
Waste management company created Godown on government land, rewa
रीवा। शहर में खाली भूखंडों से टैक्स वसूलने के लिए नगर निगम ने प्रावधान तो बना लिया है। आम लोगों को नोटिसें भी भेजी जाती रही हैं लेकिन सरकारी भूमि के बड़े हिस्से में कचरा प्रबंधन कंपनी ने अपना गोडाउन और वर्कशाप बना रखा है। उससे अब तक नगर निगम की ओर से कोई टैक्स की मांग नहीं की गई है।
कंपनी को सरकारी भूमि पर इस तरह से कब्जा जमाने के लिए कोई आदेश भी नगर निगम की ओर से नहीं दिया गया है फिर भी कंपनी ने अपनी सामग्री रखकर कब्जा जमा रखा है। शहर के चिरहुला मोहल्ले में करीब एक एकड़ से अधिक हिस्से में यह खाली भूखंड पड़ा है। जहां पर कचरा प्रबंधन कंपनी रीवा एमएसडब्ल्यू होल्डिंग कंपनी ने अपने वाहन एवं अन्य सामग्री रखने के लिए कब्जा कर रखा है।
इस कंपनी को रीवा नगर निगम के साथ ही संभाग के 28 नगरीय निकायों के कचरा प्रबंधन का ठेका मिला है। जहां के लिए उपयोग किए जाने वाले वाहन एवं अन्य सामग्री को भी यहीं पर रखा गया है। इस तरह से सरकारी भूमि का कंपनी की ओर से व्यवसायिक उपयोग किया जा रहा है और नगर निगम उससे कोई शुल्क की वसूली नहीं कर रहा है।
यह भूमि नगर निगम ने चिरहुला में आवासीय योजना क्रमांक एक के लिए चिन्हित की थी। बाद में गांधी काम्पलेक्स के निर्माण के दौरान पीडब्ल्यूडी की भूमि लेने पर चिरहुला की उक्त भूमि का कुछ हिस्सा दिया गया था। जहां पर कुछ समय तो पीडब्ल्यूडी का कब्जा रहा लेकिन बाद में विभाग ने भी यहां का कब्जा छोड़ दिया। इसी भूमि के एक हिस्से में नगर निगम ने पार्क का निर्माण कराया है।
चिरहुला के वार्ड 44 के निवर्तमान पार्षद नीरज पटेल कहते हैं कि खाली भूखंडों पर यदि टैक्स वसूला जा रहा है तो इस कंपनी से भी लिया जाना चाहिए, इससे लाखों रुपए का टैक्स मिलेगा। उन्होंने कहा कि निगम अधिकारियों ने एमआइसी, परिषद के सामने किराया देने को लेकर कोई प्रस्ताव नहीं दिया था। वहीं जोन के राजस्व निरीक्षक राजेश सिंह ने कहा है कि जल्द ही टैक्स की मांग का प्रस्ताव आयुक्त के पास रखेंगे।
--तीन वर्ष से सामग्री रखकर किया कब्जा
चिरहुला में रीवा एमएसडब्ल्यू होल्डिंग कंपनी ने गोडाउन और वर्कशाप करीब तीन वर्ष से बना रखा है। इस दौरान निगम में कई आयुक्त बदले लेकिन किसी ने भी उक्त कब्जे पर ध्यान नहीं दिया। खाली भूखंडों के व्यवसायिक उपयोग पर नगर निगम जिस तरह से टैक्स की वसूली करता है यदि उक्त टैक्स अधिरोपित किया जाता तो अब तक लाखों रुपए का टैक्स नगर निगम को मिल सकता था। इनदिनों टैक्स वसूली को लेकर निगम प्रशासन जोर दे रहा है लेकिन इस तरह से बड़े लोगों से वसूली नहीं की जा रही है, जिससे निगम को बड़ा आर्थिक नुकसान हो रहा है। मौखिक आदेश पर ही यह कब्जा है। इसके लिए निगम ने मेयर इन काउंसिल या फिर परिषद के सामने कोई प्रस्ताव नहीं रखा है।
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कचरा प्रबंधन का ठेका है कंपनी के पास
नगर निगम ने शहर में निकलने वाले कचरा के प्रबंधन का ठेका रीवा एमएसडब्ल्यू कंपनी होल्डिंग को दिया है। इस कंपनी की जिम्मेदारी है कि रीवा शहर में डोरटूडोर कचरा कलेक्शन के साथ ही शहर की सफाई में निकलने वाले कचरे के उठाव की जिम्मेदारी है। इस कचरे से पहडिय़ा में छह मेगावॉट बिजली उत्पादन के लिए प्लांट लगाया गया है। इसकी लागत 158 करोड़ रुपए है।
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इन निकायों की भी जिम्मेदारी कंपनी के पास
कचरा प्रबंधन कंपनी के पास केवल नगर निगम रीवा ही नहीं बल्कि रीवा, सतना और सीधी जिले के 28 नगरीय निकायों की जिम्मेदारी है। जिसमें नगर निगम रीवा, नगर निगम सतना, नगर पालिका सीधी, नगर पालिका मैहर के साथ ही नगर परिषद गोविंदगढ़, गुढ़, मनगवां, मऊगंज, हनुमना, नईगढ़ी, त्योंथर, चाकघाट, सिरमौर, बैकुंठपुर, सेमरिया, रामपुर बघेलान, नागौद, अमरपाटन, बिरसिंहपुर, कोटर, जैतवारा, चित्रकूट, कोठी, उचेहरा, न्यू रामनगर, रामपुर नैकिन, चुरहट, मझौली आदि का भी ठेका मिला है। रीवा में कंपनी ने अपना वर्कशाप सरकारी भूमि पर बना रखा है और सभी निकायों के लिए सेवाओं से जुड़ी सामग्री भी यहीं पर रखी गई है।
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Published on:
04 Dec 2020 09:40 am
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