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खरीफ फसल की बोवनी के पहले महंगा हुआ सोयाबीन, डीजल के बढ़े दामों ने भी बढ़ाई किसानों की चिंता

बढ़ेगी खेती की लागत, किसानों ने कहा फसल आने पर कम जाते हैं दाम और बोवनी के समय वही उपज मिलती है दो से तीन गुना दामों पर अधिक

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Soybean prices have risen ahead of Kharif sowing, and rising diesel prices have also added to farmers' worries

फाइल फोटो

बीना. खरीफ फसल की बोवनी का समय नजदीक आते ही किसानों की चिंता बढऩे लगी है। मंडियों में सोयाबीन के दामों में अचानक तेजी आने से किसानों को बीज महंगे दामों पर खरीदना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार मंडी में पिछले कुछ दिनों से सोयाबीन के दामों में इजाफा हुआ है और सामान्य सोयाबीन के दाम 6000 से 7000 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं। वहीं, बोवनी के लिए अच्छा बीज 9 से 10 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक मिल रहा है। किसानों का कहना है कि पहले लगातार सोयाबीन के दाम कम बने रहने से उन्होंने मजबूरी में अपनी उपज कम कीमत पर बेच दी थी। उस समय मंडियों में किसानों को लागत के अनुसार उचित दाम नहीं मिल पाए थे। भंडारण की कमी और जरूरतों के चलते किसानों ने 4 से 5 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक सोयाबीन बेचा था। अब बोवनी का समय आया है, तो उसी सोयाबीन के दाम बढऩे लगे हैं, जिससे किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। किसानों को सरकारी बीज भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराया जाता है। यदि सरकारी बीज पर्याप्त मिले, तो उसप किसानों को अनुदान मिलता है, जिससे बाजार की अपेक्षा कम दाम चुकाने पड़ते हैं। साथ ही यह बीज प्रमाणित भी होता है।

डीजल के दामों में भी हुई वृद्धि
डीजल के दामों में भी पिछले दिनों वृद्धि हुई है। 12 दिन पूर्व डीजल 91.91 रुपए लीटर था, जो अब 99.56 रुपए लीटर हो गया है। डीजल के दाम बढऩे से कृषि की लागत बढ़ेगी। जो छोटे किसान किराए पर ट्रैक्टर लेकर बखरनी, बोवनी कराते हैं, उन्हें ज्यादा रुपए चुकाने पड़ेंगे। किसानों का कहना है कि पहले ही खाद, बीज और कीटनाशक महंगे हो चुके हैं, अब डीजल महंगा होने से खेती करना और कठिन हो जाएगा।

किसानों को भी मिलें उचित दाम
किसान नेता अरविंद सिंह ने बताया कि बोवनी के समय उपज के दाम बढ़ा दिए जाते हैं और फसल आने पर जब किसान उपज बेचने मंडी पहुंचते, तो दाम कम हो जाते हैं, जिसके चलते किसानों की लागत भी नहीं निकल पाती है। किसानों को भी उनकी लागत के अनुसार उचित दाम मिलने चाहिए।