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पिता की चिता में ३ क्विंटल लगी लकड़ी तो बढ़ी चिंता, तेरहवीं में बांटे पौधे

आम आदमी भी हुआ जागरूक, दिखने लगी अभी से भविष्य की चिंता

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3 quintals of wood in the father's python, increased anxiety, plants distributed in thirteenth

पिता की चिता में ३ क्विंटल लगी लकड़ी तो बढ़ी चिंता, तेरहवीं में बांटे पौधे

देवरी कला. बढ़ते तापमान और जलसंकट से निजात पाने की सोच केवल सरकारों के पास नहीं, अब हर आदमी के दिमाग में कहीं न कहीं गहरे बैठ गई है। हर आदमी इस ओर कदम बढ़ाने की सोच रहा है। कुछ ऐसे ही लोगों में नगर के सुखचैन वार्ड का एक परिवार है। इस घर में तेरहवीं के दौरान ब्राहण भोज के बाद ५१ पौधों का वितरण किया गया। जगत सिंह ने बताया कि उनके पिता सेवानिवृत्त शिक्षक बालमुकुंद ठाकुर के ६ जून को निधन हो गया था। तेरहवीं के समय ध्यान आया कि अंतिम संस्कार में २-३ क्विंटल लकडिय़ों की जरूरत होती है। अगर हर आदमी कम से कम एक क्विंटल लकड़ी जितना पेड़ लगाए तो पर्यावरण की दिशा में कुछ पहल तो ही सकती है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा न किया गया तो एक दिन अंतिम संस्कार के लिए भी लकड़ी नहीं मिलेगी। जंगल नहीं होंगे तो जंगल विभाग कहां से लकड़ी लाएगा। उन्होंने इसी विचार से प्रेरित होकर कर्मकांड के बाद महापात्र, ब्राह्मण समेत अन्य आगन्तुकों को भोजन के पश्चात यथोचित दक्षिणा एवं आम, गुलाब, जामुन, अमरूद तथा पौधा देकर इसके संरक्षण का आग्रह किया। अजय सिंह ने दिए गए पौधों से पिता की यादों को जोड़ते हुए पौधा को बड़ा होने तक सहेजने की बात कही। इस दौरान ओम नारायण ठाकुर, भगवान सिंह ठाकुर, हेमभूषण ठाकुर, प्रहलाद ठाकुर, देवी सिंह, नितिन ठाकुर, विपिन ठाकुर, सत्य सिंह ठाकुर, रमेश ठाकुर, सीताराम ठाकुर उपस्थित रहे। इस पहल की गांव में प्रशांसा हो रही है।