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सागर. बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में बॉयज हॉस्टल में रहने वाले छात्र हॉस्टल छोडऩे के लिए मजबूर हो रहे हैं। इसका कारण हॉस्टल में चोक पड़ी टॉयलेट हैं। ग्राउंड फ्लोर पर बनी टॉयलेट की हालत एेसी हैं, जिनका कोई भी छात्र उपयोग करना नहीं चाहता है। बदूब और सालों से सफाई नहीं होने के कारण इनकी हालत बद से बदतर हो चुकी है। हैरानी की बात यह है कि हाइट्स कंपनी इनकी साफ-सफाई के काम के लिए करोड़ों रुपए सालाना ले रही है। बावजूद इसके छात्र निस्तार के लिए परेशान हो रहे हैं। यह स्थिति अभी से नहीं है, बल्कि जब से मेडिकल कॉलेज बना है तब से है।
एक रुपए भी खर्च नहीं किया
छात्रों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेने वाले छात्रों से प्रबंधन हॉस्टल में रहने का किराया वसूलता है। यह १० हजार रुपए तय है। हॉस्टल में करीब 200 से ज्यादा छात्र रहते हैं। एेसे में छात्रों से प्रबंधन को हर साल २० लाख रुपए की आय होती है।
9 साल से मेंटेनेंस ही नहीं
हॉस्टल बनने के बाद से अभी तक बिल्डिंग का मेंटेनेंस नहीं हुआ है।
प्रबंधन ने पिछले माह मेंटेनेंस का काम पीडब्ल्यूडी को सौंपा था।
पीडब्ल्यूडी ने भी अभी तक काम शुरू नहीं किया है।
टॉयलेट चोक होने की मुख्य वजह ड्रेनेज सिस्टम फेल होना है।
पढ़ाई नहीं कर पाते छात्र
टॉयलेट साफ नहीं होने से बदबू इतनी होती है कि कमरे में बैठकर छात्र पढ़ाई तक नहीं कर पाते हैं। कंपनी ने सफाई व्यवस्था के लिए 90 कर्मचारी लगाए हैं, लेकिन हॉस्टल में कोई भी कर्मचारी सफाई करने नहीं जाता है। छात्रों ने इस संबंध में कई बार प्रबंधन को अवगत कराया है, लेकिन बावजूद इसके प्रबंधन ध्यान नहीं दे रहा है।
200 छात्रों के बीच महज चार टॉयलेट
ग्राउंड तल, प्रथम, और द्वितीय तल पर अलग-अलग टॉयलेट बने हुए हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश अनुपयोगी बने हुए हैं। मात्र प्रथम तल और दूसरे तल पर कुछ टॉयलेट सही हालत में हैं। इसका उपयोग करीब 200 छात्र कर रहे हैं। कई तो अपने दोस्तों के घरों पर जाकर निस्तार करने मजबूर हैं।
मेंटेनेंस का काम लोक निर्माण विभाग को दिया गया है। ड्रेनेज सिस्टम में सुधार होना है। जहां तक गंदगी की बात है तो कंपनी के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
जीएस पटेल, डीन, बीएमसी
Published on:
02 May 2018 07:08 am

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