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ढाई लाख का कर्ज न चुका पाने से परेशान वृद्ध किसान ने जहर खाकर दी जान

बीएमसी में उपचार के दौरान भी बरती गई लापरवाही

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Nitin Sadaphal

Jul 04, 2017

suicide

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सागर. कर्ज के दबाव से परेशान मनेशिया के एक किसान ने मंगलवार को सल्फास खाकर जान दे दी। हालत बिगडऩे पर परिजन उसे राहतगढ़ सीएचसी ले गए, वहां से उसे मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया, जहां शाम को उसकी मौत हो गई। किसान दो-तीन साल से फसल खराब होने से कर्ज नहीं चुका पा रहा था। उस पर रिश्तेदार, स्थानीय साहूकार व ग्रामीणों का करीब ढाई लाख रुपए कर्ज था और बार-बार लगाए जा रहे तकादे से तनाव में था। खबर लगते ही सुरखी विधायक और एसडीएम-तहसीलदार बीएमसी पहुंचे, जहां उनके सामने किसान की सांस उखड़ गई। उधर, शव के गांव पहुंचते ही प्रशासनिक अनदेखी से नाराज परिजनों ने अंतिम संस्कार से इनकार कर दिया। तहसीलदार ने 20 हजार रुपए और मौके पर पहुंचे प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष ने अपनी ओर से10 हजार रुपए की आर्थिक मदद मुहैया कराई, जिसके बाद अंतिम संस्कार किया गया।



शर्मिंदगी नहीं झेल पाया वृद्ध किसान
राहतगढ़ के मनेशिया के 65 वर्षीय किसान परसराम साहू को उसकी पत्नी रूपरानी, बेटा संजय व पड़ोसी द्वारका प्रसाद पटेल गंभीर हालत में सीएचसी राहतगढ़ से रेफर करने पर बीएमसी लाए थे। गंभीर हालत में परसराम को भर्ती कर उपचार शुरू किया गया। उसके पुत्र संजय साहू ने बताया सुबह सात बजे अचानक उल्टी होने पर उन्हें जहर खाने का पता चला था। परसराम के परिवार के पास 5 एकड़ जमीन है। खेती के लिए खाद-बीज की खरीदी और बोवनी-बखरनी के अलावा घर चलाने के लिए परसराम ने कभी रिश्तेदारों से तो कभी स्थानीय साहूकारों से कर्ज लिया पर उसे पटा नहीं पा रहा था। लोग जब रुपए मांगते तो वह शर्मिंदा हो जाता और यह दुख वह झेल नहीं पा रहा था।



खेती के घाटे ने किसान से बनाया मजदूर
बीएमसी में भर्ती किसान परसराम के पड़ोसी ने बताया कि सूखी खेती के कारण उनके क्षेत्र के अधिकांश किसानों की हालत खराब है। परसराम पर रिश्तेदार और गांव के लोगों का कर्ज था। किसी को ट्रैक्टर से बखरनी-बोवनी कराने का कर्ज पटाना था, तो किसी को घर चलाने ली गई उधारी चुकानी थी। खेती के इसी घाटे से परसराम के परिवार पर कर्ज चढ़ता गया। परसराम के तीन पुत्र हैं, बड़ा बेटा परम साहू मजबूरी में बेगमगंज में मजदूरी करता है, जबकि दिनेश और संजय खेती करते हैं, लेकिन पांच एकड़ से उनके परिवार का गुजारा मुश्किल से हो रहा था।



बीमारी व तनाव के चलते की आत्महत्या
बीएमसी में उपचाररत किसान को देखने मंगलवार शाम करीब 5 बजे पहुंचे एसडीएम एलके खरे ने किसान पर कर्ज होने की बात को सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना था किसान ने बीमारी और निजी तनाव के चलते जहर खाया था। एसडीएम की निगरानी में पुलिस और प्रशासन के अधिकारी इलाज की सुध लिए बिना दस्तावेज तैयार करने में जुट गए। इस दौरान जब किसान की मौत हो गई, तो उन्होंने डॉक्टर ड्यूटी रूम में ही मृतक किसान के पुत्र संजय और पत्नी रूपरानी से कुछ कागजों पर हस्ताक्षर करा लिए। एसडीएम खरे ने किसान की मौत को लेकर प्रशासन के पक्ष से वहां मौजूद सुरखी विधायक पारुल साहू को भी अवगत कराया।



विधायक को देते रहे गलत जानकारी
सुरखी विधायक पारुल साहू मंगलवार शाम को किसान परसराम की हालत को देखने बीएमसी पहुंचीं। विधायक के बाहर आते ही परसराम की सांस थम गई। जैसे ही यह खबर विधायक तक पहुंची वे बीएमसी कैंपस में ही रुक गईं। उन्होंने इस पर दुख जताते हुए कहा कि सुबह खबर लगते ही मैंने सुबह समाधान ऑनलाइन के दौरान कमिश्नर-कलेक्टर की मौजूदगी में इस घटना की सूचना दी थी। इसके बाद से शाम तक किसान की हालत में सुधार की जानकारी दी जाती रही। शाम को हालत गंभीर होने का पता चला तब वे स्वयं बीएमसी पहुंचीं और इलाज शुरू कराया। तब तक परसराम को देखने वाला कोई नहीं था। परिजनों ने भर्ती रहने के दौरान उपचार में ध्यान नहीं देने के बारे में शिकायत भी की है।



बीएमसी में इलाज के नाम पर रस्मअदायगी
किसान परसराम को लेकर आए द्वारका प्रसाद ने कैजुअल्टी वार्ड में मरीजों की अनदेखी पर नाराजी जताई। उनका कहना था भर्ती करते समय ही डॉक्टर ने देखा और शाम तक कोई सुध लेने नहीं पहुंचा। जहर का असर कम करने एक बॉटल चढ़ाई थी, जिसमें परसराम का बेटा संजय और मैं शाम तक पानी भरता रहा। एक-दो बार नर्स को बुलाया, लेकिन मरीज की हालत में सुधार हुआ या नहीं, यह देखने की जरूरत किसी डॉक्टर ने नहीं समझी। बीएमसी में रस्म अदायगी ने की गई होती तो शायद परसराम की जान बचाई जा सकती थी।



अधिकारी गायब, पूर्व विधायक ने कराया अंतिम संस्कार
सुरखी विधानसभा क्षेत्र के किसान की आत्महत्या की सूचना पर पूर्व विधायक व प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष गोविंद सिंह राजपूत मनेशिया पहुंचे। वहां प्रशासन द्वारा किसान की आत्महत्या की वजह बीमारी और निजी कारण बताने से नाराज परिजनों द्वारा अंतिम संस्कार से इनकार करने का पता चला। परिजन आर्थिक मदद की मांग कर रहे थे, जिस पर राजपूत ने अपनी ओर से दस हजार रुपए की मदद करते हुए तहसीलदार से इस संबंध में बात की। इसके बाद परिवार को बुधवार को प्रशासन की ओर से 20 हजार रुपए की मदद पहुंचाने का आश्वासन दिया गया। अधिकारियों के न पहुंचने पर ग्रामीणों ने पूर्व विधायक की समझाइश के बाद परसराम के शव का दाह संस्कार किया। प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष गोविंद ङ्क्षसह राजपूत के अनुसार सरकार की अनदेखी के चलते प्रदेशभर में किसानों की आत्महत्या का दौर थम नहीं रहा है। उन्होंने किसान के परिवार के सदस्य को नौकरी और एक करोड़ रुपए का मुआवजा देने की मांग भी प्रशासन से की है।

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