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बालस्वरूप भगवान परशुराम की मोहक प्रतिमा की झलक पाने आतुर दिखे श्रद्धालु

भगवान परशुराम प्रकटोत्सव पर जयघोष के साथ बड़ा बाजार रामबाग मंदिर से चल समारोह निकाला गया। पालकी में सवार डेढ़ फीट के भगवान परशुराम के बालस्वरूप की प्रतिमा की मोहक झलक पाने श्रद्धालु आतुर दिखे। भगवान के दर्शन पाकर भक्त निहाल हुए। शोभायात्रा में 8 फीट ऊंची झांकी भी विशेष आकर्षण रही।भगवान परशुराम की प्रतिमा […]

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सागर

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Rizwan ansari

Apr 21, 2026

भगवान परशुराम प्रकटोत्सव पर जयघोष के साथ बड़ा बाजार रामबाग मंदिर से चल समारोह निकाला गया। पालकी में सवार डेढ़ फीट के भगवान परशुराम के बालस्वरूप की प्रतिमा की मोहक झलक पाने श्रद्धालु आतुर दिखे। भगवान के दर्शन पाकर भक्त निहाल हुए। शोभायात्रा में 8 फीट ऊंची झांकी भी विशेष आकर्षण रही।
भगवान परशुराम की प्रतिमा फूलों से सुसज्जित वाहन में रखी हुई चल रही थी। इसमें मेरठ के कलाकारों का नृत्य दल साथ था। असुरों का संहार करने वाली महाकाली का विकराल स्वरूप रौंगटे खड़े कर देने वाला था। वहीं काशी के शिव तांडव दल की प्रस्तुति भाव जागृत कर रही थी।

तीन बत्ती पर की गई आकर्षण आतिशबाजी, लगाए गए जयकारे

शोभा यात्रा तीन बत्ती पर पहुंची तो जोरदार आतिशबाजी से आसमान रंगीन हो गया। तीन बत्ती क्षेत्र जय श्रीराम व जय परशुराम के जय घोषों से गूंज उठा। शोभा यात्रा में शामिल 2 रीछ भी आकर्षण का केंद्र रहे। बड़ा बाजार से लेकर कटरा बाजार तक सडक़ के दोनों ओर शोभा यात्रा देखने लोगों की भीड़ लगी रही। पद्माकर स्कूल में शोभा यात्रा का समापन हुआ।

2.5 किमी यात्रा का जगह-जगह हुआ स्वागत

पालकी में बाल स्वरूप में नगर भ्रमण पर निकले भगवान परशुराम शोभायात्रा में उनके पीछे कलाकार मां महाकाली का वेश धारण कर नृत्य की प्रस्तुति देते चल रहे थे। भगवान परशुराम की प्रतिमा व जीवंत झांकी और भगवान का विशाल स्वरूप सबसे पीछे चल रहा था। 2.5 किमी की शोभा यात्रा का जगह-जगह पुष्पवर्षा से स्वागत हुआ। शोभायात्रा में विप्र महिला-पुरुष पीले वस्त्रों में शामिल हुए।

घरों की छतों से भी हुई आतिशबाजी

तीनबत्ती पर आतिशबाजी का प्रदर्शन हुआ। इसके अलावा आसपास मौजूद घरों की छतों से भी आतिशबाजी की गई। शोभायात्रा में सर्व ब्राह्मण समाज संगठन के पदाधिकारी सहित अन्य समाज के लोग भी शामिल हुए। अंत में नमक मंडी स्थित पद्माकर स्कूल में विधि-विधान से आरती के पश्चात शोभा यात्रा का समापन हुआ। पूरे आयोजन में श्रद्धा, उत्साह और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम देखने को मिला।