38 वर्षों से बनाते आ रहे ईको फ्रेंडली प्रतिमाएं, जिससे पर्यावरण और जलीय जीवों को न हो हानि
बीना. साहू समाज मंदिर पर हर वर्ष ईको फें्रडली प्रतिमा विराजित की जाती है और यहां विराजित होनी वाली प्रतिमाएं 38 वर्षों से मूर्तिकार चौधरी अशोक साहू बना रहे हैं। इस वर्ष उन्होंने छह माह मेहनत कर सोयाबीन बड़ी की प्रतिमा तैयार की है, जो आकर्षण का केन्द्र रहेगी।
मूर्तिकार ने बताया कि सोयाबीन बड़ी से प्रतिमा बनाने के लिए उन्हें छह माह का समय लगा है, जिसमें 21 किलो बड़ी लगी हैं। बड़ी गोल होने के कारण उसे चोकोर करने के लिए उसकी छिलाई भी करनी पड़ी। बारिश में नमी से प्रतिमा के खराब होने का खतरा रहता है, इसलिए बल्व की रोशनी से गर्माहट दी जा रही है। इस मूर्ति की खास बात यह है कि इसमें लकड़ी या अन्य किसी चीज का सपोर्ट नहीं है, बड़ी को आपस में जोडकऱ तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि खाद्य सामग्री या अन्य ऐसी वस्तुओं से प्रतिमा तैयार करते हैं, जो जल और जलीय जीवों को हानि न पहुंचाए। सोयाबीन बड़ी की प्रतिमा विसर्जित होने के बाद जलीय जीवों को भोजन मिलेगा। 38 वर्षों से वह निरंतर ईको फ्रेंडली प्रतिमा बनाते हैं, जिसकी स्थापना साहू समाज मंदिर पर होती है। इस कार्य में आदर्श साहू समाज समिति अध्यक्ष सुरेन्द्र साहू का सहयोग रहता है और समिति ही प्रतिमा विराजित करती है।
इन सामग्रियों से तैयार कर चुके हैं प्रतिमा
मूर्तिकार अशोक ने बताया कि वह अभी तक चने की दाल, मूंगफली, घी, नारियल, सेव, मखाने, बूंदी, लाई, ज्वार के डंठल, बेर, माचिस की तीली, मोतीचूर के लड्डू, गरी गोला, साबूदाना आदि की गणेश की प्रतिमा बना चुके हैं।