
सागर. मेहर गांव में डायरिया से एक की मौत और 300 से अधिक लोगों के बीमार होने के बाद गांव में सन्नाटा पसरा है। दो मोहल्ले पूरे खाली हो गए हैं। जो बचे हैं वह दहशत में हैं। शनिवार को 58 और लोग बीमार हुए जिनमें से 5 को सागर रेफर किया गया। लोग बीमारी का प्रमुख कारण गांव के बाहर मौजूद शराब फैक्ट्री के काले धुआं को बता रहे हैं, जबकि स्वास्थ्य विभाग को जल प्रदूषण से बीमारी फैलने की आशंका है।जिस बोरवेल के पानी को बीमारी फैलने के लिए जिम्मेदार बताया जा रहा था शनिवार को पीएचई ने पानी की जांच सामान्य बताई है। वहीं पानी की बैक्टीरियल और मरीजों के मल की जांच मेडिकल कॉलेज की टीम ने की है, जिसकी पुख्ता रिपोर्ट रविवार को आएगी।
बोरवेल नदी की तरफ हल्की ढलान में है, बोरवेल से 20 फीट ऊपर सीवरेज का एक टैंक बना हुआ है। टैंक में एक मोहल्ले की नालियों से गंदा पानी आकर जमा होता है। आशंका है कि यही पानी जमीन से 20 फीट नीचे रिसकर बोरवेल में जा सकता है। 4 बाय 4 फीट टैंक में पानी तो सूख गया लेकिन गंदगी अभी भी जमा है।
शराब फैक्ट्री गांव के एक किमी दूर है, विपरीत दिशा में है। फैक्ट्री की गंदगी यदि नदी में मिल भी रही है तो गांव तक गंदगी पहुंचने की आशंका कम है। लेकिन फैक्ट्री की चिमनी का काला धुआं और शराब बनाने में इस्तेमाल सड़े हुए कच्चे माल की गंध हवा के रुख के साथ गांव पहुंचती है। लोग काली धूल घरों पर जमने की बात कह रहे हैं। प्रत्येक घर में लोगों की आंखें लाल हो रहीं हैं, फैक्ट्री के आसपास बड़ी-बड़ी मक्खियां और मच्छर हैं।
गांव के लोगों की मानें तो सागर शहर का गटर का पूरा पानी नदी में बहकर आ रहा है। बारिश के बाद पहली बार नदी में पानी आया तो स्थानीय लोगों के नहाने और अन्य कार्य के लिए इस्तेमाल किया। नदी में मछलियां भी पकड़ीं और कई लोगों ने खाईं। जिन दो मोहल्लों में डायरिया का ज्यादा प्रकोप है वहीं नदी का किनारा है। दो घाट बने हुए हैं जहां नदी के पानी का इस्तेमाल लोग करते हैं।
-4-5 साल पहले शराब फैक्ट्री दोबारा शुरू होना बताया जा रहा।
-95 प्रतिशत लोग शराब फैक्ट्री को बता रहे बीमारी का जिम्मेदार।
-शराब फैक्ट्री में डस्ट रोकने और दूषित पानी को भाप बनाने के सिस्टम की जांच की मांग।
-डॉक्टर अंजली वीरानी की मानें तो लाल आखों के लिए लोग डॉक्टर्स को दिखाएं।
-नदी किनारे के दो मोहल्ले वीरान हो गए।
-बच्चे-महिलाएं मुंह पर कपड़ा और मास्क बांधकर निकल रहे।
-गांव में अधिकारियों-कर्मचारियों सहित जनप्रतिनिधि पहुंच रहे।
-तालाब से मछली पकडकऱ खाने की बात भी आ रही सामने।-लैब प्रभारी डॉक्टर सुमित रावत ने कहा कि सैंपल में हैजा के लिए जिम्मेदार विब्रियाे कोलेरा जीवाणु हो सकता है, पुख्ता रिपोर्ट रविवार-सोमवार को आएगी
-सीएमएचओ ममता तिमोरी शनिवार को भी मौके पर रहीं।-जनपद सीइओ राहत और पीएचई के अधिकारी कर्मचारी मौके पर रहे।
-एक किमी दूर पानी की व्यवस्था की गई, लोग पेयजल के लिए परेशान दिखे
5600 गांव की आबादी
300 से अधिक बीमार
1 की मौत
20 से अधिक गंभीर
58 नए मरीज आए
इधर पीएचई ने पानी की फिजीकल जांच रिपोर्ट में बताया है कि जिस बोरवेल को हैजा फैलने के लिए जिम्मेदार बताया जा रहा था उसकी जांच सामान्य आई है। जांच रिपोर्ट सामान्य आने पर स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि पीएचई ने पानी की फिजीकल जांच की है, बैक्टीरियल जांच की जाए तो स्थिति स्पष्ट होगी।
-ग्रामीण धीरे-धीरे स्वस्थ हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार मॉनीटरिंग कर रही है। बोरिंग की जांच रिपोर्ट आ गई है, जिसमें सब सामान्य रहा है। वैकल्पिक व्यवस्था के तहत अभी टैंकर से पेयजल उपलब्ध करा रहे हैं, साथ ही वहां के अन्य जल स्त्रोत का भी ट्रीटमेंट कराया है।
मेहर गांव से आज सैंपल मुझे मिला है, एक दो दिन में जांच रिपोर्ट आ जाएगी। जहां तक पॉल्यूशन स्तर जांचने की बात है, तो फैक्ट्री की जांच नियमानुसार समय-समय पर होती है।
केसी सोनी, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण।
-पीएचई ने पानी की कौनसी जांच की मुझे नहीं पता लेकिन हमने पानी की बैक्टीरियल जांच कराई है, सोमवार को उसकी रिपोर्ट आएगी। अभी हमारा फोकस मरीजों की देखरेख और उन्हें जरूरी उपचार मुहैया कराना है। खान-पान के कारण ही हैजा फैलने की संभावना है।भर्ती मरीजों की देखभाल के निर्देश दिए गए हैं।
डॉ. ज्योति चौहान, क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं।
Published on:
07 Jul 2024 11:37 am
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