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स्कूलों में बच्चों के सिर पर टपक रहा खतरा

60 स्कूलों के लिए मांगे एक करोड़, पर सरकार ने मरम्मत के नाम पर दिए सिर्फ छह लाख रुपए

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Danger looms over children's heads in schools

निवोदिया स्कूल भवन जो कभी भी धराशायी हो सकता है

बीना. ब्लॉक में दर्जनों स्कूल भवन ऐसे हैं, जहां बच्चों के सिर में खतरा मंडरा रहा है और बार-बार इनकी मरम्मत को लेकर स्थानीय अधिकारी मांग पत्र भेज चुके हैं, लेकिन फिर भी ध्यान नहीं दिया गया है। स्थिति यह है कि 60 स्कूल भवनों को मरम्मत की दरकार है और एक करोड़ रुपए की डिमांड भेजी थी, जिसमें सिर्फ छह लाख रुपए मिले हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्कूल के भवनों की स्थिति खराब है, लेकिन इनकी मरम्मत के लिए बजट नहीं मिल रहा है। इन भवनों में बैठने वाले बच्चों के सिर पर हमेशा खतरा मंडराता रहता है। यदि जर्जर छत का हिस्सा किसी बच्चे के सिर पर गिर जाए, तो जान भी जा सकती है, जिसमें साठ स्कूलों की स्थिति ज्यादा खराब है और इनकी मरम्मत के लिए करीब एक करोड़ रुपए के बजट की जरूरत है और डिमांड भी भेजी गई थी, लेकिन सिर्फ तीन भवनों की मरम्मत के लिए छह लाख रुपए मिले हैं, जो ऊंट में जीरा के बराबर हैं। जबकि कुछ भवनों की स्थिति ऐसी है कि वहां नए निर्माण की जरूरत है।

सात बार लिख चुके पत्र
स्थानीय अधिकारी स्कूल भवनों की मरम्मत के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को करीब सात बार पत्र भेज चुके हैं। पिछले एक वर्ष से यह क्रम जारी है। स्कूल भवनों की स्थिति से सभी को अवगत कराया गया है, लेकिन फिर भी कोई ध्यान नहीं दिया गया है। इन पत्रों के अलावा भी लगातार जानकारी भेजी जाती है।

पांच बार भेजी जा चुकी है डिमांड
जनपद शिक्षा केन्द्र से करीब पांच बार भवन मरम्मत के लिए डिमांड भेजी जा चुकी है। कुछ माह में पहले ही 60 स्कूलों की मरम्मत के लिए करीब एक करोड़ की डिमांड भेजी थी, जिसमें किसी भवन के लिए दो लाख रुपए, तो किसी के लिए साढ़े तीन लाख रुपए की मांग की गई थी।

छह लाख रुपए में होगी छतों की मरम्मत
प्राथमिक स्कूल चमारी, रुसल्ला, बेरखेड़ी माफी स्कूल की मरम्मत के लिए दो-दो लाख रुपए आए हैं। इस राशि से तीनों भवनों की छात की मरम्मत होना है। क्योंकि छत पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है।

अधिकारियों को भेजी है जानकारी
जर्जर स्कूल भवनों की जानकारी अधिकारियों को भेजी गई है और जो बजट वहां से मिला है उससे मरम्मत कार्य कराया जाएगा। यह राशि स्कूल के खाते में डाली गई है।
ब्रजेन्द्र शर्मा, उपयंत्री, जनपद शिक्षा केन्द्र, बीना