
Vindhya's dishes included in IGNOU's curriculum included
रीवा. करीब 25 वर्ष पहले विंध्य के व्यंजनों को प्रमोट करने का सिलसिला शुरू हुआ तो आज भी जारी है। बात पूर्व मंत्री पुष्पराज सिंह की कर रहे हैं। उनके प्रयासों के चलते विंध्य के व्यंजनों की आज वह स्थान मिल रहा है, जिस चाहत के साथ पूर्व मंत्री ने खुद व्यंजनों को बनाने और उसे प्रमोट करने का अभियान शुरू किया था। खास व्यंजनों में शामिल इंद्रहर को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय की ओर से पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना पूर्व मंत्री के प्रयासों का ही नतीजा माना जा रहा है।
विंध्य के व्यंजन को बनाने का खास हुनर रखने वाले पूर्व मंत्री पुष्पराज सिंह बताते हैं कि २५ वर्ष पहले उन्होंने व्यंजनों को बनाने का सिलसिला तब शुरू किया, जब ताज होटल के एक ट्रेनिंग प्रोग्राम में शामिल हुए। ट्रेनिंग के बाद उन्होंने यह निर्णय लिया कि विंध्य के व्यंजनों की ख्याति को वह देश-विदेश तक पहुंचाएंगे। निर्णय के मद्देनजर ही उन्होंने भले ही पूर्व प्रदेश सरकार में मंत्री तक की जिम्मेदारी निभायी। लेकिन किचन से ताल्लुक नहीं टूटा।आज भी पूर्व मंत्री विंध्य के फेमस व्यंजन न केवल खुद बनाते हैं बल्कि उन्हें पौष्टिकता के साथ स्वादिष्ट बनाने का हुनर रखते हैं।
इन व्यंजनों को बनाने का है विशेष हुनर
पूर्व मंत्री पुष्पराज सिंह बांधवेश मटन, चिकन बघेली, इंद्रहर, दाल की पुरी, कटहल की सब्जी, मउहरी, गुझिया, खुर्चन व खटगोश जैसे व्यंजनों को बनाने विशेष हुनर रखते हैं। इतना ही नहीं उनसे लोग इन व्यंजनों को बनाने का प्रशिक्षण भी प्राप्त करने पहुंचते हैं।
पाठ्यक्रम में शामिल होना प्रयासों का ही नतीजा
इग्नू के पाठ्यक्रम में इंद्रहर का शामिल होना पूर्व मंत्री के ही प्रयासों का नतीजा माना जा रहा है। विभिन्न कार्यक्रम में उनकी ओर से बनाए गए डिशेज की परिचर्चा और प्रसारण से इंद्रहर जैसे डिशेज को ख्याति मिली और वह अंतत: पाठ्यक्रम में शामिल किया गया।
Published on:
31 Jul 2018 04:53 pm
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