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मनमानी: सोलह पुस्तकों में सिर्फ तीन एनसीइआरटी की और तेरह निजी पब्लिकेशन की

गाइडलाइन की उड़ रही धज्जियां, अधिकारी बने अंजान, एक भी स्कूल या स्टेशनरी की नहीं हुई जांच, जिससे अभिभावकों पर पड़ रहा आर्थिक बोझ, बच्चों को पढ़ाना हो रहा मुश्किल

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Out of sixteen books, only three are from NCERT and thirteen are from private publications.

फाइल फोटो। एआइ

बीना. शहर के बड़े स्कूल निजी पब्लिकेशन की किताबें चला रहा है और इनपर रोक नहीं लग पा रही है। यह सरकार की गाइडलाइन का भी पालन नहीं कर रहे हैं। सिर्फ दिखाबे के लिए कुछ पुस्तकें एनसीइआरटी की शामिल की जा रही हैं, जिससे अभिभावकों को कोई राहत नहीं है।
जानकारी के अनुसार सरकार एनसीइआरटी की पुस्तकें पढ़ाने पर जोर दे रही है, लेकिन यहां निजी स्कूल संचालक इसका पालन नहीं कर रहे हैं। यदि एनसीइआरटी की पुस्तकें पढ़ाई जाएं, तो अभिभावकों पर आर्थिक बोझ नहीं बढ़ेगा। शहर के एक बड़े निजी स्कूल में फस्र्ट क्लास की पुस्तकों के सेट में 16 पुस्तकें शामिल हैं, जिसमें सिर्फ तीन एनसीइआरटी की हैं, बाकी निजी प्रकाशन की। इसके बाद भी इस ओर शिक्षा विभाग के अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं। यह स्थिति एक स्कूल की नहीं, बल्कि शहर के लगभग सभी स्कूलों की है।

महंगी किताबों का बोझ
अभिभावकों का कहना है कि एनसीइआरटी की तुलना में निजी पब्लिकेशन की किताबें कई गुना महंगी हैं, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों पर सीधा असर पड़ रहा है और बच्चों को पढ़ाना मुश्किल हो रहा है। इसके बाद भी अधिकारी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं, जिससे स्कूल संचालकों के हौसले बुलंद हैं और मनमानी जारी है।

ज्यादा कमाई के चक्कर बढ़ रहा बैग का बोझ
पुस्तकों पर ज्यादा से ज्यादा कमाई करने के चक्कर में स्कूल संचालक ज्यादा पुस्तकें खरीदने का दबाव बनाते हैं। कुछ पुस्तकें ऐसी भी शामिल की जाती हैं, जिनकी जरूरत भी नहीं है। पुस्तकों की संख्या ज्यादा होने से बैग का वजन बढ़ रहा है। बैग का वजन बढ़ने से बच्चों के स्वास्थ्य पर भी प्रभाव पड़ता है। इसके बाद भी जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

कांग्रेस कर चुकी है प्रदर्शन
निजी स्कूलों की महंगी पुस्तक, गणवेश के खिलाफ कांग्रेस ने पिछले दिनों प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा था, लेकिन अभी तक इसका कोई असर नहीं दिख रहा है। इस संबंध में कार्रवाई न होने पर अभिभावकों में आक्रोश भी बढ़ रहा है। कांग्रेस ने चेतावनी दी थी कि कार्रवाई न होने पर स्कूलों के सामने प्रदर्शन करेंगे।