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हर माह 60 लाख खर्चा; न ट्रीटेड वाटर बेच पाए और न शहर से वसूल पाए सीवर चार्ज

277 करोड़ के सीवर प्रोजेक्ट के बाद भी शहर के अपशिष्ट (सीवेज) जल की समस्या बनी हुई है। पथरिया हाट में जो सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया गया है, उसका संचालन ही सागर नगर निगम की हालत बिगाड़ रहा है। इसके संचालन में हर माह 60 लाख रुपए खर्च आ रहा है, जबकि इसके ट्रीटेड […]

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सागर

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Rizwan ansari

Apr 21, 2026

277 करोड़ के सीवर प्रोजेक्ट के बाद भी शहर के अपशिष्ट (सीवेज) जल की समस्या बनी हुई है। पथरिया हाट में जो सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया गया है, उसका संचालन ही सागर नगर निगम की हालत बिगाड़ रहा है। इसके संचालन में हर माह 60 लाख रुपए खर्च आ रहा है, जबकि इसके ट्रीटेड वाटर को इंडस्ट्रीज को बेचकर कमाई का सपना अधूरा पड़ा है। निगम घरों से सीवर कनेक्शन का शुल्क वसूलना तो दूर उसके बिल भी नहीं भेज पाया है, इसलिए अब प्लांट संचालन का खर्च भारी पड़ रहा है।
दरअसल नगर निगम ने इस घाटे की भरपाई के लिए सीवेज के पानी को ट्रीटमेंट प्लांट ले जाकर उसे दोबारा उपयोग लायक बनाने और फिर उसे इंडस्ट्रीज को बेचने का प्रस्ताव बनाया था। सागर में रीजनल कॉन्क्लेव के दौरान इस प्रस्ताव पर में एमपीआइडीसी से अनुबंध भी हो गया, लेकिन फिलहाल उद्योगों को ट्रीटेड वाटर सप्लाई का सपना अधूरा ही पड़ा है।

30 लाख का तो सिर्फ बिजली बिल आ रहा

शहर के करीब 28500 घरों से निकलने वाले सीवरेज के पानी को बस स्टैंड, शीतला माता मंदिर, रेलवे स्टेशन के पास और पगारा में 4 पंपिंग स्टेशन के माध्यम से गंदा पानी धकेलकर पथरिया हाट स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचा जा रहा है। चारों पंपिंग स्टेशन और पथरिया स्थित 43 एमएलडी क्षमता का एसटीपी चलाने में भारी भरकम बिजली बिल आ रहा है। पानी साफ करने क्लोरीन की खरीदी व जांच के लिए लैबोरेटरी संचालन में भी हर माह मोटी रकम खर्च हो रही है। पूरे प्रोजेक्ट के संचालन में करीब 60 लाख रुपए खर्च हो रहे हैं, जिसमें से बिजली बिल ही 30 लाख का आ जाता है।

कोशिशें नाकाम…आधा पानी ही पहुंच पा रहा है प्लांट तक

सीवर का कार्य कर रही कंपनी ने अभी चारों पंपिंग स्टेशन क्षेत्र में हाउस कनेक्शन का कार्य पूरा नहीं किया है, करीब 60173 हाउस कनेक्शन का टारगेट था लेकिन अभी आधे कनेक्शन ही हो पाए हैं। एसटीपी प्लांट की क्षमता 43 एमएलडी की है और मात्र 25-27 एमएलडी पानी ही पहुंच रहा है, जिसे साफ करके रोज नदी में बहाया जा रहा है।

सपना ही रह गया… सिद्गुवां में इंडस्ट्री को नहीं बेच पा रहे पानी

सागर में हुए रीजनल कॉन्क्लेव में नगर निगम ने एमपीआइडीसी (मप्र इंडस्ट्रियल कॉर्पोरेशन) से अनुबंध किया था। सीवर के 10 एमएलडी (मिलियन लीटर) पानी को साफ करके एसटीपी पथरिया से सिद्गुवां औद्योगिक क्षेत्र में देना है। एसटीपी से अनुबंध से 3 गुना ज्यादा पानी निकल रहा है] लेकिन औद्योगिक क्षेत्र तक भेजने की व्यवस्था नहीं बनी है, हालांकि एमपीआइडीसी ने करीब 15 करोड़ रुपए से पथरिया हाट तक पाइप लाइन बिछाने व सिस्टम तैयार करने की योजना बनाई है, जो अभी मूर्त रूप नहीं ले पाई।

आर्थिक बोझ पड़ा इसलिए जनहित के कार्य प्रभावित

बिजली बिल न भरने के कारण नगर निगम की चुंगी क्षतिपूर्ति राशि 2 करोड़ रुपए सीधे भोपाल से कट रही है। वहीं राजस्व अमला जलकर, संपत्तिकर व दुकानों का किराया भी नहीं वसूल पा रहा है। ऐसे में शहर में जनहित के कार्य प्रभावित हो रहे हैं। शहर में कई वार्डों में स्ट्रीट लाइट लगाने व भवनों की मरम्मत के लिए निगम के पास बजट नहीं है, वहीं निगम में खर्चों की लिस्ट बेहद लंबी है।

फैक्ट फाइल

299.77 करोड़ की योजना की लागत
60 लाख रुपए माह प्रोजेक्ट संचालन में हो रहा खर्च
43 एमएलडी क्षमता का एसटीपी प्लांट
277.79 करोड़ अब तक खर्च
221 किमी सीवर नेटवर्क बिछाया।
4 पंपिंग स्टेशन पर 28500 कनेक्शन
25-27 एमएलडी पानी ही एसटीपी प्लांट पहुंच रहा

रीजनल कॉन्क्लेव में हुए अनुबंध अनुसार हम एमपीआइडीसी को ट्रीटेड वाटर देने तैयार हैं, लेकिन अभी उनकी लाइन नहीं बिछाई गई है। सीवर कर का निर्णय हो गया है, सीवर कर की वसूली भी की जाएगी।
राजकुमार खत्री, निगमायुक्त।