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अंध, मूक-बधिर स्कूल में छात्रों को नहीं मिली पुस्तकें, पलंग और चादरों की ये है स्थिति

छात्रावास और स्कूल में बुनियादी सुविधाओं की कमी

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Books not found in blind mute deaf schools disorder

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सागर. पंडापुरा स्थित अंध, मूक-बधिर स्कूल में अध्ययनरत दिव्यांग छात्र सुविधाओं के अभाव में परेशान हैं। नया सत्र शुरू के बाद से अभी तक ज्यादातर पुस्तकें नहीं मिली हैं। बे्रल लिपि सिखाने के लिए शिक्षक ही नहीं है। 230 दिव्यांग बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। 180 बच्चे छात्रावास में रहते हैं। यहां एक साल से चादर तक नहीं धुले हैं। पत्रिका टीम ने शुक्रवार को स्कूल पहुंचकर दिव्यांगों की परेशानियों को जाना।
स्कूल में दो माह से कक्षाएं लग रही हैं, लेकिन यहां पढ़ाई के लिए पुस्तकें और पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं है। कक्षा ६वीं से १२वीं तक पढ़ाने के लिए मात्र 3 शिक्षक हैं। एक ही कक्षा में मूक और नेत्रहीन बच्चों को बिठाकर पढ़ाया जाता है। हर वर्ष यहां कक्षाएं सुचारू रूप से संचालित करने के लिए अतिथि शिक्षक आ जाते हैं, लेकिन इस वर्ष एक भी अतिथि शिक्षक नहीं आया। स्कूल प्रबंधन ने अतिथि शिक्षकों की फाइल अब तक शिक्षा विभाग को नहीं भेजी है। यहां ब्रेल लिपि के कोई संसाधन नहीं हैं। इसकी शिकायत दिव्यांग स्वयं कई बार प्रशासन से कर चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। दिव्यांगों के पास यूनिफॉर्म भी नहीं है। छात्रावास में रह रहे दिव्यांगों की पुराने सत्र की यूनिफॉर्म १ साल से धुली नहीं है। जिस पलंग पर सोते हैं वे बिस्तर भी नहीं धुले हें। यहां कपडों की धुलाई के लिए टेंडर निकाला जाता है। दिव्यांगों के कपड़े धुलने वाले माखनलाल रजक को पिछले वर्ष के पैसे नहीं दिए गए और इस वर्ष कपड़ों की धुलाई के लिए टेंडर ही नहीं निकाला गया। शहर में रह रहे विद्यार्थियों को स्कूल तक पहुंचने के लिए टैक्सी लगाई जानी चाहिए। ताकि दिव्यांग आसानी से स्कूल पहुंच सकें और नियमित स्कूल आएं।

विद्यार्थियों को मिल रही नाम काटने की धमकी
इस बार हमें पुस्तकें नहीं मिली। छात्रावास में रहने जगह नहीं है। दो माह से कक्षाएं नहीं लग रही हैं। यदि हम वार्डन से शिकायत करते हैं तो नाम काटने की धमकी दी जाती है।
पुष्पेंद्र अहिवार
छात्रावास में आए दिन पानी की समस्या रहती है, अभी भी पानी नहीं है। स्कूल प्रबंधन बोरिंग कराकर यह समस्या दूर कर सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।
राहुल अहिरवार
कक्षा दसवीं में मैंने अपनी मेहनत से मैरिट में स्थान बनाया। वर्षों से हम ब्रेल लिपि के शिक्षक की मांग कर रहे हैं । स्कूल में जो शिक्षक हैं उन्हें ब्रेल लिपी भी नहीं आती है।
प्रहलाद दांगी


पुस्तकें नहीं आई
पुस्तकें और शिक्षकों की मांग प्रशासन से की गई है, लेकिन पुस्तकें स्कूल में नहीं आई हैं। जल्द ही बच्चों को पुस्तकें दी जाएगी।
बालादीन अहिरवार, प्राचार्य


स्कूल में शिक्षकों की नियुक्ति और पुस्तकों के मामले में प्राचार्य से शुक्रवार को ही बात हुई। जल्द ही नियुक्ति हो जाएगी, इसके अलावा कपड़े और टैक्सी के टेंडर की भी प्रक्रिया शुरू हो गई है। कुछ पुस्तकें शिक्षा विभाग से दी गई हैं।
राजेश राय, जेडी, सामाजिक न्याय विभाग