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राहगीरों को धूल के गुबार और गिट्टियां कर रहीं बेहाल

पग-पग मुसीबत: परेड मंदिर से कबूला पुल तक सड़क निर्माण में लापरवाही, नियमों का भी नहीं हो रहा पालन

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Dry roads Road people do not walk

Dry roads Road people do not walk

सागर. कैंट क्षेत्र में बन यह सड़क इन दिनों राहगीरों के लिए मुसीबत बन गई हैं। संबंधित विभाग व एजेंसी की लापरवाही व मनमानी इस तरह हावी है कि यहां चलने वाले लोग हादसे का शिकार होने के साथ-साथ बीमार हो रहे हैं। परेड मंदिर से कबूला पुल तक सड़क पर जानलेवा गड्ढे हैं, धूल के गुबार उड़ रहे हैं। ऐसी स्थिति राहगीरों का यहां से आवागमन मुक्किल हो गया है। आसपास रहवासी क्षेत्रों के लोगों का तो सांस लेना तक दूभर हो गया है।
बारिश में डामर बहने के बाद गिट्टियों में तब्दील हुआ कबूला पुल से परेड मंदिर के बीच नेशनल हाइवे २६ का एक्सटेंशन वाहन चालकों की मुसीबत बन गया है। गढ्डों को छिपाने के लिए लोनिवि द्वारा बरसात में डाली गई मिट्टी के कारण अब वाहन गुजरने के बाद सड़क पर धूल के गुबार छाए रहते हैं। सड़क पर उठते धूल के गुबारों के बीच से होकर ही लोगों को गुजरना होता है जिससे आसपास के रहवासी और वाहन चालकों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कबूला पुल से डीएनसीबी स्कूल के बीच स्थित घरों में रहने वाल सदर के रहवासियों को धूल के कारण आंखों की एलर्जी, खांसी जैसी दिक्कतों परेशान कर रही हैं।
दो-तीन महीने झेलनी पड़ सकती है मुश्किल
नेशनल हाइवे के कबूला पुल से परेड मंदिर के बीच के टुकड़ों की बदहाली के कारण धूल और गिट्टियों की परेशानी का सामना रहवासी और वाहन चालकों को जनवरी महीने तक करना पड़ सकता है। क्योंकि अभी इसी सड़क के दूसरे हिस्से में कबूला पुल से भैंसा नाका की ओर काम शुरू हुआ है लेकिन नापजोख में पक्षपात के आरोपों के चलते निगम क्षेत्र के रहवासी परिवारों के विरोध के चलते यह काम बार-बार अटक रहा है।
टलेगा काम
विधानसभा चुनाव की आचार संहिता के चलते भी सड़क के इस हिस्से के निर्माण में कम से कम तीन माह का समय लगने का अनुमान है। एेसे में वाहन चालकों को इस उखड़ी पड़ी सड़क से गुजरते हुए अभी दो-तीन माह और मुसीबत का सामना कर पड़ सकता है।
जख्मी हो रहे लोग
परेड मंदिर सड़क पर सुबह से शाम तक छोटे और भारी वाहनों का आवागमन होता है। कनेक्टिविटी का प्रमुख मार्ग होने से यहां काफी दबाव रहता है। भारी वाहनों के गुजरते समय टायर के दबाव के कारण उछली गिट्टियां लगने से वाहन चालक और राहगीर जख्मी हो रहे हैं। वहीं धूल रहवासियों को खांसी-आंख की एलर्जी का मरीज बना रही है।