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सुपर सीडर मशीन के लिए हुए 25 आवेदन मिली छह किसानों को, स्ट्रा रीपर मशीन मिली सिर्फ दो

बीना. खेतों में किसान पराली न जलाएं इसके लिए कृषि विभाग द्वारा किसानों को जागरूक किया जा रहा है, लेकिन इसके लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। आवेदन के अनुसार अनुदान पर मशीनें भी कृषि विभाग से किसानों को मशीनों भी नहीं मिल पा रही हैं। कृषि विभाग पराली प्रबंधन के लिए […]

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25 applications for super seeder machines were received by six farmers, only two received straw reaper machines.

फाइल फोटो

बीना. खेतों में किसान पराली न जलाएं इसके लिए कृषि विभाग द्वारा किसानों को जागरूक किया जा रहा है, लेकिन इसके लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। आवेदन के अनुसार अनुदान पर मशीनें भी कृषि विभाग से किसानों को मशीनों भी नहीं मिल पा रही हैं।

कृषि विभाग पराली प्रबंधन के लिए सुपर सीडर मशीन अनुदान पर दे रही है। इसके लिए क्षेत्र के करीब 25 किसानों ने आवेदन किए थे, लेकिन सिर्फ छह को मशीन मिली हैं। इस मशीन की कीमत ढाई से तीन लाख रुपए है और एक लाख बीस हजार रुपए अनुदान मिलता है। इसके साथ ही भूसा बनाने वाली स्ट्रा रीपर मशीन के लिए 6 आवेदन हुए थे ओर दो किसानों को ही मशीन मिली हैं। इस मशीन की कीमत भी तीन लाख रुपए से तीन लाख बीस हजार रुपए तक है। इसके अलावा हैप्पी सीडर, रोटावेटर, रीपर, बेलर आदि मशीनें आती हैं। इन मशीनों की कीमत ज्यादा होने से हर किसान इसे खरीद भी नहीं पा रहे हैं। साथ ही इनके लिए बड़े ट्रैक्टर की जरूरत होती है। साथ ही मशीनों का लक्ष्य भी कम है, जिससे इच्छुक किसानों को यह मिल नहीं पा रही हैं। यदि पराली को जलाने से रोकना है, तो पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराने होंगे।

212 जगह जली थी पराली

कृषि विभाग के अनुसार पिछले वर्ष रबी सीजन में ब्लॉक में 212 जगह पराली जली थी। साथ ही खरीफ सीजन में करीब 7 जगह धान की पराली में आग लगाई गई थी।

यंत्रों की उपलब्धता कराएं, प्रशिक्षण दें

किसान सौरभ आचवल ने बताया कि शासन द्वारा पाराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन उचित प्रशिक्षण, जानकारी और यंत्रों की उपलब्धता कराए बिना एफआइआर करना गलत है। यंत्रों की समुचित व्यवस्था ग्राम पंचायत स्तर पर हो, उपलब्ध यंत्रों की सूची पंचायत व तहसील कार्यालय में चस्पा हो, तब इसका उचित प्रबंधन हो सकता है। कृषि विभाग को अभियान चलाकर कृषकों को प्रशिक्षित और जागरूक करना होगा।

कर रहे हैं जागरूक

पाराली प्रबंधन के लिए अनुदान पर मशीनें दी जा रही हैं। सभी किसान मशीन नहीं खरीद पाते हैं, तो किराए पर अन्य किसानों से ले सकते हैं। साथ ही डी कंपोजर का उपयोग करने किसानों का जागरूक किया जाएगा। इसके लिए किसानों को 20 से 50 रुपए एकड़ का खर्च आएगा और पराली नष्ट होकर खाद बन जाएगी। लक्ष्य के अनुसार मशीनें उपलब्ध कराईं जा रही हैं।

अवधेश राय, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, बीना