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deepavali puja muhurat 2018 : जानिए कौन कब करे पूजन, जिससे हो जाएं मालामाल

त्रिवेणी संयोग में मनेगी दिवाली
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सागर

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Reshu Jain

Nov 07, 2018

सागर. कार्तिक कृष्णपक्ष की अमावस्या पर बुधवार को दीपावली का पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। अमावस्या की तिथि मंगलवार को ही लग जाएगी। इस बार दीपावली पर समृद्धि और सामथ्र्य प्रदान करने वाले आयुष्मान योग और सौभाग्य योग के साथ स्वाति नक्षत्र का मंगलकारी त्रिवेणी संयोग बन रहा है। दिवाली की तैयारी पर शहर बंदनवार और आकर्षक लाइटिंग से जगमगा रहा है। धनतेरस के दूसरे दिन मंगलवार को नरक चतुर्दशी पर घरों में भगवान विष्णु और हनुमान की पूजा-अर्चना हुई।

दिवाली के पहले को बाजार में दिनभर त्यौहार की रौनक नजर आई। शहर के मुख्य बाजार तीनबत्ती से लेकर निमग मार्केट में आखिर समय लोगों ने खरीददारी की। दीपक, वंदनवार, मिठाई और रांगोली खरीदने वालों की भीड़ रही। इस बार शहर में डिजाइनर टेराकोटा के दीपक और रांगोली को खास पसंद किया गया।

ऐसे करें पूजन
एक पटा पर स्वच्छ कपडा़ बिछाकर सबसे पहले माता लक्ष्मी, गणेश की मूर्ति या फोटो रखें, महालक्ष्मी,महाकाली और महासरस्वती स्वरुप तीन चावल के पुंज बनाकर रखें। एक मिट्टी का बड़ा दीपक और बाकी छोटे दीपक रंगोली या चौक पर रखें, कलश, जिस पर नारियल रखें। बहीखाता, कलम और दवात, नकदी की संदूकची रखें। माता लक्ष्मी की पूजा अपनी शक्ति के अनुसार ही करें दिखावे की जरूरत नहीं। माता लक्ष्मी को पुष्प में कमल व गुलाब प्रिय है। फल में श्रीफल, सीताफल, बेर, अनार व सिंघाड़े प्रिय हैं। सुगंध में केवड़ा, गुलाब, चंदन के इत्र का प्रयोग इनकी पूजा में अवश्य करें। अनाज में चावल तथा मिठाई में घर में बनी शुद्धता पूर्ण केसर की मिठाई या हलवा, शिरा का नैवेद्य उपयुक्त है। प्रकाश के लिए गाय का घी, मूंगफली या तिल्ली का तेल इनको शीघ्र प्रसन्न करता है। अन्य सामग्री में गन्ना, कमल गट्टा, खड़ी हल्दी, बिल्वपत्र, पंचामृत, गंगाजल, ऊन का आसन, रत्न आभूषण, गाय का गोबर, सिंदूर,.भोजपत्र का पूजन में उपयोग करना चाहिए। यह सभी माता लक्ष्मी को बहुत ही प्रिय हैं।

शुभ मुहूर्त
प्रदोष काल का समय : सायं 5.27 से 8.05 तक। इस मुहूर्त में एक सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें स्थिर लग्न वृषभ भी मिल जाएगा। वृष और प्रदोष दोनों मिल जाने से ये दीपावली पूजन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है।
वृष लग्न : दीपावली पूजन स्थिर लग्न वृष में भी किया जाता है। व्ययसाय से जुड़े लोग अपने प्रतिष्ठान में इसी समय पूजन करवाते हैं। वृष लग्न 5.14 से 7.50 तक रहेगा।
निशीथकाल : रात्रि 8.11 से 10.51 तक लगेगा। यह काल व्यापारियों के लिए बहुत अच्छा है। इसमे पूजन का विशेष शुभ मुहूर्त है।
महानिशीथ काल : रात्रि 11.14 से रात्रि 1.06 तक। इसमें सिंह लग्न भी मिल जाएगा।

तुलसी, हैंगिंग, लालटेन दीपक की डिमांड
दिवाली में आपके घर उजाला देसी दीये करेंगे, लेकिन अंदाज कुछ अलग होगा। इस बार गुजरात और कोलकता से आए टेराकोटा दीयों की धूम रहेगी। तुलसी, हैंगिंग और लालटेन दीपक ग्राहक पसंद कर रहे हैं। इनकी कीमत 5 रुपए से 150 रुपए तक है।

कौन कब करे पूजन
1. गृहस्थ : प्रदोष काल में पूजन करें।
2. व्यापारी : प्रदोष और वृष लग्न में दीपावली पूजन करें तो बेहतर है।
3. छात्र : प्रदोष काल में पूजन करें।
4. आईटी, मीडिया, फिल्म, टीवी इंडस्ट्री, मैनेजमेंट और जॉब करने वाले : शुक्र प्रधान लग्न वृष में।
5. सरकारी सेवा के लोग अधिकारी और न्यायिक सेवा के लोग : वृष लग्न में ही पूजन करें।
6. चौघडिय़ा मुहूर्त में भी किसी विशेष लाभ हेतु पूजा कर सकते हैं। शाम 7.51 से रात्रि 11.42 तक शुभ एवं चर की चौघडिय़ा रहेगी तथारात्रि 11.56 से 12.33 तक लाभ की चौघडिय़ा रहेगी।