
आचार्य विद्यासागर द्वारा रचित मूकमाटी ग्रंथ पर देशभर के 55 शोधार्थियों ने किया शोध
सागर. 22 साल की उम्र में संन्यास लेकर दुनिया को सत्य-अहिंसा का पाठ पढ़ाने वाले आचार्यश्री विद्यासागर महाराज की एक झलक पाने सैकड़ों लोग मीलों पैदल दौड़ पड़ते हैं। उनके प्रवचनों में धार्मिक व्याख्यान कम और ऐसे सूत्र ज्यादा होते हैं जो किसी भी व्यक्ति के जीवन को सफल बना सकते हैं। वे अकेले ऐसे संत है जिनके जीवित रहते हुए उन पर अब तक 55 पीएचडी हो चुकी हैं।
ये है उनका जीवन वृत्त
हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, बांग्ला, कन्नड़, मराठी आदि भाषाओं के जानकार विद्यासागरजी का बचपन भी आम बच्चों की तरह बीता। गिल्ली-डंडा, शतरंज आदि खेलना, चित्रकारी आदि का इन्हें भी बहुत शौक रहा। लेकिन जैसे-जैसे बड़े हुए आचार्यश्री का आध्यात्म की ओर रुझान बढ़ता गया। आचार्यश्री का बाल्यकाल का नाम विद्याधर था। कर्नाटक, बेलगांव के ग्राम सदलगा में 10 अक्टूबर 1946 को जन्मे आचार्यश्री ने कन्नड़ के माध्यम से हाई स्कूल तक शिक्षा ग्रहण की। इसके बाद वे वैराग्य की दिशा में आगे बढ़े और 30 जून 1968 को मुनि दीक्षा ली। आचार्य का पद उन्हें 22 नवंबर 1972 को मिला।
यह है मुनिश्री
१० अक्टूबर 1946 को कर्नाटक बेलगांव के ग्राम सदलगा में जन्म हुआ।
३० जून 1968 को मुनि दीक्षा ली।
२२ नवंबर 1972 को मिला आचार्य का पद
शोध के लिए छात्र पढ़ते हैं मूकमाटी
जैन दर्शन पर कई पुस्तकें लिखने के साथ ही वे कविता लेखन भी करते रहे। उन्होंने माटी को अपने महाकाव्य का विषय बनाया और मूक माटी नाम से एक खंडकाव्य की रचना की। भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा प्रकाशित उनकी यह पुस्तक बहुत लोकप्रिय हुई। विचारकों ने इसे एक दार्शनिक संत की आत्मा का संगीत कहा। इससे कई छात्र अपने शोध के लिए बतौर संदर्भ इसे उपयोग में ला रहे हैं। उनकी अन्य रचनाएं नर्मदा का नरम कंकर, डूबो मत लगाओ डुबकी आदि हैं।
ये है उनके बारे में खास
आचार्य संस्कृत सहित हिन्दी, मराठी और कन्नड़ सहित अन्य भाषाओं का भी ज्ञान रखते हैं।
गांव के स्कूल में मातृभाषा कन्नड़ में पढ़ाई शुरू की और कक्षा नवमी तक की शिक्षा प्राप्त की।
गणित के सूत्र हो या भूगोल के नक्शे विद्यासागर पलभर में सबकुछ याद कर लिया करते थे।
बचपन में शतरंज और गिल्ली-डंडा खेलना पसंद करते थे। इसके साथ ही उन्हें शिक्षाप्रद फिल्में देखना व मंदिर जाना भी बेहद पसंद था।
विद्यासागर 20 वर्ष की उम्र में आचार्य देशभूषण महाराज से मिलने जयपुर पहुंचे थे।
22 वर्ष की आयु में आचार्य ज्ञानसागर नेविद्यासागर को संत होने की दीक्षा दी।
उनके कार्य में निरंजना शतक, भावना शतक, परिषद जाया शतक, सुनीति शतक और शरमाना शतक शामिल हैं।
पीएचडी: संस्कृत शतक परंपरा और आचार्य के शतक-डॉ. आशालता मलैया
संस्कृत काव्य के विकास में 20वीं शदी में जैन: डॉ. नरेन्द्रसिंह राजपूत
मुनियों का योगदान: हिन्दी साहित्य की संत काव्य परम्परा के परिप्रेक्ष्य में आचार्य विद्यासागर के कृतित्व का अनुशीलन- डॉ. बारेलाल जैन
जैन दर्शन के संदर्भ में मुनि विद्यासागर के - डॉ. किरण जैन
साहित्य का अनुशीलन- आचार्य विद्यासागर व्यक्तिव एवं काव्यकला - डॉ. माया जैन र्
विद्यासागरकृत मूकमाटी का सांस्कृति अनुशीलन - डॉ.चंद्रकुमार जैन
जैन विषय वस्तु के संबद्ध आधुनिक महाकाव्यों में सामाजिक चेतना - डॉ. सुशीला सालगिया।
कामायनी और मूकमाटी महाकाव्य का काव्यशास्त्रीय अध्यन - डॉ. संजय कुमार मिश्र
आचार्यश्री विद्यासागर की लोक दृष्टि - डॉ. सुनिता दुबे
मूकमाटी का शैलीपरक अनुशीलन- डॉ. मीना जैन
हिन्दी महाकाव्य परम्परा में मूकमाटी का अनुशीलन - डॉ. मीना जैन।
आचार्य विद्यासागर के साहित्य में जीवन मूल्य - निधि गुप्ता
संत कवि आचार्य विद्यासागर की साहित्य साधना - डॉ. राजश्री जैन
आचार्य विद्यासागर के शैक्षिक विकास - डॉ. सपना जैन
भक्तिकाव्य के मूल्य, विद्यासागर का काव्य - डॉ. शीलिनी गुप्ता
आचार्यश्री के साहित्य एवं भगवद् गीता तुलनात्मक अध्यन - डॉ. सुधीरकुमार जैन
हिन्दी काव्य के विकास में आचार्यश्री का योगदान - डॉ. प्रशांत कुमार जैन
आचार्यश्री पर केंद्रित शोधग्रंथों का अनुशीलन - डॉ. रामशंकर दीक्षित
आचार्यश्री का दार्शनिक चिंतन - डॉ. साधना सेठी
मूकमाटी के विचार - डॉ. सुदाणी
डीलिट्: मूकमाटी : चेतना के स्वर डॉ. भागचंद्र जैन। महामनीषी आचार्यश्री विद्यासागर : डॉ. विमलकुमार जैन
एमफिल: मूकमाटी महाकाव्य में रसो एवं बिम्बो का अनुशीलन - डॉ. संजयकुमार मिश्र। आचार्यश्री के काव्यों का अनुशीलन - कृष्णा पटैल। पच्चसवीं का साहित्य का मूल्यांकन - सुशीला यादव। आचार्य के दोहा-दोहन एक अनुशीलन- सुनीता देवी मिश्र। चेतना गहराव में आचार्यश्री का काव्य चिंतन - विभा तिवारी। आचार्यश्री के काव्य में राष्ट्रीय चेतना - प्रियंका बौध्द। आचार्यश्री की अनूदिक रचनाओं का अनुशीलन - संजयकुमार
एमएड: आचार्यश्री के व्यक्तित्व एवं शैक्षिक विचारों का अध्यन - सारिका जैन।
कृति मूकमाटी का अनुशीलन - प्रतिभा जैन, कल्पना जैन, रमेशचन्द्र मिश्रा, नरेशचंद्र गोयल, आदित्य कुमार वर्मा
Published on:
31 Jan 2019 11:24 am
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