
Fate of Bundelkhand special package - farming in pagara reservoir, can
सागर. पिछडे़ बुंदेलखंड की समृद्धि के लिए तत्कालीन केंद्र की कांग्रेस नीत सरकार द्वारा दिए गए विशेष पेकेज की राशि का अनियोजित उपयोग कहीं हुआ है तो वह इस अंचल का संभागीय मुख्यालय सागर। सागर विधानसभा क्षेत्र की कनेरा जलाशय बांध परियोजना के साथ ही नरयावली विधानसभा के ग्राम पगारा में भी जलाशय बांध बनाया गया है। करीब ३ करोड़ की राशि से बनी इस योजना में पानी तो है, लेकिन नहर की सरंचना में तकनीकि खामियां होने से गांव के किसानों को पानी का लाभ नहीं मिल पा रहा। इसके अलावा तालाब की डीसिल्टिंग न होने से कतीपय किसानों ने तालाब की सूखी भूमि में ही खेती करना आरंभ कर दिया है। इस योजना का भूमि पूजन 2011 में किया गया था और तालाब 2014 में बन कर तैयार भी हो गया। हालात यह हैं कि प्राकृतिक सौंदर्य से लबरेज इस इलाके में पर्यटन की अपार संभावनाएं भी हैं।
करीब 3 करोड़ की राशि से बना था तालाब
जिला मुख्यालय से महज करीब 8 किलोमीटर दूर ग्राम पगारा में पहाड़ों की तलछटी में बांध बनाकर जलाशय का रुप दिया गया था। करीब 3 करोड़ की लागत से बने इस जलाशय का पानी मूल रूप से सिंचाई के लिए उपयोग के लिए रखा गया है। बताया जा रहा है कि, जलाशय में बरसाती पानी का स्टोरेज होता है। योजना के तहत ग्राम पगारा व आसपास के किसानों के लिए सिंचाई का बड़ा माध्यम भी है। संपन्न किसान पाईप डालकर मोटर पंप से पानी का उपयोग कर रहे हैं, किंतु संसाधन विहीन किसानों के खेत तक पानी नहीं पहुंच पर रहा। इसकी बड़ी वजह नहर निर्माण में तकनीकि खामियां हैं।
तालाब को डिसिल्टग की दरकार
पगारा का यह जलाशय करीब 200 हैक्टेयर भूमि को सिंचित करने की क्षमता रखता है। तालाब की डिसिल्ंिटग न होने से भराव क्षमता पर प्रभाव पड़ा है। इसी के चलते किसानों ने तालाब के सूखे हिस्से में खेती भी आंरभ कर दी है। इस अवैध खेती पर न तो जन प्रतिनिधि का ध्यान है न ही जल संसाधन विभाग का। बताया जा रहा है कि जो नहर गांव के खेतो के लिए पानी मुहैया कराने बनाई गई है उसका ढाल तालाब की ओर ही है। इसके अलावा पास से गुजरे नाले से होकर पानी व्यर्थ बह जाता है। क्या कहते हैं ग्रामवासी इस मामले में ग्रामवासी रोनी राम पटैल, सरमन पुरी गोस्वामी, महेंद्र पुरी का कहना है था कि, नहर ठीक ढंग से बन जाए तो पगारा सहित आसपास के करीब 200 किसानों को लाभ हो जाएगा। दूसरा बड़ा काम तालाब का गहरीकरण व डिसिल्ंिटग का है। यह कार्य हो जाएं तो गर्मी में भी सिंचाई के लिए पानी मिल सकता है। तालाब सूख जाने से गांव के ही किसान यहां खेती करते हैं।
पत्रिका ने बताया है तो संज्ञान लूंगा
हमने ग्रामवासियों के खेतों की सिंचाई के लिए बुंदेलखंड विशेष पेकेज से जलाशय योजना स्वीकृत कराई थी। हमे नहीं मालूम की नहर निर्माण में कोई तकनीकि खामी है, किसानों ने भी कोई शिकायत नहीं की है। पत्रिका ने बताया है तो मैं इस पर संज्ञान लूंगा और संबंधित विभाग से चर्चा कर खामियों को दूर करने का प्रयास करुंगा। प्रदीप लारिया विधायक
Published on:
31 Jan 2019 05:05 am
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