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गणपति वप्पा मोरिया के जयकारों के साथ विराजे विघ्नहर्ता

गणेशोत्सव का शुभारंभ

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सागर

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Anuj Hazari

Sep 14, 2018

Ganapathi Wappa Morea wakes up with shouts of joy

Ganapathi Wappa Morea wakes up with shouts of joy

बीना. गणेशोत्सव का शुभारंभ गुरुवार को भगवान गणेश की स्थापना के साथ हुआ। शहर में जगह-जगह आकर्षक झांकियां सजाकर गणेश प्रतिमाएं विराजित की गई। साथ ही घरों में भी लोगों ने बुद्धि के दाता को विराजित किया। गणेशोत्सव की शुरुआत नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में धूमधाम से हुई। झांकियों तक मूर्तियों के लाने के लिए लोग बाजे-गाजों के साथ पहुंचे। नृत्य करते हुए लोग मूर्तियां झांकियोंं तक लाए। इसके बाद शुभ मुहूर्त में विधि विधान से स्थापना की गई। गणोशोत्सव में अब प्रत्येक दिन धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। नगर में कई जगह आकर्षक झांकियां सजाई गई हैं, झांकियों को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ रहेगी। शहर में दस दिनों तक धार्मिक माहौल रहेगा।
धूमधाम से हुई स्थापना
मंडीबामोरा. गणेश चतुर्थी के मौके पर देर शाम तक विघ्नहर्ता श्रीगणेश जी की मूर्तियां लेने लोग बाजार में पहुंचे। मंडीबामोरा सहित आसपास के लोग बाइक सहित अन्य वाहनों से मूर्तियों को ले जाते देखे गए। दर्जनों पंडालों सहित लगभग हर घर में विघ्नहर्ता विराजे। देर रात तक भारी उत्साह से पंडालों में स्थापना की जाती रही।

कृषिमंडी में भागवत कथा का आयोजन
कृषि उपज में मंडी में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है, जिमसें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। गुरुवार को कथा व्यास राधामोहन शरण ने कहा कि इस कलयुगी जीवन में उल्टी धारा बह रही है, जिसमें देश में भ्रष्टाचारियों की पहुंच और मान सम्मान बढ़ता जा रहा है। वहीं दूसरी ओर ईमानदारों का कोई मूल्य नहीं है। उन्होंने कहा कि सम्पूर्ण कामनाओं को पूरा करने वाला नारायण कवच है, जिसे हमें रोज करना चाहिए। गजेन्द्रमुख का पाठ करने से मृत्यु टल जाती है। कोई शुभ कार्य करने से पहले भगवान श्रीगणेश का पूजन करना चाहिए, जिससे कार्य में लगातार उन्नति होती है। उन्होंने कहा कि जो विष पीता है वह देव नहीं महादेव होता है। लक्ष्मी जी जिसका त्याग करती है वह हीन हो जाता है। देश की पूंजी का 75 प्रतिशत हिस्सा नेताओं पर तथा 25 प्रतिशत आम जनता पर खर्च होता है यह देश की व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि जिसमें अपना प्रयोजन सिद्ध हो उतनी ही सम्पत्ति एकत्रित करनी चाहिए, जिससे संतोष रहे। क्योंकि संपत्ति हमारे साथ मरने के बाद साथ नहीं जाती है। कथा में उन्होंने भगवान राम के जन्म की कथा भी सुनाई। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम मनाया गया। जिसमें भक्तों ने नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की के जयकारों के साथ जन्मोत्सव मनाया। भजनों की प्रस्तुति पर भक्तों ने जमकर नृत्य किया।