2 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

2100 करोड़ से सागर समेत प्रदेश के तीन जिलों में बनेंगे 400 केवी के सबस्टेशन

व्यापक ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर कार्ययोजना तैयार की गई

2 min read
Google source verification
400 KV substation in three districts of the state including Sagar

400 KV substation in three districts of the state including Sagar

मधुर तिवारी
सागर. आगामी पांच साल में प्रदेश में 4925 मेगावॉट की नवकरणीय विद्युत परियोजनाएं स्थापित कर दी जाएंगी। इनमें सोलर विद्युत परियोजना से 3105 और नान-सोलर से 1820 मेगावॉट बिजली उत्पादन होने का अनुमान है। परियोजना में वर्तमान में 400 केवी के तीन और 220 केवी के छह उपकेन्द्र व लगभग 1838 सर्किट किमी लाइनों का निर्माण शुरू कर दिया गया है।
अच्छी बात यह है कि प्रदेश में इस कॉरिडोर के पहले चरण में शामिल किए गए तीन जिलों में सागर भी है। जहां ४०० केवी सबस्टेशन बनेगा। सागर में इस सबस्टेशन के निर्माण के साथ ही वॉल्टेज की समस्या समाप्त हो जाएंगी। क्योंकि वर्तमान में सागर में २२० केवी से ज्यादा क्षमता का सबस्टेशन नहीं है।
यहां बनेगे नए सबस्टेशन
पहले चरण में 400 केवी के तीन सब स्टेशन का निर्माण किया जाना है, जिसमें सागर, मंदसौर व उज्जैन जिले को शामिल किया गया है। कार्य-योजना में 220 केवी के सात सब स्टेशन भी बनाए जाएंगे जो सेंधवा, जावरा, गुडग़ांव, कानवन, रतनगढ़, नलखेड़ा और सैलाना में बनाने की मंजूरी मिली है। इसी तरह 220 केवी की एक हजार 196 सर्किट किलोमीटर ट्रांसमिशन लाइन का नया नेटवर्क तैयार किया जाएगा। साथ ही 132 केवी की 956 सर्किट किलोमीटर ट्रांसमिशन लाइनों के नए नेटवर्क के साथ 132 केवी का एक अतिरिक्त ट्रांसफार्मर भी स्थापित किया जायगा।
जर्मनी की बैंक देगी सॉफ्ट लोन
जर्मनी का केएफडब्ल्यू डेव्लपमेंट बैंक पहले चरण में परियोजना की अनुमानित लागत का 40 प्रतिशत अंश 840 करोड़ रुपए (124 मिलियन यूरो) सॉफ्ट लोन देगा। कंपनी को राष्ट्रीय स्वच्छ ऊर्जा निधि (एनसीईएफ.) नेशनल क्लीन एनर्जी फंड से 40 प्रतिशत अंश के रूप में 840 करोड़ रुपए का अनुदान मिलेगा। पहले चरण के लिए प्रदेश शासन द्वारा 20 प्रतिशत अंश के रूप में 420 करोड़ रुपए की राशि मिलेगी।
दो चरणों में होगा काम
ट्रांसमिशन सिस्टम सुदृढ़ीकरण का काम दो चरणों में पूरा करने की योजना बनाई गई है। पहले चरण को आगामी तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। कंपनी के अनुसार पहले चरण में संबद्ध नवकरणीय विद्युत परियोजनाओं की क्षमता लगभग 4100 मेगावॉट हो जाएगी। पहला चरण योजना वर्ष 2019-20 तक पूरा होने की संभावना है।