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video: भाजपा के गढ़ में पच्चीस साल बाद मिली कांग्रेस को जीत

बीना विधानसभा चुनाव में वर्ष 1993 के बाद अब जीत मिली है, जिससे कार्यकर्ताओं में उत्साह है और सोमवार को भव्य विजयी जुलूस निकाला गया।

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मतदाताओं का आभार व्यक्त करते हुए निर्मला सप्रे

मतदाताओं का आभार व्यक्त करते हुए निर्मला सप्रे

बीना. भाजपा का गढ़ मानी जाने वाली बीना विधानसभा सीट पर इस चुनाव में उलटफेर हुआ है और कांग्रेस प्रत्याशी ने जीत हासिल की है। कांग्रेस के लिए यह बढ़ी जीत है, क्योंकि पच्चीस वर्ष से यहां भाजपा का कब्जा था। दो बार भाजपा के विधायक रहे महेश राय को कांगे्रस प्रत्याशी निर्मला ने पराजित किया है।

कांग्रेस प्रत्याशी ने 6155 वोट से जीत हासिल की है। निर्मला विधानसभा चुनाव 2013 में भाजपा प्रत्याशी महेश से हारी थीं। हार के बाद भी वह क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहीं और इस बार टिकट मिलने पर जीत हासिल की। कांग्रेस को ग्रामीण क्षेत्र से लीड मिलती थी, लेकिन इस बार शहर के वार्डों से भी कांग्रेस को बढ़त मिली है। इस जीत के पहले 1993 में प्रभुसिंह ने जीत हासिल की थी, लेकिन फिर लगातार हार का सामना करना पड़ा।

तीसरी बार जीतने का नहीं बन सका इतिहास

बीना विधानसभा का इतिहास रहा है कि कोई प्रत्याशी लगातार तीसरी बार नहीं जीता है और इस बार भी महेश राय की हार के बाद नया इतिहास नहीं बन सका है। विधानसभा से सुधाकर बापट और महेश राय ही लगातार दो बार जीते हैं।

बसपा की कमजोरी का मिला लाभ

बसपा प्रत्याशी राममेन्द्र अहिरवार को कुल 2072 वोट मिले हैं। बसपा का वोट बैंक कम होने से कांगे्रस को लाभ मिला है, क्योंकि बसपा द्वारा कांग्रेस के वोट बैंक में ही सेंध लगाई जाती है। वर्ष 2018 में भी 6896 मत ही मिले थे और जीत भाजपा को सिर्फ 460 मतों से जीत मिल सकी थी।

खुद का वार्ड नहीं बचा पाए विधायक

विधायक महेश राय शिवाजी वार्ड निवासी हैं, लेकिन वह खुद का वार्ड भी नहीं जीत पाए। दो पोलिंग पर कांग्रेस प्रत्याशी को 820 और भाजपा को 728 वोट मिले हैं। दो पोङ्क्षलग में से 115 पर भाजपा की जीत हुई, लेकिन दूसरी से हार मिली है।

कांग्रेस की नहीं हुई एक भी सभा

विधानसभा में इस बार का चुनाव कांग्रेस ने अलग तरीके से लड़ा है और एक भी सभा किसी स्टार प्रचारक या वरिष्ठ नेता की नहीं हुई है। जबकि भाजपा के स्टार प्रचारक प्रहलाद पटेल, राजनाथ सिंह की सभा हुईं थीं और अनुराग ठाकुर ने कार्यकर्ता सम्मेलन में भाग लिया था। कांगे्रस से सीधे जनता से संपर्क किया था।

यह प्रत्याशी रहे मैदान में

भाजपा, कांग्रेस के अलावा बसपा से रामेन्द्र अहिरवार मैदान में थे, जिन्हें 2072 वोट मिले, सपा से दीपक कुमार 402 वोट, जीवन निर्दलीय 133 वोट, दशरथ निर्दलीय 130 वोट, नीलेश ङ्क्षसह पवार निर्दलीय 337, रामसिंह चढ़ार निर्दलीय प्रत्याशी को 605 वोट मिले। वहीं, नोटा पर 1239 वोट पड़े।

विधानसभा का इतिहास

1957- रामलाल नायक

1962- भगीरथ, भारतीय जनसंघ

1964- एसएन मुशरान- कांग्रेस

1967- बीके पटैरिया, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

1972- डालचंद भगवानदास, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आई)

1977- भागीरथ बिलगैयां, जनता पार्टी

1980- अरविंद भाई, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आई)

1985- सुधाकर बापट, भारतीय जनता पार्टी

1990- सुधाकर बापट, भारतीय जनता पार्टी

1993- प्रभु सिंह ठाकुर, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आई)

1998- सुधाकर बापट, भारतीय जनता पार्टी

2003- सुशीला राकेश सिरोठिया, भारतीय जनता पार्टी

2008- डॉ. विनोद पंथी, भारतीय जनता पार्टी

2013- महेश राय, भारतीय जनता पार्टी

2018- महेश राय, भारतीय जनता पार्टी

2023- निर्मला सप्रे, कांग्रेस

IMAGE CREDIT: patrika

मुख्य मार्गों से निकाला जुलूस

सोमवार को श्री कटरा स्वामी मंदिर से विजयी जुलूस शुरू हुआ, जो आंबेडकर तिराहा, सर्वोदय चौराहा, गांधी तिराहा, बड़ी बजरिया, कच्चा रोड होते हुए इटावा पहुंचा। जुलूस के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी ने मतदाताओं का अभार भी व्यक्त किया। विजयी होने पर लोगों ने जगह-जगह स्वागत किया। निर्मला सप्रे ने कहा कि क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाना, बेरोजगारी खत्म करना सहित विकास की योजनाओं को धरातल पर लाना लक्ष्य है। साथ ही बीना को जिला बनाने का जो वादा किया है, उसे पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। प्रदेश में सरकार न होने के बाद भी पुरजोर तरीके से यह मांग उठाई जाएगी। जुलूस में सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल हुए।