
3 एकड़ में फैले बरगद की 200 से अधिक शाखाओं के बीच विराजीं मां चौसठ योगिनी
देवरी से 15 किमी दूर स्थित मंदिर में नवरात्र पर होती है विशेष आराधना
देवरी कलां. देवरी नगर को देवपुरी नगरी के नाम से भी जाना जाता हैं यहां प्राचीन मंदिरों में पाषाण कालीन प्रतिमाएं विराजित हैं। देव खंडेराव मंदिर, रामघाट मंदिर में राम लखन सीता की प्रतिमा, पटेल वार्ड में हरसिद्धि माता की प्रतिमा आदि विराजित है।
उसी प्रकार नगर से लगभग 15 किमी दूर महराजपुर पंचायत के ग्राम पनारी में चौसठ योगिनी माता विराजित हैं। यहां बरगद का पेड़ ३ एकड़ से अधिक जगह में फैला है। जिसकी २०० से अधिक शाखाएं फैली हुईं हैं। श्रद्धालुओं को अनोखी ठंडक ओर शांति का अनुभव ही चौसठ योगिनी धाम की विशेषता है । पुजारी द्वारका प्रसाद वैध ने बताया कि यहां पर मां के अनेक रूप के दर्शन करने के लिए दूरदराज से श्रद्धालु आते हंंंै।
यहां मनोकामना पूरा होने पर घंटा चढ़ाने की परंपरा भी है। यहां प्रसाद के रूप में पुराने समय से भर्ता बाटी का चलन है।
मंंदिर के रास्ते पर कब्जा, कीचड़ से सने मार्ग से जा रहे दर्शन करने
विकासखंड के ग्राम सिमरिया में महाराजपुर से सहजपुर जाने वाले मार्ग पर अतिक्रमण है इस कारण लोगों को खेरापति माता के दरबार में जाने के लिए कीचड़ से सने रास्ते से होकर जाना पड़ता है। और आगे दूल्हा देव का मंदिर भी है।
वहां इस जगह पर गांव के दबंग लोगों द्वारा कब्जा कर लिया गया है ओर पुराने रास्ते को बंद कर दिया है। इस नवरात्रि में भी गांव के लोग मुख्य मार्ग की बजाय कीचड़ भरे रास्ते से होकर मंदिर जा रहे हैं। कोटवार धर्म ने कहा कि यह रास्ता बनना बहुत जरूरी है।
इंद्राणी अहिरवार,रश्मि अहिरवार, आशारानी हरिजन ने मंदिर के रास्ते से अतिक्रमण हटाने की
मांग की है । इसकी ्िशकायत जनसुनवाई में की जा चुकी है। इसके बाद भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
Published on:
02 Oct 2019 03:40 pm
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