28 अक्टूबर 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

आमदनी बढ़ाने समूहों ने मिलाया एक दूसरे से हाथ, अब करेंगे मोटी कमाई, सरकार भी दे रही साथ, जानिए क्या है टेक्निक

स्थापित करेंगे प्लांट...
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

रीवा

•

image

Ajit Shukla

•

Updated: 4 Oct 2018, 12:45 PM IST

Village group will plant food processing in Rewa, govt will help

Village group will plant food processing in Rewa, govt will help

रीवा. किसानों से उनकी उपज लेकर फूड प्रोसेसिंग के जरिए विभिन्न खाद्य पदार्थों का उत्पादन करने वाले गांव के छोटे समूहों ने एक दूसरे से हाथ मिलाकर एक फेडरेशन तैयार कर लिया है। फेडरेशन के जरिए अब यहां फूड प्रोसेसिंग को लेकर एक प्लांट स्थापित किया जाएगा। सरकार की योजना के तहत समूहों ने यह कदम उठाया है।

गांवों के 500 से अधिक समूहों ने विकासखंड स्तर पर बनाया 20 संकुल
आजीविका मिशन के माध्यम से जिले में गांव के 500 से अधिक समूहों को मिलाकर विकासखंड स्तर पर 20 संकुल तैयार किया गया है। इन संकुलों को मिलाकर एक जिला स्तरीय फेडरेशन बनाया गया है। शासन की योजना के तहत संकुलों का पंजीयन शासन स्तर पर किया गया है। अधिकारियों की माने तो जिला फेडरेशन की ओर से यहां एक प्लांट स्थापित किया जाएगा। प्लांट स्थापित करने में सरकार की ओर से आर्थिक मदद भी दी जाएगी।

प्रदेश में लगाए जाएंगे कुल सात प्लांट, उसमें एक रीवा में लगेगा
शासन की योजना के तहत प्रदेश स्तर पर प्रदेश भर में विभिन्न जिलों के फेडरेशन के माध्यम से प्रथम चरण में सात प्लांट स्थापित किए जाने हैं। इनमें से एक प्लांट रीवा में स्थापित किया जाएगा। यहां स्थापित होने वाले प्लांट में शहडोल संभाग के संकुल भी शामिल होंगे। फूड प्रोसेसिंग पर आधारित स्थापित किए गए प्लांट में कृषि पर आधारित विभिन्न खाद्य पदार्थ तैयार किए जाएंगे।

प्लांट से होने वाले उत्पादन का आंगनवाडिय़ों में होगी आपूर्ति
अधिकारियों के मुताबिक प्लांट में तैयार खाद्य पदार्थ का आपूर्ति आंगनवाडिय़ों में की जाएगी। प्लांट में उत्पाद तैयार करने के लिए पूरी कोशिश की जाएगी कि कच्चा माल क्षेत्रीय किसानों से खरीदा जाए। फिलहाल अभी संकुलों को मिलाकर जिला फेडरेशन तैयार हो पाया है। अभी तक समूह अलग-अलग उत्पादन तैयार कर आंगनवाडिय़ों में आपूर्ति किया करते थे, लेकिन उसे प्रतिबंधित कर दिया गया। प्रतिबंध के बाद शासन की ओर से पंजीयन की कवायद शुरू की गई।