का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है
टीआरएस कालेज के स्थापना वर्ष विवाद को लेकर संभागायुक्त द्वारा पूर्व में कराई गई जांच के आधार पर संभागायुक्त ने उच्च शिक्षा के आयुक्त को प्रस्ताव भेजा है। जिसमें तत्कालीन प्राचार्य डॉ. रामलला शुक्ला की भूमिका संदिग्ध मानते हुए और तथ्य छिपाने का प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की है। इस प्रस्ताव में कलेक्टर की ओर से भेजी गई एकल नस्ती का भी हवाला दिया गया है, जिसमें कलेक्टर ने भी स्पष्ट किया है कि टीआरएस कालेज प्रबंधन द्वारा इतना बड़ा आयोजन करने की तैयारी प्रारंभ कर दी गई लेकिन जिला प्रशासन से किसी तरह की अनुमति नहीं ली थी। वहीं उच्च शिक्षा के अतिरिक्त संचालक ने भी कालेज द्वारा बताए गए स्थापना वर्ष 1869 को सही नहीं बताया है।

- कालेज द्वारा 1882 स्थापना वर्ष बताया जाता रहा है
टीआरएस कालेज द्वारा बीते कई वर्षों से छात्रों को कालेज का स्थापना वर्ष 1882 बताया जाता रहा है। कालेज की ओर से हर वर्ष जारी की जाने वाली विवरणिका में भी स्थापना वर्ष यही बताया गया है। अब शिकायतकर्ता बीके माला ने कहा है कि बीते करीब दस वर्षों से लगातार जो विवरणिका जारी हो रही है, जब उसमें भी छात्रों को यही बताया जा रहा है कि 1882 में कालेज की स्थापना हुई तो फिर कालेज के प्राचार्य की ओर से यह दावा अचानक कैसे किया जा सकता है कि 1869 में स्थापना हुई थी और अब 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं। कहा गया है कि तत्कालीन प्राचार्य डॉ. रामलला शुक्ला की ओर से जारी किए जाने वाले विवरणिका में भी कालेज के स्थापना वर्ष को 1882 बताया जाता रहा ह