
Rang Panchami: बुंदेलखंड के सागर के बड़ा बाजार में 300 साल पुराना श्री देव अटल बिहारी मंदिर है, जहां केवल महिलाएं रंगपंचमी के दिन कान्हा संग रंग खेलती हैं। ये परंपरा 46 साल से यहां चल रही है। अनोखी बात यह है कि यहां पुरुषों की नो एंट्री होती है। यहां हर साल होली खेलने के लिए विशेष इंतजाम किए जाते हैं, टेसू के रंग और गुलाल से ही होली खेली जाती है। यहां 30 मार्च को दोपहर 12 बजे से शाम पांच बजे तक महिलाएं भगवान के साथ रंग खेलेंगी।
रंग पंचमी को लेकर यहां एक कहानी सुनाई जाती है। कहानी में बताया जाता है कि कई साल पहले एक मंदिर में महिलाओं ने मांग की थी कि होली पर उन्हें भी एक समान रंग खेलने का मौका मिलना चाहिए। महिलाओं का कहना था कि पुरुषों के लिए तो भगवान के दरबार होली पर सभी जगह खुले रहते हैं, लेकिन पुरुषों के सामने महिलाएं होली नहीं खेल पाती थीं। इसलिए मंदिर के पंडितों और बुजुर्गों ने फैसला किया कि रंग पंचमी के दिन मंदिर में केवल महिलाएं ही आएंगी और होली खेलेंगी। उसके बाद से महिलाएं रंग पंचमी को भगवान श्रीकृष्ण के साथ होली खेलने के लिए मंदिर आती हैं, ये परंपरा 46 साल पहले शुरू हुई थी, जो आज भी जारी है। इस आयोजन में महिलाएं, बेटियां पूरी तरह से कृष्ण भक्ति में लीन होकर रंग खेलती हैं और गीतों का आनंद लेती हैं।
होली के दिन जहां पुरुष होली खेलते हैं, तो जहां रंगपंचमी पर केवल महिलाओं को ही मंदिर के अंदर प्रवेश दिया जाता है। पुरुषों की नो एंट्री होती है। हालांकि, व्यवस्था बनाने वाले एक-दो पुरुष ही मंदिर परिसर में रुकते हैं। इस दिन पुरुष शाम को आरती होने के बाद ही बिहारी जी के दर्शन कर सकते हैं। इस इलाके को मिनी वृंदावन के नाम से भी जाना जाता है।
Updated on:
29 Mar 2024 05:03 pm
Published on:
29 Mar 2024 04:27 pm
बड़ी खबरें
View Allसागर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
