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कॉम्बिनेशन से बनी 156 एफडीसी दवाएं प्रतिबंधित, फिर भी धड़ल्ले से बिक रहीं

दवा व्यापारी संघ लिस्ट आने का कर रहा इंतजार सागर. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भले ही पैरासिटामोल, ट्रॉमाडोल, टारिन और कैफीन के मिश्रण से बनी 156 एफडीसी (फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन) पर प्रतिबंध लगा दिया हो लेकिन जिले में यह दवाएं धड़ल्ले से बिक रहीं हैं। वहीं दवा व्यापारी संघ प्रतिबंधित दवाओं की लिस्ट आने का […]

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सागर

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Nitin Sadaphal

Aug 26, 2024

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दवा व्यापारी संघ लिस्ट आने का कर रहा इंतजार

सागर. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भले ही पैरासिटामोल, ट्रॉमाडोल, टारिन और कैफीन के मिश्रण से बनी 156 एफडीसी (फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन) पर प्रतिबंध लगा दिया हो लेकिन जिले में यह दवाएं धड़ल्ले से बिक रहीं हैं। वहीं दवा व्यापारी संघ प्रतिबंधित दवाओं की लिस्ट आने का इंतजार कर रहा है। थोक दवा व्यापारियों के यहां 156 एफडीसी की अलग-अलग कंपनियों की हजारों प्रकार की दवाओं का स्टॉक बना हुआ है, जिनकी जीएसटी भी दुकानदार व व्यापारी अदा कर चुके हैं, ऐसे में व्यापारियों को यह दवा वापिस करने के लिए भी कुछ समझ नहीं आ रहा है। वहीं जिलेभर की मेडिकल में निगरानी रखने के लिए जिला प्रशासन द्वारा भी कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है।

इन बीमारियों में प्रचलित एफडीसी दवाएं

सर्दी-जुकाम, बुखार और घुटना, पीठ व बदन दर्द, मल्टी-विटामिन और एंटीबायोटिक्स में एफडीसी टैबलेट ज्यादा प्रचलित हैं। इन समस्याओं में दवा कंपनियों ने खुद की और डॉक्टर्स की सहूलियत को देखते हुए दवाओं के कॉकटेल बनाए, तीन की जगह एक टैबलेट बनाकर बेची जा रही है। इन दवाओं के साइड इफेक्ट्स भी बढ़ रहे हैं। इनसे गुर्दा, लिवर सहित अन्य अंगों पर असर पड़ रहा है।

बैन हुईं ये दवाएं

बैन की गई दवाओं में एसेक्लोफेनाक 50 एमजी प्लस पैरासिटामोल 125 एमजी टेबलेट, एमाइलेज, प्रोटीएज, ग्लूकोएमाइलेज, पेक्टिनेज, अल्फा गैलेक्टोसिडेज, लैक्टेज, बीटा-ग्लूकोनेज, सेल्युलेस, लाइपेज, ब्रोमेलैन, जाइलेनस, हेमिकेल्यूलेस, माल्ट डायस्टेज, इनवर्टेज, पापेन जैसी दवाएं शामिल हैं। इसके पहले भी बच्चों में दिए जाने वाले निमेसुलाइड और पैरासिटामोल सिरप के लिवर पर दुष्परिणाम सामने आने पर रोक लगी हुई है।

पुराना खपा रहे, नया ऑर्डर नहीं

तिली रोड की तीन मेडिकल स्टोर्स, गोपालगंज दो मेडिकल स्टोर्स, परकोटा व कटरा स्थित 5 मेडिकल स्टोर्स पर जब सर्दी-जुकाम, बुखार के लिए कॉम्बिनेशन की दवा मांगी गई तो 12 में से 11 दुकानदारों ने गोली मिल गई। वहीं तिली क्षेत्र के कुछ मेडिकल स्टार संचालकों ने बताया कि दवाएं प्रतिबंधित होने के बाद से अब इनका नया ऑर्डर नहीं लगा रहे हैं।

जब एक तरह की दवा को दूसरी के साथ मिला दिया जाता है तो उसके दुष्परिणाम भी बढ़ जाते हैं। इस तरह के कॉम्बीनेशन तैयार करने से पहले बड़े स्तर पर स्टडी की जानी चाहिए। एफडीसी दवाएं महंगी भी होती हैं और मरीजों पर विपरीत असर भी डाल रहीं हैं। प्रतिबंधित दवाओं को लेकर कढ़ाई से पालन होना चाहिए।

डॉ. ज्योति चौहान, क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं।

दवा कंपनियों ने अभी दवाएं वापस लेने के लिए कोई पत्र जारी नहीं किया है। दवाओं की लिस्ट भी एक-दो दिन में आ जाएगी। दवाएं मेडिकल स्टोर्स पर बिक रहीं हैं, इसकी जानकारी नहीं है।

अशोक जैन, दवा व्यापारी संघ जिलाध्यक्ष।